संतोष भारतीय किसी से एक करोड़ लोगों के आने का दावा किये थे!

Sheetal P Singh :अन्ना और ममता बनर्जी की रामलीला मैदान में रैली…न्यूज़24 अफ़वाह फैला रहा है कि 200 लोग भी नहीं पहुँचे। संतोष भारतीय किसी से एक करोड़ लोगों के आने का दावा किये थे। मोदी कैम्प ने पेमेंट भी पूरा किया था। चूक कहाँ हुई?

Om Thanvi :  ममता के साथ बुरा हुआ, इसका गम नहीं। अण्णा के साथ उसी रामलीला मैदान में यह हुआ कि मुंह दिखाने लायक न रहे!… क्या इसे ही नहीं कहते — कभी अर्श (आसमान) पर, कभी फर्श पर?

Masijeevi Hindi : यह इस बात का भी प्रमाण है कि लोकपाल आंदोलन के दौरान भी समर्थन केवल अन्ना को नहीं वरन पूरे प्रयास को था… आज की रैली केजरीवाल तथा आआप को अन्ना को धोखा देने जैसे आरोप से मुक्त करती है।

Shiben Raina : खाली-खाली मैदान देखकर सचमुच बुरा लगा। मुझे तुरंत अपने एक हितैषी की यह उक्ति याद आ गयी:"ज्यादा मीठा खाओगे तो दांत में कीड़ा लगेगा ही।"

Rakesh Rk : अन्ना से भी ज्यादा अन्य सभी नेताओं को इस बात का इल्म इस घटना से हो जाना चाहिए कि (१) लोग भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उमड़े थे न कि किसी विशेष व्यक्ति के व्यक्तित्व के कारण और वह एक सामूहिक प्रयास था| (२) सार्वजनिक जीवन में आ गये व्यक्ति को अपने व्यवहार में एक निरंतरता बरतनी चाहिए वरना अगर वे अन्ना की तरह ढुलमुल रहे तो महात्मा गांधी तो रस्से पर चढ़कर चाँद छूने वाली बात है आदमी सामान्य छवि वाला इंसान भी नहीं रह पाता| (३) राजनीति में सोहबत असर करने लगी है, इस टीवी युग में, वह युग फाख्ता हुआ जब नेता इस उस अपराधी, संदिग्ध स्वामियों की संगत करके भी नेतागिरी चमका लेता था|

ललित मोहन जोशी : अन्नाजी ने भले ही कई सामाजिक रचनात्मक कार्य किये होंगे , लेकिन अरविन्द के माध्यम से उनकी लोकप्रियता को एक स्पेस मिला , अन्नाजी जैसे कई सामाजिक कार्यकर्त्ता कई क्षेत्रों में कार्य कर bhi रहे होंगे , लेकिन उनकी वर्तुअल पहचान कहा है ? कौन प्रयोग हुआ कौन प्रायोजित था ,,,, ये जरूरत का विषय है , अभी भी क्या नया हो रहा है ?

Surinder Rattu : अब यह अन्ना जाने यह क्या हुआ। उनका सम्मान लोग अब भी इसलिए करते हैं कि वे वृध्द हैं, उन्होंने भृष्टाचार के खिलाफ जन आंदोलन को एक राह दिखाई, उन्होंने साबित किया जनता बे-चारी नही है। अंत मे यह भी कि उन्हें कोई भी बहका लेता है। वे भले हैं इस मे कोई शक नहीं।

फेसबुक से.

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