संपादकों को एक दूसरे से भिड़ते-बरसते देख लगा कि ये तो नेताओं से भी गए गुजरे हैं

Sanjay Sharma : मैं तो आज शोभन सरकार का फैन हो गया… मन कर रहा हैं आज जा कर उनके चरण छू लूं… जो काम नेता नहीं कर सकते वो आज बाबा जी ने करके दिखा दिया… आईबीएन7 के तेजतर्रार आशुतोष इस सोने के सपने की कहानी को मीडिया पर गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगा रहे थे.. उन्होंने इंडिया न्यूज के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत, न्यूज़24 के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम  और ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) के महासचिव व लाइव इंडिया के एडिटर इन चीफ एनके सिंह को भी लाइव लिया…

तीनों दिग्गज… कोई किसी से कम नहीं… फिर क्या था होने दो दे दनादन… लगा ही नहीं कि यह लोग नेता नहीं हैं… कोई किसी की बात सुनने को तैयार नहीं… सामान्य आदमी का क्या हाल होगा जब मेरे जैसे 22 साल से मीडिया से जुड़ा आदमी माथा पकड़ कर बैठ जाए… वाह शोभन बाबा जी… सोना मिले या ना मिले आपने हम मीडिया वालो की तो बैंड ही बजा दी…

    Nadeem Ahmad sanjay ji namaste …mein aapse kuch poochna chahta hoon?
 
    Sanjay Sharma Nadeem Ahmad..Swagat Sir..
 
    Nadeem Ahmad sir ek chota sa issue hai jis par meine aaj tak ptrakaar badhu ya kisi bhi media ko nazar dalte nahin dekha ..aur ye issue bahut hi sensitive hai aur iska jawab mujhe aaj tak nahi mila ….  mudda ye hai ki govt ne desi aur english dono tarah ke sharab khaane shehar ke har ilaaqe mein residential jagahon par khulwa rakhe hein…..jabki kisi ke paas iska koi jawab nahin hai ki siwaye revenue generate karne ke govt ya samaj ko isse koi bhi bhala hona hai… wahin doosri taraf iske negetive aspect beshumaar hein …samaj par aur bachchon par padne wala dushprabhaw …mahilaon par hone wala mansik aur sharirik shoshan ..etc….beshumaar mautein…etc..phir bhi koi awaaz nahin uthata…??
 
    Sanjay Sharma सर सरकार मधनिषेद और आबकारी विभाग दोनों खोलती है ..एक का काम शराब बेचना और दूसरे का रोकना होता है ..See Translation
 
    Pankaj Dixit दे दनादन. मजा आ रहा है इस फाइट में| पूरी दुनिया में इतनी चूतिया टीवी मीडिया नहीं होगी| देख लो दुनिया वालो| ख्य खूब है हिन्दुस्तान की न्यूज़ मीडिया…

    Nadeem Ahmad sir ek vibhag to apna kaam bakhoobi karta aaya hai aur wo hai aabkaari vibhag beshumaar licence baantta rehta hai…aur revenue par zor deta hai ..samaj jaaye bhaad mein….. wahin doosra vibhag jo mad nished hai uska kaam aaj tak dekhne ko nahin mila… aur heirat ki baat to ye hai ki govt do cheezon ko keise promot kar sakti hai agar wo liquor trading ko ghalat maanti hai to aabkaari ka koi matlab hi nahin.. aur agar aabkaari ko uchit maanti hai to madnished ka koi matlab nahin……
 
    Mohammad Khan भारत मेँ N.D.T.V. के रवीश कुमार को छोडकर बाकी सब चूतिये पत्रकार हैँ।
 
    Sanjaya Kumar Singh मेरा मानना है कि मीडिया वाले बिना मतलब (मुफ्त में टाइम पास करने के लिए) कुछ भी लेकर बैठ जाते हैं। जहां दो ही विकल्प होता है वहां भी अटकलें लगाने लगते हैं। गड्ढे में गिरा बच्चा या तो बचा लिया जाएगा या मर जाएगा – पर जब तक आर-पार न हो जाए ना चैन से बैठेंगे ना बैठने देंगे। इसी तरह सोना मिलेगा या नहीं मिलेगा पर चैन से नहीं बैठेंगे क्योंकि लगभग मुफ्त में टाइम पास हो रहा है चर्चा के नाम पर और अपने मुखारबिन्द से जो ज्ञान जता रहा है वो भी उसी का है , मुफ्त का। मीडिया वाले मुफ्त में बैंड बजाने के नाम पर अपनी बजवा रहे हैं।
 
    Sanjay Sharma भाई आप लोग प्लीज शब्दों की मर्यादा को तो मत तोडिये ..क्या मजाक की बात है कि एक मीडिया बाले की वाल पर ही आकर लिख रहे है कि रवीश कुमार के अलावा सभी मीडिया के सभी लोग चूतिया है ..भाई दो अनुरोध ..एक तो चूतिया जैसे महान शब्दों का प्रयोग ना करे दूसरा देश में बहुत योग्य पत्रकार है और आज लड़ रहे यह तीनो भी देश के सबसे अच्छे पत्रकारों में एक है .
 
    Sanjay Sharma Sanjaya Kumar Singh..सही कह रहे है सर ..
 
    Mohammad Khan माफी कीजिएगा भाई।
   
    Vipin Sharma Dada ye to sach hai ….. Akhilesh yadav se to mil sakte hai …… Per mahant sy milne k Liye 1 week Lag sakte hai
 
    Sandeep Verma कामेडी सर्कस और जोकरों की जमात की काकटेल का नाम हो चुका है न्यूस चैनेल . अपने कपिल का धंधा खतरे में डालने लगे है न्यूस चैनेल वाले .
 
    Prathak Batohi संतो ने कहा की रामजन्मभूमि-बाबरी काम्प्लेक्स के नीचे खोदे तो प्राचीन मन्दिर मिलेगा है तब संतो की बात किसने मानी। कौन सा नेता व् ASI जैसी संस्था आगे आयी? मोदी व् कांग्रेस-सपा यह जानते है 2014 में मोदी के पक्ष में यह संत खडें होंगे इस लिए इन संतो की बोली को ही महत्वहीन कर दो। रोज बाबा-संत को चारित्रिक रूप से सवालिया घेरे में ले लिया है।

    Sanjaya Kumar Singh महान है – Mohammad Khan साहब। आपकी महानता हम क्या मानें रवीश भी मान गए होंगे। पहली बार मिला कोई फेसबुक पर ज्ञानी। असली, नकली, फर्जी, महिला – पुरुष (तस्वीर से पता नहीं चल रहा) आप जो भी हों, धन्य हैं। 1991 में पैदा हुए और इतना ज्ञान। बाप रे।
 
    Dhirendra Pandey समाज में हर एक का पतन हुआ है और मीडिया इससे अछूती नही रही मीडिया धीरे धीरे अपनी विश्वसनीयता खोते हुए गर्त में जा रही है अत्याधिक होड़ ने मीडिया को भी हास्यास्पद बना दिया हैं दिखाने के लिये बहुत कुछ है पर भेडचाल में जो एक चैनल शुरू करता है वही सब करने लगते हैं सवा अरब की आबादी वाला तीन तीन महासागरों वाले विशाल देश में हफ्ते भर से केवल बकवास चल रही है बाक़ी मुद्दे सब गौड़ हो गए नेपथ्य में कर दिए गए | अभी तक तो ये कहा जा रहा था कि विदेशों में खजाने की खोज का मजाक उड़ रहा है मुझे लग रहा है कि ये मिडिया का मजाक उड़ रहा है |
 
    Pankaj Dixit पत्रकार कभी चूतिया नहीं होते| होते तो जनता को नहीं बना पाते| संजय जी हम आपसे सहमत है| बुद्धिमान पत्रकार ही किसी को बना सकता है| मगर जिस बुद्धू बक्से देखकर जनता ये कहती है कि- ……….तो हम क्या करे|
   
    Sanjaya Kumar Singh पंकज जी, ऐसा भी नहीं है। एक से एक भरे पड़े हैं लेकिन ….
    
    Pankaj Dixit संजय साहब बस ये लेकिन ही तो है जो बहुत कह जाता है…| ये सच है मगर कड़ुआ| अच्छे अच्छे पत्रकार भी करियर के चक्कर में वही करने लगे है जो उनकी अंतरात्मा भी नहीं चाहती| लानत है ऐसे करियर और ऐसी पत्रकारिता पर..
 
    Gulfam Hasan Kal Shobhan Baba..! Hamare Sapne Mein Aaye Aur Kaha Ki Sab Chup Rahoge To Hi Swarn Bhandar Milega……!! Aur Uskebaad 1000000 Kg Mein Se 10….10 Kg Media Walo'n Ko Hissa Dediya Jayega..!! Kaha Sarkar Se Hamne Baat Kar Li Hai…? Mein To Chup Hoo'n….!!
 
    Acharya Sushil Gangwar ji haa .

    Yashwant Singh अजीत अंजुम हाइपर किस्म के प्राणी हैं… हर किसी को डाउन करने पर तुले हुए थे.. खुद को और खुद के चैनल को हर हाल में सही साबित करने पर अड़े हुए थे और इसके खातिर धाराप्रवाह नानस्टाप बोले जा रहे थे.. साथ ही चालाकी इतनी कि बार बार एनाउंस कर रहे थे कि दर्शक न्यूज24 देखें जहां सच्चाई दिखाई जा रही है… यानि आईबीएन7 के प्लेटफार्म को हाइजैक करने की पूरी कोशिश… आशुतोष शांति और धैर्य से बतियाते दिखे पर अंजुम जी काहें को मानने वाले… उन्हें तो लग रहा था कि ये मौका कभी नहीं आने वाला.. जितना हमलावर होना है हो लो… जितना बड़ा संपादक दिखना है, अभी दिख लो.. मतलब ये कि पूरे देश में सिर्फ एक ही चालाक, समझदार, होनहार, तार्किक, वैज्ञानिक, सर्वोत्कृष्ठ, नेतृत्वकारी, हाहाकारी, प्रलंयकारी, मारामारी पत्रकार हैं और वो हैं श्री श्री 1008 बाबा अजीता अंजुमानंद जी महाराज… अरे अंजुम जी महाराज… कुछ दिन तो चैन से बैठ जाइए, आराम कर लीजिए… काहें झूठमूठ शुक्ला जी के लिए प्राण दिए हैं और बदले में अपनी असलियत की पोल सबके सामने खोल रहे हैं… साथ ही अपनी नैतिकता, इमान सब कुछ की बलि चढ़ा रहे हैं… बगुला भगत को पहचानने में देर नहीं करते आजकल के नौजवान और आजकल के दर्शक…

Padmasambhava Shrivastava आज का चतुर मीडिया जितनी तेजी से दर्शकों को ' लोकप्रिय ' और जनरूचि की सामग्री परोस रहा है, व्यूअर उतनी तेजी से रिमोट से चैनेल बदल रहे हैं.प्राइम टाइम के समाचार ही दर्शकों के लिए जरूरी दिखता है , बाकी तो असली ' ड्रामा ' हम सबों को सोशल मीडिया में देखने को मिल जाता है. राजेंद्र यादव की बखिया उघाड़ते भुक्तभोगी या अधूरी प्रेमकथा के नायक-नायिकायें या टूटी-फूटी कविताओं के बहाने प्रेमोद्रेक में पस्त हमारे युवा सदस्य—क्या किसी मनोरजन गृह से कम मजेदार है , जो २४ घंटेवाला सनसनी खबरें देखें जो ' मनोहार कहानी ' का वीडियो संस्करण होते हैं.

Jay Gupta this lot of Hindi TV editors in India lacks everything a journalist needs. Take lessons from English Tv channels or write Ravish Kumar post on Bhadas yesterday

Jay Gupta not write read

Padmasambhava Shrivastava Errors omiited…highly regretted…!…!

Jay Gupta thanks

Chandan Srivastava अजीत व्यक्तिगत तौर पर कैसे हैं ये अलग बात है लेकिन आज कि सम्पादकों वाली बहस मे वो तर्क के करीब थे. आशुतोष लगातार यही कहे जा रहे थे कि खुदाई जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिआ के रिपोर्ट के आधार पर हो रही है. अजीत का बहुत सामन्य तर्क था कि आखिर एएसआई और जीएसआई को रिपोर्ट क्यो बनानी पड़ी. शोभन सरकार के सपनों के कारण ही ना.

Yashwant Singh चंदन, अजीत की बात आप समझ गए, इसके लिए आपको बधाई… मैं तो उनकी लाउडनेस के कारण इरिटेट हो रहा था.. लगातार नानस्टाप बोले जा रहे थे और वह भी सबसे तेज तेज … चित भी मेरी, पट भी मेरी… इस अंदाज में बहसिया रहे थे… यही दिक्कत हिंदी वालों की है… अपनी बात ग्रेस, शांति, धैर्य के साथ भी कह सकते हैं…

Dipak Bhatia प्रमोद कृष्णन जैसे दोगले व्यक्ति को अध्यात्मिक बतानेवाले का चरित्र-चित्रण करना बहोत मुश्किल नहीं है|

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और हिंदी साप्ताहिक वीकएंड टाइम्स के एडिटर संजय शर्मा के फेसबुक वॉल से.


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