संकट से उबरा अमर उजाला, अब विस्तार पर होगा काम

अमर उजाला प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि अखबार बिकने नहीं जा रहा. यह पूरी तरह निराधार और फर्जी सूचना है कि अमर उजाला को कोई दूसरा मीडिया हाउस टेकओवर कर रहा है. प्रबंधन के मुताबिक अमर उजाला जिन आर्थिक संकट में था, उससे निजात मिल गई है और अब अमर उजाला पर किसी तरह का कोई संकट नहीं है. अंदरूनी संकट से उबर चुके अमर उजाला प्रबंधन ने अब अखबार का विस्तार करने की योजना पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है.

इसके तहत सबसे पहले अपने सर्कुलेशन क्षेत्र में उन इलाकों को चिन्हित किया जाएगा जहां लोगों के पास समाचार पत्र या तो लेट पहुंचते हैं या नहीं पहुंचते. कई इलाके ऐसे हैं जहां हाकरों को समाचार पत्र लेने पांच से दस किमी की दूरी तय करनी पड़ती है. अमर उजाला प्रबंधन इस तरह की स्ट्रेटजी बना रहा है कि एजेटों के सेंटर की दूरी कम से कम हो. इसी के साथ वे प्रमुख जिले या मंडल मुख्यालय जहां बड़े समाचार पत्रों का प्रकाशन सेंटर नहीं है, से भी अमर उजाला का प्रकाशन करने पर विचार चल रहा है. प्रबंधन की योजना है कि अगले दो साल के भीतर उन हिंदी भाषित राज्यों में भी समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया जाए जहां पाठक विकल्प की आस लगाए बैठे हैं. ये राज्य मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड व छत्तीगढ़ हो सकते हैं.

हाल में अमर उजाला समूह के एमडी राजुल माहेश्वरी ने अपने खास सहयोगियों की बैठक बुलाकर समाचार पत्र के विस्तार की दूरगामी योजना पर विचार किया. उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि समाचार पत्र की आईआरएस रिपोर्ट हर तिमाही उत्साहवर्धक जा रही है. कंपनी की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूर हो रही है. इसके साथ ही उन्होंने अपने एक-दो उन सहयोगियों को फिर से साथ जोडऩे का मन बनाया है जो उनके साथ लंबे समय तक काम करने के बाद फिलहाल संस्थान से दूर हैं. श्री माहेश्वरी ने इस बात पर हैरत जताई कि अमर उजाला बेचने की बात कहां से उड़ गई, हालांकि इस तरह की अफवाहें नई नहीं हैं.  पहले भी समय-समय पर उड़ाई जाती रही हैं. उन्होंने कहा, अभी तो हमें काफी ऊंचाइयों को छूना है, लंबा सफर तय करना है, अमर उजाला अपनी यात्रा निर्बाध रूप से जारी रखेगा.

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