संपादक ने न सिर्फ गालियां दीं बल्कि धमकी भी दी कि तेरी नौकरी खा जाउंगा

कल एक उप संपादक का फोन आया कि उसके संपादक ने उससे जिस तरह से बात की उसे एक संपादक की गरिमा तो नहीं कहा जा सकता। उसने उसे न सिर्फ गालियां दीं बल्कि धमकी दी कि तेरी नौकरी मैं खा जाऊंगा, तेरे जैसे बहुतों को मैने सड़क पर भीख मांगने पर मजबूर कर दिया है। संपादक पढ़े लिखे हैं। दो-तीन विषयों में एमए हैं, एक मैनेजर की तरह व्यवहार कर लेते हैं। आचरण भी वैसा ही है लेकिन लिखने-पढऩे का उनका जनम जनम का बैर है।

वैसे वे मित्रों के बीच खूब लोकप्रिय हैं। लेकिन अपने अधीनस्थों के साथ उनका व्यवहार ऐसा होता है जैसे वे लोग उनके चाकर हों। कई रिपोर्टर व सब एडिटर उनके बारे में ऐसी ही तमाम बातें बता चुके हैं। ऐसा व्यवहार वे करते रहते हैं। जाहिर है संपादक के इस व्यवहार का पत्रकारिता के उत्थान-पतन से कोई लेना देना नहीं है लेकिन एक सवाल तो खड़ा ही होता है कि निकट भविष्य में वह दिन आ जाएगा जब एक एचआर मैनेजर संपादक से उसकी संपादकी छीनकर किसी भी राह चलते को दे दिया करेगा। संपादक का काम सिर्फ सरकारों में दबाव बनाकर धन वसूलने तक सीमित हो जाएगा। या तो वह निजी हित के लिए दलाली करेगा अथवा अखबार में विज्ञापन दिलाने के लिए। ऐसे में जस्टिस मार्केंडय काटजू का पत्रकारिता में पेशेवर डिग्री की जरूरत की बात करने में गलत क्या है?

वरिष्‍ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्‍ल के एफबी वॉल से साभार.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *