संपादक चाहें पार्टी, कर्मचारियों की आफत : सिटी इंचार्ज मंगाए फोटोग्राफर से सब्‍जी

: कानाफूसी : दैनिक जागरण में कुछ भी हो सकता है। ताजा मामला वेस्ट यूपी की एक यूनिट का है। यहां पत्रकारों को चिड़िया के चुग्‍गे जैसा इन्‍क्रीमेंट मिला, जिसके बाद से उनमें खासी नाराजगी है। पर यह नाराजगी तब और बढ़ गई, जब नया फरमान सुनने को मिला। नया फरमान यह था कि सभी लोग इन्‍क्रीमेंट में बढ़ी धनराशि का एक हिस्‍सा संपादक के खाते में जमा करें। दरअसल संपादक जी शराब के खासे शौकीन बताए जाते हैं।

इन्‍हें जब हिंदुस्‍तान की लांचिंग से मुकाबला करने के लिए भेजा गया तो ये महोदय सर्कुलेशन मैनेजर और आईटी मकैनिक के साथ कार में बैठकर सुरा सेवन करते रहे और रिपोर्टर व अन्‍य एडिटोरियल स्‍टाफ दैनिक जागरण जिंदाबाद के नारे लगाता रहा। हालांकि तब यह संपादक नहीं थे, संपादक बनने के तलबगार थे।

बहरहाल, इन्‍क्रीमेंट की धनराशि जमा कराने के फरमान पर उन पत्रकारों में खासा गुस्‍सा है जो वर्षों से दस से बारह हजार पा रहे हैं और इन्‍क्रीमेंट होने के बावजूद उनकी तनख्‍वाह साढ़े दस से सवा बारह हजार हुई है। दो सौ से पांच सौ रुपये के इन्‍क्रीमेंट में उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि नहाएं क्‍या और निचोड़ें क्‍या। वहीं संपादक के इन पैसों से पार्टी करने की बात पर वह और भी हैरान हैं कि क्‍या संपादक जी संपादकीय के लिए हैं या शराबकीय के लिए। फोन पर वहां के एक पत्रकार ने बताया कि पहले से ही घर पर बच्‍चों की पढ़ाई लिखाई और दूसरे खर्चे हैं जिसके चलते वह लोग खुद शराब पीने में अक्षम हैं। ऐसे में संपादक को शराब पीने के लिए पैसे देने की बात उनकी समझ में नहीं आ रही है।

दैनिक जागरण की इसी यूनिट के सिटी इंचार्ज का हाल सुनिए। वे इन दिनों फोटोग्राफरों से अपने घर के लिए सब्‍जी भाजी मंगाने का काम करा रहे हैं। अगर फोटोग्राफर इसके लिए मना कर रहे हैं तो उन्‍हें ऑफिस में सबके सामने बेइज्‍जत किया जा रहा है। इतना ही नहीं, नौकरी तक से निकाल देने की धमकी सिटी इंचार्ज साहब दे रहे हैं। गौरतलब है कि ये वही महानुभाव हैं जिन्‍हें जागरण की ही एक दूसरी यूनिट में स्‍वयंभू सिटी इंचार्ज बन वसूली करते हुए पकड़ा गया था और वहां से सीधे यहां भगा दिया गया था। बहरहाल, सिटी इंचार्ज का यह कारनामा चर्चा का विषय बना हुआ है।

सिटी इंचार्ज कामचोरी की वजह से इतने मोटे हो चुके हैं कि उनका ठीक से चल फिर पाना भी उनके लिए मुसीबत है। इन्‍होंने दो दिन पहले ठेके पर रखे फोटोग्राफर को सब्‍जी खरीदकर घर पर देकर आने को कहा। उसके लिए इन्‍होंने फोटोग्राफर को पैसे तक देने की जरूरत नहीं समझी। ठेके के फोटोग्राफर को इतने पैसे नहीं मिलते, इसलिए उसने यह काम करने से साफ मना कर दिया। इस पर सिटी इंचार्ज महोदय लाल पीले हो गए और पूरे ऑफिस के सामने ऐलान कर दिया कि अब यह फोटोग्राफर इस दफ्तर में काम नहीं करेगा। इस पर उन्‍होंने पहले से ही सेट किए संपादक की भी सहमति ले ली।

पर जब ठेके के फोटोग्राफर ने दफ्तर आकर सबके सामने यह कह दिया कि वह किसी के घर सब्‍जी पहुंचाने नहीं जाएगा तो सिटी इंचार्ज का चेहरा देखने लायक था। फोटोग्राफर के इस बयान के बाद संपादक को भी नैतिकता के आधार पर अपना कदम वापस खींचना पड़ा। पर तब से पूरे मुरादाबाद में यह चर्चा आम है कि फोटोग्राफर ने एक निकम्‍मे सिटी इंचार्ज को उसकी औकात दिखा दी।

कानाफूसी कैटगरी की खबरें सुनी सुनाई बातों पर आधारित होती हैं, इसलिए इस पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की अपने स्तर पर जांच करा लें. भड़ास से संपर्क bhadas4media@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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