शोषण पर चुप रहने वाले और कभी-कभार इसे जस्टीफाई करने वाले पप्पू पत्रकारों से उम्मीद न करें

Dhiraj Kulshreshtha : दुनिया जहां के शोषण के खिलाफ लिखने वाला पत्रकार अपने संस्थान के शोषण पर न केवल चुप रहता है बल्कि उसे जस्टिफाइड भी करता है….अपने अधिकारों के लिए लडने का अधिकतर में माद्दा ही नहीं है…ये तो पुरानी बात है..अब तो मीडिया के ग्लैमर के मारे ..विचार विहीन..पढाई विहीन..भाषा विहीन…सिफारिशी खेप आ रही है..जो चरण चुम्बन से लेकर पीआर तक से काम चला रहे हैं..खुद पर न तो धेले भर का विश्वास है न खुद्दारी…इसीलिए मैं उन्हें कहता हूं ..पप्पू पत्रकार.. (राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार धीरज कुलश्रेष्ठ के फेसबुक वॉल से)

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Braj Mohan Singh : मीडिया की चुप्पी खतरनाक, खौफनाक और बेशर्मी की हद तक शर्मनाक है। ये चुप्पी ही इसे मार देगी। शूक्र है कुछ अखबार और वेब उन पत्रकारों की बात कर लेते है, जो एक रात सडकों पर ला दिए गए। जाहिर है पत्रकार अपने लिए कुछ बोलता नहीं, करता नहीं, सुनता नहीं, सुनाता नहीं। खामोश हैं हम सब।ताली बजाने वाले हैं हम।तमाशबीन हैं हम। (चंडीगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार ब्रज मोहन सिंह के फेसबुक वॉल से)

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Munna Kumar Jha : नेटवर्क 18 में पत्रकारों की भारी छटनी हुई है, अफसोस है कि इतनी बड़ी घटना को लेकर उन साथियों के लिए कोई भी पत्रकार या मीडिया संगठन आवाज़ बुलंद नहीं कर रहा है। दफतरों में ड्यूटी बजा रहे पत्रकार मित्रों से आग्रह है कि कुछ सोचे और जल्द संगठीत होकर आवाज़ उठाये। दफतरों से निकालिए और आवाज़ उठाइये क्योकि अगली बारी आपकी है? (मुन्ना कुमार झा के फेसबुक वॉल से)

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