श्रीनिवासन होंगे सरकारी कोप के शिकार, राजीव शुक्ला की दिक्कतें बढ़ने लगी

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के प्रमुख एन. श्रीनिवासन अब किसी वक्त केंद्र सरकार के कुछ ‘बड़ों’ की नाराजगी का शिकार बन सकते हैं। आईपीएल मैचों में स्पॉट फिक्सिंग के मुद्दे पर विवाद बढ़ गया है। फिक्सिंग के चक्कर में श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन्न शिकंजे में पहले ही आ गए हैं। गिरफ्तारी के बाद वे इन दिनों पुलिस रिमांड में हैं।

पूछताछ के दौरान ‘दामाद जी’ ने क्रिकेट सट्टेबाजी को लेकर कई बड़े खुलासे कर दिए हैं। उन्होंने यह राज भी उगल दिया है कि वे चेन्नई आईपीएल टीम की अंदरूनी रणनीति को मुकाबले के पहले ही सट्टेबाजों तक पहुंचा देते थे। इसी में करोड़ों रुपए का खेल चुटकी बजाते हो जाता था। स्पॉट फिक्सिंग के चक्कर में श्रीशांत सहित कई क्रिकेटर जांच घेरे में आ चुके हैं। मयप्पन्न के चक्कर में फिक्सिंग की ‘पाप’ कथा में श्रीनिवासन भी एक किरदार बन गए हैं। ऐसे में, उन पर बीसीसीआई की कुर्सी छोड़ने का दबाव बढ़ा है। फिर भी, वे लगातार अड़ियल रुख अपनाए हुए हैं।

आईपीएल सीजन-6 के मैच पिछले दिनों ही पूरे हुए हैं। लेकिन, ये सभी मैच शक के घेरे में आ गए हैं। चर्चा तो यहां तक हो रही है कि आईपीएल-4 और आईपीएल-5 के ज्यादातर मैच फिक्सिंग के शिकार बने थे। इनमें कई खिलाड़ियों की हिस्सेदारी भी रही है। इसी लिए मांग हो रही है कि क्रिकेट की इस ‘पाप’ कथा की मुकम्मल जांच सीबीआई से कराई जाए। ऐसी सूरत में ही पता चल पाएगा कि भारतीय क्रिकेट किस हद तक फिक्सिंग की बीमारी का शिकार हो चुका है? मयप्पन्न की गिरफ्तारी मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने की है। मयप्पन्न, चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल टीम के मालिकों में से एक हैं। इस टीम में श्रीनिवासन की कंपनी ‘इंडिया सीमेंट लिमेटेड’ की भी बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में, श्रीनिवासन की भूमिका भी घेरे में है। आरोप है कि उन्होंने ‘दामाद जी’ को फायदा पहुंचाने के लिए बीसीसीआई के तमाम नियमों में फेरबदल भी कराए हैं।

इन्हीं आरोपों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग ने अब जोर पकड़ लिया है। पहले तो श्रीनिवासन लगातार यही तर्क दे रहे थे कि बीसीसीआई का पूरा विश्वास उनमें बना हुआ है। ऐसे में, वे किसी बाहरी दबाव में नहीं आने वाले। शुरुआती दौर में बीसीसीआई के राजीव शुक्ला और अरुण जेटली जैसे दिग्गजों ने खुलकर श्रीनिवासन के पक्ष में पैरवी भी की थी। लेकिन, जब श्रीनिवासन फिक्सिंग के दलदल में ज्यादा फंसते नजर आए, तो बीसीसीआई के अंदर भी दरार पड़नी शुरू हुई। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख एवं केंद्रीय राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुलकर श्रीनिवासन से इस्तीफे की मांग की थी। सिंधिया की पहल पर श्रीनिवासन ने ठेंगा दिखाने की कोशिश की थी।

इस बीच फिक्सिंग के मामले की पड़ताल के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे केंद्र सरकार की छवि पर भी आंच आती नजर आई। क्योंकि, मुंबई और दिल्ली पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि केंद्र सरकार में ऊंची पहुंच के चलते क्रिकेट में फिक्सिंग का गोरखधंधा सालों से फला-फूला है। लेकिन, कोई इसके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पाया। क्योंकि, कई प्रदेशों की क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख दिग्गज नेता हैं। कुछ कांग्रेस के हैं, तो कुछ भाजपा के भी हैं। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार वैसे भी कई घोटालों की चर्चा से बदनाम होती आ रही है। ऐसे में, रणनीतिकार नहीं चाहते कि क्रिकेट की कलंक कथा भी सरकार की किसी भूमिका से जुड़ जाए। क्योंकि, देश के करोड़ों-करोड़ लोग क्रिकेट के दीवाने हैं। उन्हें स्पॉट फिक्सिंग के खुलासे से धक्का लगा है। ऐसे में, सरकार जल्द से जल्द यह संदेश देना चाहती है कि वह सट्टेबाजों को कोई रियायत नहीं देने जा रही। भले, उनकी राजनीतिक पहुंच कितनी ही बड़ी हो?

स्पॉट फिक्सिंग के मामले में नामी क्रिकेटर श्रीशांत के अलावा राजस्थान रॉयल्स आईपीएल टीम के दो अन्य खिलाड़ी अंकित चव्हाण और अजित चंदीला भी गिरफ्तार हो चुके हैं। इनसे लगातार पूछताछ हो रही है। इसी सिलसिले में फिल्म   अभिनेता विंदु दारा सिंह से भी पूछताछ हो रही है। वे भी गिरफ्तार हो चुके हैं। विंदु ने पुलिस के सामने कई अहम खुलासे किए हैं। जानकारी दी है कि सालों से आईपीएल मैचों में स्पॉट फिक्सिंग का गोरखधंधा चल रहा था। इसके तार दुबई और कराची में बैठे ‘अंडरवर्ल्ड’ तक फैले हैं। क्रिकेटरों को लुभाने के लिए मोटी रकम के साथ सुरा और सुंदरियों का भी जमकर इस्तेमाल किया जाता रहा है। पुलिस को यह जानकारी भी मिल गई है कि इस खेल में बॉलीवुड के कुछ और लोग भी शामिल रहे हैं।

चेन्नई आईपीएल टीम के मालिक मयप्पन्न के पूरे ‘खेल’ में श्रीनिवासन को कोई जानकारी न रही हो, इस पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा है। आईपीएल के कमिश्नर राजीव शुक्ला ने भी अब अपनी रणनीति बदल दी है। वे कह रहे हैं कि मामले की जांच तक श्रीनिवासन को बीसीसीआई के कामकाज से दूर रहना चाहिए। बीसीसीआई के उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी श्रीनिवासन को इस्तीफा देने के लिए राजी करने की कोशिश की थी। लेकिन, श्रीनिवासन नहीं माने। बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख एवं वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने भी श्रीनिवासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कह दिया है कि श्रीनिवासन को दामाद की गिरफ्तारी के तुरंत बाद इस्तीफा दे देना चाहिए था। उनके अड़ियलपन से बीसीसीआई की साख काफी गिर रही है। जिस तरह से आईपीएल मैच शक के घेरे में आ गए हैं, ऐेसे में जरूरी है कि सभी मैचों की पड़ताल सीबीआई से कराई जाए।

हालांकि, बीसीसीआई ने स्पॉट फिक्सिंग के मामले की पड़ताल के लिए एक तीन सदस्यीय जांच समिति बना दी है। इसके दो सदस्य हाईकोर्ट के रिटायर जज हैं। श्रीनिवासन, यही तर्क दे रहे हैं कि पड़ताल के मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। ऐसे में, जांच रिपोर्ट आने के पहले वे इस्तीफा क्यों दें? जांच समिति में हाईकोर्ट के जो रिटायर जज शामिल किए गए हैं, उन दोनों का ताल्लुक तमिलनाडु से है। ऐसे में, जांच समिति की निष्पक्षता पर भी कई सवाल खड़े किए जाने लगे हैं।

जदयू के प्रमुख शरद यादव पहले से ही कहते आए हैं कि गोरखधंधे वाले इस आईपीएल पर ही प्रतिबंध लगाना जरूरी हो गया है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि क्या श्रीनिवासन सरकार से भी बड़े हो गए हैं? श्रीनिवासन के मामले में कांग्रेस नेतृत्व ने भी खुलकर अपनी नाराजगी के तेवर दिखा दिए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने भी कह दिया है कि श्रीनिवासन को इस्तीफा देना चाहिए। क्योंकि, सवाल क्रिकेट की साख का है। केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने इस बात पर हैरानी जताई है कि शक सुई इतनी घूमने के बावजूद श्रीनिवासन अपनी कुर्सी पर कैसे बने हुए हैं? जब कांग्रेस नेतृत्व ने नाराजगी के तेवर दिखाए, तो कई राज्यों की क्रिकेट एसोसिएशनों ने श्रीनिवासन से इस्तीफा मांगना शुरू किया है। गोवा क्रिकेट एसोसिएशन के वी पी शेखर कहते हैं कि श्रीनिवासन के तर्कों में दम नहीं है। उनके रुख से बीसीसीआई की साख कमजोर हो रही है। त्रिपुरा क्रिकेट एसोसिएशन के महासचिव अरविंदम गांगुली ने भी कहा है कि श्रीनिवासन अपनी कुर्सी के चक्कर में क्रिकेट को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। बीसीसीआई के कई पूर्व पदाधिकारियों ने भी श्रीनिवासन के खिलाफ हल्ला बोलना शुरू कर दिया है।

इस विवाद के चलते आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला की दिक्कतें भी बढ़ने लगी हैं। क्रिकेट से जुड़े कई विशेषज्ञों ने कहना शुरू कर दिया है कि आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला को नैतिक आधार पर खुद इस्तीफा दे देना चाहिए। परेशान होकर शुक्ला ने कह दिया है कि वे आगे से आईपीएल की कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहेंगे। बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार, जल्द ही श्रीनिवासन को बाहर करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की जा रही है। यदि श्रीनिवासन ने अपना फैसला नहीं बदला, तो उनकी कंपनी ‘इंडिया सीमेंट लिमेटेड’ भी दिक्कत में पड़ सकती है। उल्लेखनीय है कि श्रीनिवासन इस बड़ी कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं। सरकार की नाराजगी उनके ‘कारोबार’ के लिए महंगी पड़ सकती है। अब देखना है कि इन संकेतों के बावजूद श्रीनिवासन क्या करते हैं?

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क virendrasengarnoida@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।

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