शिवपाल सिंह यादव इतनी स्‍पीड में क्‍यों हैं?

अखिलेश सरकार के कबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव इतनी स्पीड में क्यों हैं? पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग उनके जिम्मे हैं। दोनों ही अति महत्वपूर्ण। सबसे ज्यादा इन्हीं विभागों में हडकंप मचा हुआ है। देखने में तो लगता है कि पीडब्ल्यूडी को गर्मियों में ही ज्यादातर सड़कें बनानी होती हैं। सिंचाई विभाग को इसी मौसम में बाढ़-सूखा नहरें-बांध-नलकूप सबकी व्यवस्था दुरुस्त करनी होती है इसीलिए वह बहुत तेजी के साथ अपने विभागों से काम ले रहे हैं। जो देखने में लगता है वह सही भी है, मगर है यह कि शिवपाल सिंह सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई व मुख्यमंत्री अखिलेश के सगे चाचा हैं। अखिलेश से सीनियर कद्दावर, ताकतवर हर तरह से।

जब मुलायम सिंह की विरासत शिवपाल के बजाय अखिलेश को मिली तो शिवपाल इसमें राजी थे, राजी हैं मगर पार्टी और सरकार में भी वह अभी भी एक सुपर पावर हैं यह साबित बनाए रखना है। साथ ही यह भी संदेश नहीं देना कि शिवपाल समूची सरकार को डिस्टर्ब कर रहे हैं। यही संतुलन साधने के लिए अपने दोनों विभागों के माध्यम से शिवपाल सिंह स्पीड में काम कर रहे हैं। माया सरकार में यह दोनों ही विभाग नसीमुददीन के पास थे। दोनों ही विभागों में उन्हीं के लाये गए अधिकारी कर्मचारी काबिज हैं। उन्हीं के खास ठेकेदार और माफिया जमे हैं। जब तक नसीमुद्दीन के फैलाए संजाल को तोड़ नहीं दिया जाता तब तक विभागों को सही ढंग से चलाया नहीं जा सकता। यह चिंता भी शिवपाल सिंह को है, अगर उनके विभागों में कोई गड़बड़ी हुई तो भतीजे की कैबिनेट के अन्य मंत्री पीठ पीछे खिल्ली उड़ाएंगे, इसीलिए वह खुद को सुपर बनाए रखना चाहते हैं, तभी विभागीय सक्रियता पूरे मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा इन्हीं की है। शिवपाल के सामने यह स्थिति संकट की तरह है, जिससे वह निजात पाने को हाथ पैर मार रहे हैं।

यूपी सरकार किसी भी काम में जल्दी करती नहीं महसूस हो रही है। यह उसकी कार्यप्रणाली से अब तक स्पष्ट है। उसके पास प्रचंड बहुमत है पांच साल का वक्त है। पूरी तरह निश्चिंत होकर काम कर रही है। लेकिन इसी बीच उसके एक अति महत्वपूर्ण ईकाई शिवपाल सिंह यादव अपने मंत्रालयों का कामकाज संभालने के बाद अगर जल्दी के साथ हड़बड़ी में काम करते नजर आ रहे हैं तो राजनीतिक हलचलें और चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है। आखिर ऐसा क्यों है। दरअसल, शिवपाल सिंह यादव मुलायम सिंह के सगे छोटे भाई भर नहीं हैं वह मुलायम सिंह के हाथ और ऑख दोनों ही हैं। राजनीति की एबीसीडी से लेकर हर दांव पेंच मुलायम सिंह ने बड़ी ही मेहनत और शिद्दत के साथ शिवपाल को सिखाए हैं। शिवपाल हमेशा मुलायम सिंह की अपेक्षाओं पर खरे उतरते चले आ रहे हैं। वह सपा के प्रदेश अध्‍यक्ष भी रहे। संगठन में उनकी तगड़ी पकड़ है।

घटनाक्रम कई वर्ष पहले घूमा तो मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश राजनीति में आ गए। 2012 में  जब मुलायम सिंह की विरासत संभालने का वक्त आया तो मुख्यमंत्री की गद्दी अखिलेश को मिली। तमाम अंदाजे लगाए गए कहानियां गढ़ी गईं। जैसे कि शिवपाल खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। या फिर मुलायम सिंह को बनाना चाहते हैं। वह अखिलेश के अंडर में काम नहीं करना चाहते आदि आदि इत्यादि। वो सब गुजरी हुई बातें हो गई जिनका खंडन और मंडन दोनों ही हो चुके हैं। ताजा परिस्थिति यह है कि यूपी के अखिलेश मंत्रिमंडल में शिवपाल सिंह यादव कबीना लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री के पद पर हैं। शिवपाल के सामने संकट यह है कि उन्हें अखिलेश के अभिभावक के तौर पर सीनियर के तौर पर काम करते हुए दिखना है। अपना आभामंडल धमक और हनक का प्रदर्शन भी करते रहना है। पूर्ववर्ती माया सरकार के कार्याकाल में ताकतवर नसीमुद्दीन सिद्दीकी के फैलाए हुए संजाल को भी तोड़ना है। अन्य सभी मंत्रियों को यह संदेश भी देना है कि जब शिवपाल चुपचाप सिर्फ अपने विभागों में ही सक्रिय हैं अन्य हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं तो बाकी मंत्री भी इसी तरह सबक लें।

शिवपाल कोई ऐसी सक्रियता नहीं दिखाना चाहते जिससे आलोचकों को मौका मिले कि वह अखिलेश पर भारी पड़ने की कोशिश कर रहे हैं। तभी शिवपाल सिंह पीडब्ल्यूडी व सिंचाई विभागों में ही खुद को खपा रखा है। उन्होंने तबाड़तोड़ इंजीनियरों के तबादले किए। मनपसंद को महत्व दिया नसीमुद्दीन के गुर्गों को पैदल किया, कई को सस्पेंड किया। तमाम के खिलाफ जाचें शुरू करवा दी। हड़कम्प मचा हुआ है। यही हाल सिंचाई विभाग का है। शिवपाल सिंह अनुभवी हैं दोनों ही विभागों की नस नस से वाकिफ हैं। उन्हें पता है कि इन दोनों ही विभागों के माया सरकार के स्थापित माफिया काबिज हैं। दोनों ही विभाग तगड़े बजट वाले हैं। दोनों के ही कार्य खुले मैदानों में होते हैं जिनसे प्रदेश की जनता का सीधा वास्ता है। बल्कि यह कहा जाय कि इन दोनों विभागों के आईने में ही सरकार की शक्ल देखी जाती है। सरकार की सफलता असफलता नापने के पैमाने है यही दोनों विभाग। इसलिए सुपर स्पीड पकड़कर वह विभागों के जरिए न केवल अखिलेश सरकार की कार्य क्षमता का अहसास करा रहे हैं बल्कि अपने संकट से भी बखूबी निपट रहे हैं।

चूंकि यह बात सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि अब शिवपाल का विकल्प शिवपाल ही हैं। उन्हें किसी भी काम के करने या ना करने या ऐसा वैसा करने का आदेश करने वाले मात्र मुलायम सिंह ही हैं इसलिए शिवपाल के मसले में न तो कोई वरिष्ठ सपाई सिफारिश का पचड़ा पालता है न ही कोई अधिकारी इधर उधर से सोर्स लगवाता है। यह अहसास कराने में शिवपाल सिंह कामयाब होते जा रहे है। यह बात दीगर है कि उनकी इसी तेजी में ही सड़कों और सिंचाई के कार्य भी तेजी से दिखते हैं जो सरकार के लिए अच्छी बात है।

शिवपाल बोले जल्दी तो है

यह सरकार किसानों की है और किसानों के हितों के लिए सबसे आगे है। सिचाई मंत्री शिवपाल सिंह का यही मानना है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में नहरों, बम्बों की सफाई साल में दो बार होगी और ओखला बैराज की सफाई जो पिछले बीस साल में नहीं हुई है उसको साफ कराने का फैसला ऐतिहासिक है। इससे यमुना में पानी का बहाव सुगम होगा और यूपी में लम्बी दूरी तक लोगों को पानी की उपलब्धता रहेगी। सिंचाई विभाग की कीमती जमीनों पर नोएडा में रसूखदार लोगों ने अनधिकृत कब्जे कर लिए है। फार्म हाउस तक बना लिए है। इन्हें चिन्हित कर लिया गया है। इनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। इनमें दिल्ली और यूपी दोनों के प्रभावशाली लोग हैं। उनके इस कदम से भी काफी हलचल मची हुई हैं। यह पूछने पर कि पूर्वमंत्री नसीमुद्दीन के कार्यकाल की जांचें कराई जा रही हैं क्या? के जवाब में शिवपाल ने कहा कि विभागीय कार्रवाई तो चल रही है। घपलें, घोटालेबाजों को बख्शा नहीं

पीयूष
जाएगा। यह उनकी और सरकार की पहली प्राथमिकता है। उनके विभागों में ही इतनी तेजी से काम क्यों हो रहा है इसके राजनीतिक कारण भी हैं क्या के जवाब में शिवपाल सिंह का कहना था कि जुलाई के पहले प्रदेश को अच्छी सड़कें और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना सरकार की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए वह बहुत तेजी से कार्य कर रहे हैं। इसमें कोई राजनीतिक कारण नहीं है। कोई भी कार्य बदले की भावना से नहीं किया जाएगा बल्कि नियमानुसार कार्रवाई होगी। माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा।

  लेखक पीयूष त्रिपाठी यूपी में साप्‍ताहिक पत्रिका इतवार के ब्‍यूरोचीफ हैं.

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