शुक्‍ला जी न पत्रकार हैं, न नेता, न क्रिकेट प्रशासक, बस मैनेजमेंट गुरु हैं

Mayank Saxena : एक शुक्ला जी हैं…पत्रकार थे…फिर नेता बने…फिर राज्यसभा पहुंचे (नेता और राज्यसभा के क्रम को उल्टा भी पढ़ सकते हैं…) फिर बीसीसीआई में घुस गए…फिर टीम मैनेजर बने…फिर महासचिव…फिर कांग्रेस प्रवक्ता (इस क्रम को भी उल्टा पढ़ सकते हैं…) फिर आईपीएल के 'कमीशन'र बन गए…सॉरी सॉरी…कमिश्नर बन गए…फिर संसद के कामकाज के मंत्री बन गए…मंत्री बनने के बाद ही संसद में सोते दिखाई दिए…ख़ैर इस क्रम को भी उल्टा पढ़ सकते हैं.

हां, ये ज़रूर था कि इस बीच अपना प्रोडक्शन हाउस चलता रहा…फिर चैनल आ गया…कम पैसे में ज़्यादा काम करवा कर कर्मचारियों की मजबूरी का फ़ायदा उठाते रहे…जानते थे कि ऊपर के पद पर बैठे लोगों की सैलरी अच्छी रहे और बढ़ती रहे, तो कर्मचारियों का शोषण आसान हो जाता है…ख़ैर छुट्टी और सैलरी दोनों की कमी वाले चैनल को ही तोड़ कर दो औऱ चैनल आ गए… स्कूल भी खुल गया… भाई-बीवी सबको काम मिल गया…(इस क्रम को भी उल्टा पढ़ सकते हैं…वैसे न भी पढ़ें तो दिक्कत नहीं है).

ख़ैर संभवतः अमर सिंह के बाद ऐसे पहले व्यक्ति हैं, जिसके बॉलीवुड से लेकर क्रिकेट…क्रिकेट से राजनीति…राजनीति से मीडिया तक सभी से गहरे-अच्छे रिश्ते हैं…(इस क्रम को भी उल्टा पढ़ सकते हैं) हां, अमर सिंह से ज़्यादा समझदार और शातिर…हर बात पर बयान दे सकने वाले प्रभु शुक्ला जी कानपुर वाले अब फिक्सिंग के खिलाफ कानून मांग रहे हैं, लेकिन ये बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाने के खिलाफ़ थे…शुक्ला जी, आजकल कम बोल रहे हैं…न जाने क्या हुआ है…उनके साथी जेटली और रिश्तेदार प्रसाद भी आईपीएल पर चुप हैं.

शुक्ला जी…कुछ तो कहिए, आपकी चुप्पी खल रही है…इसी मौके का तो हम सबको इंतज़ार था…कि अब शुक्ला जी क्या कहेंगे…अच्छा अच्छा…मैनेज करने में लगे हैं मामला…ओह…मतलब न आप पत्रकार है, न नेता, न क्रिकेट प्रशासक, न मीडिया टाइकून…आप मैनेजमेंट गुरु हैं… (इस सारे क्रम को आप उल्टा पढ़ सकते हैं…अंततः वो मैनेजमेंट गुरु ही रहेंगे…)

युवा पत्रकार मयंक सक्‍सेना के एफबी वॉल से साभार.

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