श्रीनिवासन को लेकर, सरकार देखेगी फिलहाल ‘तमाशा’

मई की इस तपिश ने देश के तमाम हिस्सों में नए रिकॉर्ड बनाने शुरू कर दिए हैं। सो, मीडिया में बढ़ते ताममान की सुर्खियां भी रोज बनने लगी हैं। इसी के साथ क्रिकेट के बहुचर्चित स्पॉट फिक्सिंग के मामले में प्रतिदिन कुछ नए-नए खुलासे हो रहे हैं।

फिक्सिंग के इस गोरखधंधे की आंच अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के प्रमुख एन. श्रीनिवासन तक पहुंच गई है। उनके इस्तीफे को लेकर चौतरफा दबाव बढ़ा है। इसके बाद भी वे अपनी कुर्सी पर अड़े रहने के लिए अमादा हैं। क्योंकि, इस पूरे खेल में सरकार अभी ‘तमाशबीन’ की भूमिका ही निभाना चाहती है। वैसे भी क्रिकेट फिक्सिंग के मामले ने लोगों का ध्यान ‘कोलगेट’ और ‘रेलगेट’ जैसे चर्चित घोटालों से कुछ हटा दिया है। मीडिया भी दिन-रात क्रिकेट की ‘कलंक कथा’ ही बांच रहा है। इससे खास तौर पर कांग्रेस के रणनीतिकार कुछ राहत सी महसूस कर रहे हैं। वे इस कोशिश में हैं कि यह क्रिकेट की ‘कलंक कथा’ कुछ नए-नए चटकारों के साथ लंबी चल जाए, तो सरकार के लिए यह मौसम ‘सुहावना’ हो सकता है।

शनिवार की दोपहर तक बीसीसीआई के प्रमुख श्रीनिवासन पर काफी दबाव बढ़ गया था। ऐसा लगने लगा था कि कुछ घंटों में ही वे इस्तीफा दे देंगे। लेकिन, सरकार के ‘उदार’ रवैए का आकलन करके श्रीनिवासन ने कुर्सी बचाने के लिए नए सिरे से जोर-अजमाइश शुरू कर दी है। उन्होंने कहना शुरू किया है कि वे गुनहगार नहीं हैं, ऐसे में वे इस्तीफा क्यों दें? उन्होंने यहां तक कह डाला कि कानून अपना काम करेगा, लेकिन दबाव में वे इस्तीफा नहीं देंगे। उनसे कोई जोर-जबरदस्ती करके इस्तीफा नहीं ले सकता। वे अपना पक्ष बीसीसीआई के सदस्यों के सामने रखने जा रहे हैं।

हालांकि, केंद्र सरकार की एक मजबूत लॉबी श्रीनिवासन का ‘विकेट’ उड़ाने की तैयारी में है। वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने दो टूक ढंग से कह दिया कि अब जो स्थितियां हैं, उनमें श्रीनिवासन को बगैर देरी के इस्तीफा दे देना चाहिए। क्योंकि, स्पॉट फिक्सिंग के मामले में उनके दामाद की भूमिका पूरे तौर पर शक के दायरे में आ गई है। इसे देखते हुए श्रीनिवासन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। कम से कम नैतिकता का तकाजा तो यही है। बीसीसीआई के उपाध्यक्ष एवं आईपीएल के कमिश्नर राजीव शुक्ला इस मामले में बड़ी सतर्कता से टिप्पणी कर रहे हैं। दो दिन पहले वे श्रीनिवासन के बचाव की खुली पैरवी कर रहे थे। लेकिन, अब उन्होंने मौका देखकर अपनी रणनीति बदल ली है। उन्होंने मीडिया से यही कहा है कि बीसीसीआई के अंदर श्रीनिवासन के इस्तीफे के मामले में चर्चा चल रही है। कुछ फैसला होगा, तो सबके सामने आ जाएगा।

दरअसल, श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मय्यप्पन फिक्सिंग मामले में बुरी तरह से फंस गए हैं। उन्हें मुंबई की क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को आधी रात में गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान ‘दामाद जी’ ने स्वीकार कर लिया है कि वे विवादित अभिनेता विंदु दारा सिंह के सहयोग से क्रिकेट में सट्टेबाजी का खेल काफी लंबे समय से खेल रहे थे। इसी चक्कर में पिछले दिनों वे 20 लाख रुपए हार भी चुके हैं। पुलिस ने विंदु और मय्यप्पन को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ कर ली है। इस आशय की जानकारियां निकलकर आई हैं कि आईपीएल टीम ‘चेन्नई सुपरकिंग्स’ को श्रीनिवासन की मेहरबानियों से खास फायदा पहुंचाया जा रहा था। मय्यप्पन, इसके मालिकों में एक हैं। चेन्नई टीम की अंदरूनी रणनीति खेल शुरू होने से पहले ही मय्यप्पन, विंदु दारा सिंह के जरिए सट्टेबाजों तक पहुंचा देता था। इसके एवज में दोनों को मोटी रकम मिल जाती थी। अब पुलिस फिक्सिंग के इस खेल के तार बीसीसीआई प्रमुख से जोड़ने में लगी है।

इन जानकारियों के बाद श्रीनिवासन के इस्तीफे के लिए दबाव बढ़ा है। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (आईसीसी) के पूर्व प्रमुख शरद पवार भी श्रीनिवासन के खिलाफ हो गए हैं।   उनकी पार्टी ने इस्तीफे के लिए दबाव बनाया है। एनसीपी के राष्ट्रीय महासचिव डी.पी त्रिपाठी ने कह दिया है कि मौजूदा स्थितियों में क्रिकेट की साख बचाने के लिए श्रीनिवासन को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। एनसीपी की इस मांग को क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी का नेतृत्व नहीं चाहता कि इस मामले में शरद पवार एंड कंपनी के मंसूबे पूरे हों। ऐसे में, यही तय किया गया है कि फिलहाल, सरकार इस मामले में सिर्फ ‘तमाशा’ देखेगी।

अब बीसीसीआई के अंदर जोर-अजमाइश के दांव शुरू हुए हैं। दरअसल, दो-तिहाई बहुमत से ही इसके कार्यकारी सदस्य अपने प्रमुख के इस्तीफे का प्रस्ताव पास कर सकते हैं। यहां तक कि निलंबन के लिए भी दो-तिहाई बहुमत की दरकार रहेगी। लेकिन, श्रीनिवासन ने भी अपनी जोर-अजमाइश तेज कर दी है। माना जा रहा है कि पंजाब, जम्मू-कश्मीर व महाराष्ट्र के बीसीसीआई सदस्य श्रीनिवासन के इस्तीफे के लिए दबाव बना रहे हैं। जबकि तमिलनाडु, केरल, गोवा, आंध्र, ओडिसा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा व असम आदि के बीसीसीआई सदस्य श्रीनिवासन के बचाव के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। इस खेल में फिलहाल दिल्ली, हिमाचल, राजस्थान व हरियाणा के सदस्य अभी दुविधा में माने जा रहे हैं।

हालांकि, बीसीसीआई के अंदर श्रीनिवासन की जगह अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारियां भी हैं। इसके लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं बीसीसीआई के उपाध्यक्ष अरुण जेटली का नाम भी चल रहा है। लेकिन, दूसरी लॉबी बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख शशांक मनोहर के लिए लॉबिंग कर रही है। इस मामले में दलीय राजनीति ने भी जोर-अजमाइश तेज कर दी है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने कह दिया है कि श्रीनिवासन को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। क्योंकि, देरी करेंगे तो उन्हीं की फजीहत होगी। आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने लंदन में बैठकर श्रीनिवासन के खिलाफ जमकर ‘बैटिंग’ शुरू कर दी है। उन्होंने ट्विीटर पर लिखा, ‘फिक्सिंग मामले में सिस्टम का जहर नहीं निकला, तो क्रिकेट बर्बाद होगा।’

मजेदार बात यह है कि इस मामले में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने ज्यादा आक्रामक रवैया नहीं अपनाया। इसकी एक बड़ी वजह बीसीसीआई में वरिष्ठ नेता अरुण जेटली की खास भूमिका मानी जा रही है। एनडीए के नेता नहीं चाहते कि इस संक्रमणकाल में श्रीनिवासन की विदाई के बाद अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर जेटली जिम्मेदारी लें। क्योंकि, ऐसा होने पर क्रिकेट की ‘कलंक कथा’ की कुछ कालिख भाजपा नेता जेटली के हिस्से भी आ सकती है। जदयू के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने टिप्पणी कर दी है कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली को किसी भी सूरत में बीसीसीआई के कीचड़ में नहीं फंसना चाहिए। फिलहाल, अरुण जेटली इस मामले में औपचारिक रूप से कोई टिप्पणी करने को तैयार नहीं हैं।

कांग्रेस के रणनीतिकारों ने इस बीच चतुर राजनीतिक रणनीति के तहत अपनी भूमिका निष्पक्ष ‘रैफरी’ जैसी दिखानी चाही है। नए कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने प्रेसवार्ता करके ऐलान कर दिया कि उनका मंत्रालय फिक्सिंग के खिलाफ एक नया कारगर कानून लाना चाहता है। यह कानून क्रिकेट तक ही नहीं, बल्कि सभी खेलों के मामले में लागू होगा। उन्होंने इस संदर्भ में अटॉर्नी जनरल से भी सलाह मांगी है। सरकार को यही सलाह मिली है कि इसके लिए भारतीय दंड संहिता में फेरबदल के बजाए नया कानून बनाना ज्यादा मुनासिब रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस संदर्भ में सरकार सभी राज्य सरकारों को भी विश्वास में लेगी।

कपिल सिब्बल ने यह पहल करके जताने की कोशिश की है कि फिक्सिंग मामले में सरकार बहुत चिंतित है। इसीलिए वह कारगर कानून बनाने के लिए तैयार है। संकेत दिए गए हैं कि संसद के मानसून सत्र तक यह कानून बना दिया जाएगा। केंद्रीय खेल मंत्री जितेंद्र सिंह तो यही कह रहे हैं कि श्रीनिवासन को देश का मूड देखकर खुद फैसला कर लेना चाहिए। इस मामले में सीधे तौर पर उनका मंत्रालय दखल नहीं देने जा रहा। जबकि, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता भक्तचरण दास यही कह रहे हैं कि जब भांजे के चक्कर में रेलमंत्री पवन बंसल इस्तीफा दे सकते हैं, तो ‘दामाद जी’ के चक्कर में श्रीनिवासन कैसे बचे रहे सकते हैं? लेकिन, इसका फैसला सरकार नहीं, बीसीसीआई ही लेगी।

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क virendrasengarnoida@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।

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