शिमला प्रेस क्‍लब का साधारण अधिवेशन भी विवादों में घिरा

विवादों में घिरे प्रेस क्लब शिमला का साधारण अधिवेशन भी विवादास्पद हो गया है। क्लब की संचालन परिषद की 2 जून की बैठक में 27 जून को साधारण अधिवेशन बुलाए जाने का फैसला लिया गया, लेकिन इसकी जानकारी 22 जून तक किसी को नहीं दी गई। 22 जून को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रेस रूम में लगे अखबार के बक्सों में पत्र डालकर साधारण अधिवेशन की सूचना दी गई। यानी ठीक पांच दिन पहले सदस्यों को साधारण अधिवेशन की सूचना देने के लिए यह नायाब तरीका खोजा गया, जिसने अपने आप में बॉयलाज और सरकारी अधिनियम की धज्जियां उड़ा दी हैं। यह साधारण अधिवेशन नियमानुसार नहीं बुलाया गया, नतीजतन सब कुछ ‘अवैध’ हो गया है।

गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार कृष्णभानु के सख्त पत्र के बाद क्लब के कर्ताधर्ताओं को साधारण अधिवेशन बुलाना पड़ा। क्लब के सालाना चुनाव 13 अक्तूबर 2009 को हुए थे। कायदे से 13 अक्तूबर 2010 से पहले चुनाव हो जाने चाहिए थे, लेकिन ढाई साल बीतने के बावजूद चुनाव नहीं कराए गए। इसका विरोध करते हुए कृष्णभानु ने क्लब के अध्यक्ष धनंजय शर्मा को सख्त पत्र लिखा और अनियमितताओं के गम्भीर आरोप लगाए। अंततः धनंजय शर्मा ने क्लब की संचालन परिषद की बैठक बुलाकर साधारण अधिवेशन बुलाने का निर्णय लिया, ताकि नए चुनाव कराए जा सकें।

साधारण अधिवेशन बुलाए जाने के तरीके से कृष्णभानु के आरोप साबित हो गए कि धनंजय शर्मा क्लब को प्रा. लि. कम्पनी की तरह चला रहे हैं। अधिनियम की धारा 20 (3) और उपविधि की धारा 32(1) के मुताबिक सदस्यों को साधारण अधिवेशन की सूचना कम से कम 21 दिन पहले दी जानी लाजिमी है। नियमानुसार सभी सदस्यों को रजि. पत्रों द्वारा सूचना भेजी जाती है, लेकिन यहां केवल पांच दिन पहले नायाब तरीके से सूचना भेजी गई। सदस्यों को नियमानुसार सूचना न भेजे जाने से क्लब का यह साधारण अधिवेशन ‘अवैध’ हो गया है। सम्पर्क करने पर वरिष्ठ पत्रकार कृष्णभानु ने कहा कि यह धनंजय शर्मा की सोची समझी साजिश लगती है। मजबूर होकर क्लब का साधारण अधिवेशन तो बुलाना पड़ा, लेकिन अब कोशिश है कि ‘कोरम’ ही पूरा न हो और सब टल जाए। यही कारण लगता है कि क्लब के सभी सदस्यों को समय पर सूचित ही नहीं किया गया।

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