संपादकों की गिरफ्तारी को जो मीडिया की आज़ादी पर हमला कहेगा वो पत्रकार नहीं दलाल है

Akhilesh Sharma : मुझे अपने पत्रकार होने पर फ़ख़्र है। मैं ऐसा नहीं हूँ। सारे पत्रकारों को ये बिल्ला टाँग कर घूमना पड़ेगा। नाक कट गई यार। मीडिया की साख के ताबूत पर ये आख़िरी कील है। जो इसे मीडिया की आज़ादी पर हमला कहेगा वो पत्रकार नहीं दलाल है।

Naveen Kumar मैं सहमत हूं…
 
Tri Bhuvan Great…..i am proud of you and myself, akhilesh…..from doha qatar……Cop18
 
Shobha Ram नकवी साहब तो कह रहे हैं ये गिरफ्तारी मीडिया के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है..
   
Vibhakar Rajan Hey Akhilesh- be proud of what u r – u can talk abt yrself cant ensure others follow yr path- so chill and keep follwing yr honest path.
    
Akhilesh Sharma No I am very upset tonight Vibhakarji. We pay our emi. Pay our taxes. May be seeking small favours like getting our railway tickets confirmed. Getting school admission in the school for the kids of poor man working in our housing society. But how can somebody call it attack on the freedom of press?
     
Rajeev S Raju Akhiri nahi ye pahli keel hai..jo bahut der baad thoki gayee..iski starting barkha dutt aur veer sanghwi jaise logo se ho sakti thi..lkn nahi huyee..wo isliye keoki uske peeche koi navin jindal nahi tha..
 
Naveen Kumar चार साल में इतने पैसे मिलते है जिससे की केवल नोएडा से दिल्ली आना जाना और अपने खुद के खर्च निकाल सकूं, रोटी, मकान, बिजली पानी सब माता-पिता से मिलता है। खुश हूं…बहुत से चिलांडू है जो मुझ से ज्यादा तनख्वाह पर केवल बीड़ी चाय पी कर घर निकल जाते है और पंडित जी नमस्ते कहलाते है। खुश हूं.
 
Akhilesh Sharma Rajeev Sahu you please shut up.
   
Akhilesh Sharma You don't write on my posts Rajeev Sahu.
    
Akhilesh Sharma Who the hell are you?
     
Akhilesh Sharma How did you join my friends list?
     
Ajit Anjum सहमत…………….
     
Naveen Kumar बुरा जो देखन मैं चला…
     
Amit Gandhi सच कड़वा होता है ..

Akhilesh Sharma होता है तो वही तो झेल रहे हैं।
 
Vibhakar Rajan Akhilesh no right thinking journo can call it attack on the freedom of press – i would rather call it a liberation moment for "Journalists"and time to call a spade a spade
 
Akhilesh Sharma नहीं तो कौन सा चैनल का संपादक एक अजीत जी को छोड़ कर यहाँ सार्वजनिक भर्त्सना कर रहा है। मैं अपना प्रवक्ता हूँ किसी और का नहीं।
 
Akhilesh Sharma सही बात विभाकरजी। टीवी पत्रकारिता का ये संक्रमण काल जो साँप- बिच्छु, नाग-नागिन से शुरू होकर स्वर्ग की सीढ़ी तक स्पीड न्यूज़ से लेकर गया इसका भी एक दिन अंत होना था दिल रोता है इस टीवी पत्रकारिता का ये हाल देख कर। आज संयोग से अपना १५ साल पुराना फ़ुटेज देखा। सोचा ये मैं वही हूँ क्या?
 
Vibhakar Rajan Ajit ji has been critical on air as well so was NK Singh and Naqvi ji and Rahul Dev Ji- they all called it shamefull and a wake up call -at the same time all of them suggested that an act ,which is criminal in nature cant be condoned.However, they also emphasized that one shud not generalize . And Akhilesh u r right we can only talk for ourselves. We all might have errerd in our judgement about a news /about some happening/ about our personal equation but majority of us never got compromised for few bucks.
 
Vibhakar Rajan U r the same old Akhilesh- bas thora motey ho gaye ho – lol
 
Deepak Choubey Akhilesh Sharma सर,आपकी बात से सौ फीसदी सहमत लेकिन बताई वजहों से सौ फीसदी असहमत हूं।बेइमानों की जिम्मेदारी ईमानदार अपने सर क्यों लें। व्यावहारिक तौर पर हम ऐसे प्रोफेशनल हैं जिनसे ईमानदारी की उम्मीद की जाती हैं,आपने पिछले पोस्ट में ईएमआई या एडमिशन वाली बात लिखी थी वो बीच के करीब सत्तर फीसदी पर लागू होती है, लेकिन उपर और नीचे के पंद्रह फीसदी क्या करेंगे ये कौन जानता है। हम जरुरत से ज्यादा लोड ले रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि सोशल साइट्स पर हम बहुमत में हैं। यहां को भी कुछ नहीं कर सकता सिवाय इसके कि अपने स्तर पर ईमानदार रहे। अगर कोई पत्रकार बेइमानी में फंसता है तो यही समझिए किसी सेर को सवा सेर मिल गया।
 


पुण्य प्रसून बाजपेयी की हरकत पर कुछ और फेसबुकी टिप्पणियां…

Vishal Tiwari : ‎'कायरों' को 'शहीद' का तमगा देने का राग अलाप रहें हैं पुण्यप्रसून बाबा !!! Zee news के संपादक सुधीर चौधरी की दिल्ली पुलिस द्वरा नवीन जिंदल फिरौती मामले में गिरफ्तारी के बाद सलहकार संपादक पुण्यप्रसून वाजपेयी सारी मर्यदा, नैतिकता और सिद्धांतों को तक पर रखकर ढिठाई पूर्वक इसकी तुलना आपातकाल से कर रहें हैं.

Pushkar Pushp : पुण्य प्रसून की कुटिल मुस्कान आज गायब है. सुधीर चौधरी की गिरफ्तारी को लेकर बेदम तर्क देते हुए बहुत बेदम नज़र आ रहे हैं. ऐसा निरीह पुण्य कभी नहीं देखा. पुण्य प्रसून ने ज़ी न्यूज़ की साख के लिए अपनी साख पूरी तरह से गँवा दिया. अपने ऊपर शर्म आ रही है कि कभी पुण्य प्रसून को मैंने आदर्श माना था.

Pankaj Jha : जी न्यूज़ के लिए अपनी साख बचाने का अंतिम मौका था वो इस खबर को एक आम गिरफ्तारी के खबर की तरह ही ट्रीट करता. वास्तव में यह पुण्य प्रसून जी की साख के लिए भी ज़रूरी था.


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