श्‍मशान पर सट्टा की खबर थी प्रायोजित, पुलिस ने कथित सट्टेबाजों की शिनाख्‍त की

वाराणसी : टीवी पत्रकारिता किस तरह के घटिया स्‍तर पर पहुंच गई है, इसकी बानगी है काशी में लाशों की संख्‍या पर सट्टा लगाए जाने की खबर. पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ चैनलों के पत्रकारों और स्ट्रिंगरों द्वारा यह खबर प्रायोजित की गई थी. पुलिस ने सात चैनलों को नोटिस जारी की थी, जिसमें से छह चैनलों के प्रतिनिधि अपना बयान दर्ज करा चुके हैं, जबकि सातवें चैनल की तरफ से अभी कोई नहीं आया है.

कुछ दिनों पूर्व कई टीवी चैनलों ने खबर प्रसारित की थी कि काशी के महाश्‍मशान मर्णिकर्णिका घाट पर एक घंटे में लाशों की जलने की संख्‍या पर सट्टा लगाया जाता है. कई चैनलों पर इस खबर के चलने के बाद बनारस पुलिस तत्‍काल हरकत में आई, जब जांच हुआ तो पता चला कि यह सारा मामला चैनलों द्वारा प्रायोजित था. इसके बाद पुलिस ने सात चैनलों के प्रतिनिधियों को नोटिस जारी किया. एसएसपी अजय कुमार मिश्र ने बताया कि इनमें से छह लोगों ने अपना बयान दर्ज कराया है. एक न्यूज चैनल के प्रदेश प्रमुख को भी नोटिस दी गई है, वह अभी बयान दर्ज कराने नहीं आए हैं.

पुलिस अधीक्षक ने यह भी बताया कि लाशों पर सट्टा लगाने वाले व वहां मुंह बांधकर मौजूद चारों की पहचान हो चुकी है. आम पब्लिक बनकर सट्टा खेलने वाले दिनेश व आसिफ हैं तथा मुंह बांधकर सट्टा खिलाने वाले शगुन मौर्य व सुरेंद्र चौरसिया थे. चारो इस समय फरार हैं. इन चारों के हाथ में आने के बाद ही अगली कार्रवाई होगी. एसएसपी के अनुसार जांच में यह तय हो गया है कि लाशों पर सट्टा लगाने संबंधी खबर कुछ चैनलों द्वारा प्रायोजित थी.

वहीं दूसरी तरफ चैनलों के इस घटिया काम का विरोध भी शुरू हो गया है. जिस महाश्मशान मणिकर्णिका पर चिताओं की आग कभी ठंडी नहीं पड़ती, सोमवार को वहां डोम राजा के वंशजों चिताओं को आग देने से मना कर दिया, जिसके चलते शवदाह के लिए लोगों को एक घंटे तक अग्नि के लिए इंतजार करना पड़ा. इन लोगों की नाराजगी चैनलों पर गलत खबर दिखाए जाने को लेकर थी. शिव सेना समेत कई संगठनों से चैनलों की इस घटिया पत्रकारिता का विरोध किया है. आरोपी पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर आंदोलन की धमकी दी है.

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