शिक्षिका के गुप्तांग में गोली-पत्थर डलवाने के आरोपी एसपी को वीरता पुरस्कार, विरोध शुरू

छत्तीसगढ़ के आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का विवाद के साथ गहरा नाता होता जा रहा है..जहां एक ओऱ जशपुरनगर के कलेक्टर अंकित आनंद द्वारा अपने ही जिले को देश का सबसे घटिया जिला कहने पर बवाल अभी थमा ही नहीं था कि प्रदेश के एक आईपीएस अफसर को राष्ट्रपति के पुलिस वीरता पदक दिए जाने की घोषणा के साथ ही नया बवाल खड़ा हो गया है.. दरअसल दंतेवाड़ा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अंकित गर्ग को वीरता के लिए दिए गए पुलिस पदक से विवाद छिड़ गया है. सामाजिक संगठन गर्ग को इस तरह का पदक दिए जाने का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में एक आदिवासी महिला शिक्षक सोनी सोढ़ी को हिरासत में प्रताड़ित करने का मामला चल रहा है.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनी सोढ़ी का मेडिकल परीक्षण कोलकाता के नीलरतन सरकारी मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल में किया गया जहां पाया गया कि 'उनके गुप्तांगों में गोलियां और पत्थर' डाले गए. सोढ़ी की तरफ से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सिर्फ़ इतना ही नहीं, उन्हें हिरासत में बिजली के झटके भी दिए गए. इस मामले में सोढ़ी ने अंकित गर्ग को नामज़द अभियुक्त बनाया है. सामाजिक संगठनों का कहना है कि अंकित गर्ग पर ऐसे गंभीर आरोप लगने की सूरत में उन्हें बहादुरी के लिए राष्ट्रपति का पदक देना ग़लत है.

आईपीएस अंकित गर्ग पर पहले भी निर्दोष आदिवासियों की हत्या और गंभीर मानवाधिकार हनन के मामले उठते रहे हैं.. दंतेवाड़ा में महुआ बीनते 6 आदिवासियों की हत्या मामले में लीपापोती, पोंजेर में पुलिसवालों और सलवा जुडूम सैनिकों द्वारा आदिवासियों की हत्या और बहुत दबाव के बाद अज्ञात वर्दीधारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, आदिवासी नेता कोपा कुंजाम की हत्या की साजिश, माठवाड़ा सलवा जुडूम कैंप में तीन आदिवासियों की हत्या, चेरपाल में चल रही एक बैठक में पुलिसवालों द्वारा एक महिला और ढाई साल के एक बच्चे की हत्या जैसे मामलों में अंकित गर्ग पर इनमें शामिल होने या अपराधी पुलिसकर्मियों के बचाव के आरोप लगते रहे हैं.

पिछले साल महासमुंद जिला और ओड़िसा सीमा में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड हुई थी, जिसमे नौ नक्सली मारे गए थे, पुलिस टीम कि सफल नेतृत्व करने के प्रतिफल स्वरुप महासमुंद के तत्कालीन एस.पी. अंकित गर्ग को इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्य सरकार ने उनकी बाहादुरी के एवज में गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया है यह अवार्ड अंकित गर्ग को स्वतंत्रता दिवस पर दिया जाएगा, अंकित को दिये जाने वाले अवार्ड से पी.यू.सी.एल. सहित कई सामाजिक संगठनों ने विरोध किया है.. इन सामाजिक संगठनों ने सोनी सोढ़ी प्रकरण को आधार बनाते हुए आरोप लगाया है, दंतेवाड़ा के तत्कालीन एस.पी. अंकित गर्ग के आँखों सामने ही महिला हवालदार ने सोनी सोढ़ी के संवेदनशील अंगों के ऊपर प्रहार कर प्रताड़ित की गयी, जिसका प्रकरण अभी उच्चतम न्यायलय में विचाराधीन है, ऐसे में अंकित गर्ग को अवार्ड दिये जाने का इन सामाजिक संगठनों ने दिल्ली में अपना विरोध दर्ज कराया है.. अंकित गर्ग जब दंतेवाड़ा में एस.पी.थे तब उन्होंने एस्सार द्वारा नक्सलियों को आर्थिक मदद करने का बड़ा खुलासा करते हुए, नक्सलियों और उद्योगपतियों के संबंधों का खुलासा किया था.. अंकित गर्ग ने अपने ऊपर लगे प्रताड़ना के आरोप को ख़ारिज करते हुए न्यायलय में प्रकरण विचाराधीन होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड लिया है.

बहरहाल इस मामले में पुलिस के आला अधिकारी और राज्य सरकार कुछ भी कहने से कतरा रही है, अलबत्ता उनका कहना है कि गर्ग को दिए गए पुलिस पदक से सोनी सोढ़ी मामले का कोई लेना देना नहीं है. लेकिन सामजिक संगठन पुलिस अधिकारियों की इस दलील को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि सिर्फ सोनी सोढ़ी का मामला ही नहीं अंकित गर्ग पर हिरासत में यातनाएं देने के और भी आरोप हैं. मुंबई स्थित महिलाओं की राष्ट्रीय संस्था वूमेन अगेंस्ट सेक्सुअल वायलेंस एंड स्टेट रिप्रेशन यानी डब्लूएसएस ने एक बयान जारी कर कहा है, "क्या हिरासत में यातनाएं देना कोई बहादुरी का काम है जिसे सरकार प्रोत्साहित कर रही है?".वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गर्ग को ये पदक, महासमुंद के पुलिस अधीक्षक के तौर पर एक नक्सली हमले का बहादुरी के साथ सामना करने के लिए दिया गया है.. उनका कहना है कि अक्तूबर 2010 में माओवादी छापामारों और पुलिस बल में मुठभेड़ हुई जिसमें सुरक्षा बलों नें कई नक्सलियों को मार गिराया था. अंकित गर्ग पुलिस दल का नेतृत्व कर रहे थे. मगर इसी मुठभेड़ में दो आम नागरिकों की भी गोली लगने से मौत हुई थी. इनमें से एक मज़दूर था जबकि एक गूंगा और बहरा था. पुलिस ने दलील दी थी कि यह दोनों लोग माओवादियों और पुलिस की गोलीबारी के बीच फंस गए थे. लेकिन ये दावा विवादित रहा है. ऐसे में अंकित गर्ग द्वारा सोनी सोढ़ी को प्रताड़ित किया जाना और इसके बाद उनका चयन वीरता पदक के लिए होना इसको लेकर नया बखेड़ा शुरू हो गया है.

छत्तीसगढ़ पुलिस का विवादों के साथ गहरा नाता रहा है.. अक्सर छत्तीसगढ़ में पुलिसिया रौब अब आम लोगों के अलावा पत्रकारों पर भी दिखने को मिलता रहता है..पत्रकारों पर एफआईआर कराने देने की धमकी दी जाती है..छत्तीसगढ़ में कभी खुलेआम पुलिस अपने मातहत अधिकारियों के सामने गार्ड को लात-घूंसे से मारती है..जिसमें गार्ड की मौत भी हो जाती है..तो कभी बीच सड़क पर पत्रकारों पर अपनी दबंगई दिखाती है..तो कभी पुलिस मुख्यालय में पत्रकारों को उनका एनकाउंटर कर देने की धमकी दी जाती है.. अभी हाल ही में दुर्ग रेंज के आईजी आर.के.विज पर लगे आरोपों पर सवालों के जवाब में आईजी महोदय ने पत्रकार पर ही एफआईआर कराने की धमकी दे दी थी..लेकिन ऐसे अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई..उस पर से इस तरह के कार्यप्रणाली के बाद भी अगर किसी पुलिस अधिकारी पर आदिवासी महिला को प्रताड़ित करने का आरोप हो…और से उसे वीरता पदक का तमगा देकर नवाजा जाए..तो क्या इससे ऐसे पुलिस अधिकारियों के हौंसले बुलंद नहीं होंगे.. जो अपने आपको तथाकथित जनता के रखवाले बताते हैं.

आरके गांधी की रिपोर्ट.

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