संपादक को गिरफ्तार कराने वाले विधायक ने अब अखबार का विज्ञापन बंद कराया

: दबाव में आकर राजस्थान के डीआईपीआर ने ''मरु लहर'' समाचार पत्र के विज्ञापन बंद किए :  जयपुर। लगता है राजस्थान सरकार का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग इतना बौना हो गया है कि वह एक विधायक के इशारों पर नाच रहा है तथा उसी की शिकायत पर बिना कोई पूर्व सूचना दिये पश्चिम राजस्थान के बाड़मेर, जोधपुर, सिरोही, सांचौर और पाली मारवाड़ से प्रकाशित दैनिक मरु लहर समाचार में राजकीय विज्ञापन बंद कर दिये हैं.

गौरतलब है कि मरु लहर के संपादक ने विधायक के कारनामों को लेकर कई खबरें प्रमुखता से छापी तथा खबरों पर कोई कार्यवाही नहीं होते देख सम्पादक महावीर जैन ने विधायक सहित कइयों के खिलाफ नामजद जनहित याचिका राजस्थान उच्च न्यायालय मे दायर की. इसकी लगातार सुनवाई के बाद संबंधितों को जबाव पेश करने को लेकर हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी कर दिया गया. इससे वहां का विधायक घबराया हुआ है. येन केन प्रकारेण मरु लहर के सम्पादक के खिलाफ साजिश रच रहा है. ऐसी ही साजिश के शिकार मरु लहर के सम्पादक को जुलाई माह में होना पड़ा जब उन्हें ब्लैकमेलिंग के झूठे मुकदमें में पुलिस से गिरफ्तार करवाया गया. बाद में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत लेनी पड़ी.

अब विधायक की उस कथित एफआईआर को क्वेश करवाने के लिये हाईकोर्ट में चैलेंज किया हुआ है जिसकी लगातार सुनवाई हो रही हैं. झुठी एफआईआर खारिज होने के भय से घबराये एमएलए ने खुद अपने चहेतों से मरुलहर के खिलाफ डीआईपीआर को शिकायते भेजनी शुरू कर दी। इस पर डीआईपीआर ने विधायक के दबाब के आकर बगैर पूर्व सूचना के एक एकतरफा आदेश दिनांक 18 सितम्बर को जारी कर समस्त संस्कणों को राजकीय विज्ञापन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिये।

हाईकोर्ट के आदेश को किया दरकिनार

महावीर जैन को विधायक एवं उनके गुर्गों की साजिश की आशंका के चलते जीवन सुरक्षा याचिका हाईकोर्ट में दायर की जिसमें हाईकोर्ट ने जान माल सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश राजस्थान सरकार को दिया। इन्हीं शिकायतों को लेकर महावीर जैन के वकील ने जुलाई में डीआईपीआर को विधिक नोटिस जारी कर आगाह किया था कि किसी भी प्रकार की कार्यवाही अमल में लाने से पूर्व हमे सुना जाये बावजूद इसके राजस्थान के डीआईपीआर ने विज्ञापन स्थगन का आदेश जारी कर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना की।

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