सपा सरकार की नीतियों में खोट की वजह से हो रहे दंगे : अफजाल

सुलतानपुर : सपा सरकार की नीतियां साफ नहीं हैं। अयोध्या में चाहे चौरासी कोसी परिक्रमा हो या फिर मुजफ्फरनगर के दंगे। सब में सपा-भाजपा का मैच फिक्स था। जो भी दंगे हुए उनमें इन पार्टियों ने अपना अहम रोल निभाया है। साम्प्रदायिक दंगों से भले ही भारी जनहानि हो, लेकिन सपा भाजपा अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने से बाज नहीं आ रही है। इन्हें अच्छी तरह पता है कि ऐसे हालात पैदा होने से हिन्दू मुस्लिम बंट जाएंगे और उन्हें राजनैतिक फायदा मिल जाएगा। अखिलेश सरकार यदि सच में यदि हर धर्म की हितैषी है तो वह दंगाइयों के खिलाफ सख्ती से पेश आए। खुलेआम दंगाइयों को संरक्षण देने वाले व उनका हौसला बढ़ाने वालों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई करें। यह बातें कौमी एकता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने कही।

श्री अंसारी ने कहा कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दंगे व धार्मिक उन्माद फैलाकर सत्ता का लाभ लेना चाहती है। अयोध्या में होने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा के पहले ही सपा ने भाजपा के साथ रणनीति बना ली थी। दोनों पार्टियों की उलूल-जुलूल बयानबाजियों से हिन्दू और मुस्लिम के बीच दरार पड़ गई। दोनों पार्टियों की मंशा थी कि प्रदेश का माहौल बिगड़ जाए और इसका सीधा फायदा इन दोनों को मिल जाए। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनने के बाद अब तक तीन दर्जन से अधिक दंगे हो चुके हैं। प्रदेश में भीषण जनहानि हुई है। ये लोग दंगा कराने के बाद खुद जांच करने पहुंचते हैं और झूठी रिपोर्ट प्रसारित करवा देते हैं। श्री अंसारी ने कहा कि यदि सपा सरकार सचमुच दंगा रोकना चाहती है तो दंगा फैलाने वाले नेताओं के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई करें।

उन्होंने कुछ भगवाधारी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग दंगा कराने के बाद आग में घी डालने का काम करते हैं। यदि इनकी सुरक्षा में लगे जवानों को हटा लिया जाए तो काफी हद तक साम्प्रदायिक दंगों पर अंकुश लग जाएगा। श्री अंसारी ने कहा कि हिन्दूवादी नेता अशोक सिंघल, विनय कटियार, प्रवीण भाई तोगड़िया की सुरक्षा में केन्द्र व प्रदेश सरकार हर महीने करोड़ों खर्च करती है। क्या सचमुच इन्हें अराजकतत्वों से खतरा है या फिर ये लोग खतरा जैसी स्थिति पैदा कर देते हैं। श्री अंसारी ने कहा कि ये नेतादय मामूली मामलों में पहुंचकर धार्मिक उन्माद पैदा कर देते हैं। जब मामला बिगड़ जाता है तो यही लोग दंगों की जांच करने पहुंचते हैं और झूठी बयानबाजी कर मामले को और भड़का देते हैं।

उन्होंने कहा कि इनकी बयानबाजी से ही इनके हजारों दुश्मन पैदा हो गए हैं। इन लोगों को ब्लैक कैट जेड श्रेणी, वाई श्रेणी जैसी सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की जा रही है। इसकी भी जांच होनी चाहिए। यदि इन्हें सचमुच समाज में अच्छे कार्यों के लिए खतरा पैदा हो रहा है तो इनकी सुरक्षा बढ़ाई जाए। लेकिन ये लोग गलत बयानबाजी कर देशभर में उन्माद फैला रहे हैं। ऐसे में इन्हें सुरक्षा देने का कोई सवाल नहीं उठता। यदि इनकी सुरक्षा वापस कर ली जाए तो इनका हौसला गलत कामों से पीछे हट जाएगा। साथ ही यह हर जगह पहुंचकर उन्माद फैलाने वालों का हौसला भी नहीं बढ़ा सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर धार्मिक उन्माद फैलाने वाले ऐसे नेताओं की जांच सीबीआई या उच्च स्तरीय जांच एजेंसी से कराकर इनकी सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत जानी जाए। जिससे समाज में अमन चैन कायम रह सके और सरकार का करोड़ों रुपये की फिजूलखर्ची बच सके। उन्होंने कहा कि आम आदमी को यदि सही में समाज से खतरा होता है तो शासन से उसे 10 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक पेमेंट लेकर सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जाती है। वहीं दूसरी तरफ धार्मिक उन्माद फैलाने वालों को करोड़ों की सुरक्षा व्यवस्था देना किस हद तक न्यायसंगत है। श्री अंसारी ने कहा कि मुजफ्फरनगर में दंगों के जिम्मेदार भी ऐसे नेता हैं। सरकार ने भी इन्हें छूट दे दी और बड़ी जनहानि हो गई। उन्होंने कहा कि दंगों के शिकार लोगों को सरकार जल्द से जल्द आर्थिक सहायत मुहैया कराए तथा मृतक परिवार को नौकरी दी जाए।

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