शारदा समूह की कंपनियों के बीच हुए जटिल ट्रांजैक्‍शन

नई दिल्ली। कोलकाता के शारदा ग्रुप के अकाउंट्स की जांच में जटिल ट्रांजैक्शन स्ट्रक्चर का खुलासा हुआ है। कई ग्रुप कंपनियों के बीच बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन हुए हैं, ऐसे में पैसों की लेन-देन को पूरी तरह सामने लाने में कई दिन लग सकते हैं। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) की जांच में शारदा रियल्टी, शारदा कंस्ट्रक्शन कंपनी, देवकृपा व्यापार प्राइवेट लिमिटेड, बंगाल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और बंगाल अवधूत एग्रो के बीच 2011-12 में कई तरह के क्रॉस लोन का मामला सामने आया है।

जांच से जुड़े एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया, 'आरओसी को लगता है कि जानबूझकर फाइनैंशल गड़बड़ियों को छिपाने के लिए बड़े पैमाने पर ग्रुप कंपनियों के बीच फाइनैंशल ट्रांजैक्शन किए गए हैं।' आरओसी ने 23 अप्रैल को मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स को दाखिल रिपोर्ट में कहा है, 'शारदा कंस्ट्रक्शन को 2011-12 में शारदा रियल्टी से 40 करोड़ रुपए का लॉन्ग टर्म लोन मिला, लेकिन बाद में 30 करोड़ रुपए का कई बार ट्रांजैक्शन हुआ और अंत में यह 10 करोड़ रुपए रह गया।' कंपनी ने इस पैसे का इस्तेमाल कोई एसेट तैयार करने में नहीं किया। इसकी जगह इसने कई दूसरी ग्रुप कंपनियों को लोन दिया और वे कंपनियां किसी बिजनस गतिविधियों में शामिल नहीं थीं।

बचे हुए 10 करोड़ रुपए में से शारदा कंस्ट्रक्शन ने 2.9 करोड़ रुपए का कर्ज अपनी सब्सिडियरी देवकृपा व्यापार को दिया। शारदा कंस्टक्शन ने 3.5 करोड़ रुपए हिस्सेदारी खरीदने में खर्च की। इस कंपनी ने 2.31 करोड़ रुपए का कर्ज बंगाल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया। इसने 36 लाख रुपए का कर्ज एक अन्य ग्रुप कंपनी वेस्ट बंगाल अवधूत एग्रो प्राइवेट लिमिटेड को दिया। इन कंपनियों में देवकृपा व्यापार किसी भी उल्लेखनीय बिजनस ऐक्टिविटी में शामिल नहीं थी। कंपनी का फाइनैंशल स्टेटमेंट कहता है कि इसने टीवी स्टूडियो को बनाने में पैसा खर्च किया, जबकि स्टूडियो अभी भी पूरा नहीं बना है।

शारदा कंस्ट्रक्शन से बंगाल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को कर्ज मिला, लेकिन इसके पास भी कोई बिजनस मॉडल नहीं है। कंपनी का 43 करोड़ रुपए का नेगेटिव नेट वर्थ है और इसने 2011-12 में 14 करोड़ रुपए का लॉस झेला है। इन सब तथ्यों का खुलासा आरओसी की रिपोर्ट में हुआ है।

तीसरी कंपनी वेस्ट बंगाल अवधूत एग्रो प्राइवेट लिमिटेड का मामला भी पूरी तरह संदिग्ध है। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के बुक्स पर भारी-भरकम ऐसेट होने के बावजूद इसने इस्तेमाल के लिए कोई फंड नहीं रखा है। कंपनी के अकाउंट के अनुसार इसके पास 1.78 करोड़ रुपए की जमीन है, बिल्डिंग की वैल्यू 1.35 करोड़ रुपए है। कंपनी के पास 70 लाख रुपए की मशीनरी है, लेकिन इन ऐसेट्स से कंपनी को किसी तरह की आय नहीं हुई है।

आरओसी की हालिया रिपोर्ट शारदा ग्रुप कंपनियों के अकाउंट्स में अनियमितताओं के सामने आने के 10 महीने बाद आई है। आरओसी ने कंपनी के मामलों में जांच के सुझाव दिए हैं। कॉरपोरेट मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा, 'हमने राज्य सरकार को उनके जांच को समझने के लिए लिखा है। हम अभी तक क्या किया है और आगे क्या करने की योजना है, इन सब को राज्य सरकार को समझना चाहिए।' (ईटी)

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