सप्पल की मनमर्जी और तानाशाही से राज्यसभा टीवी में आंतरिक माहौल चौपट

सप्पल साहब ने राज्यसभा टीवी को अपनी निजी जागीर समझ रखा है. तभी तो वे जो चाहते हैं, कर गुजरते हैं, बिना इसकी परवाह किए कि उनके इस कदम से लोकतांत्रिक मूल्य, आंतरिक अनुशासन और व्यवस्था का कितना नुकसान हो रहा है. ताजा मामला है उप राष्ट्रपति द्वारा दिए गए भोज का. इस सालाना पार्टी में मीडिया के लोगों को बुलाया जाता है.

सप्पल चूंकि उप राष्ट्रपति के सब कुछ हैं, पीए से लेकर सीईओ तक, सो वही तय करते हैं कि किसे उप राष्ट्रपति के कार्यक्रम में बुलाना है और किसे नहीं. उन्होंने राज्यसभा टीवी से बजाय वरिष्ठ पत्रकारों और संसद कवर करने वाले पत्रकारों को भोज में बुलाने के, राज्यसभा टीवी के एंकर्स को बुला लिया. इसको लेकर पूरे राज्यसभा टीवी में थू थू हो रही है.

इसके पहले परंपरा रही है कि जो लोग संसद कवर करते रहे हैं, उन्हें उप राष्ट्रपति द्वारा दी गई मीडिया पार्टी में बुलाया जाता रहा है. पर सप्पल साहब ने अपने एंकर प्रेम को आगे बढ़ाते हुए राज्यसभा के कई एंकरों को पार्टी में उतार दिया. उनके इस हरकत से राज्यसभा टीवी के गंभीर पत्रकार काफी दुखी हैं.

सप्पल पहले भी ऐसी हरकतें करते रहे हैं. वे कुछ लोग पर बहुत ज्यादा मेहरबान रहते हैं और जिन पर मेहरबान रहते हैं उन्हें पूरी तरह छूट दिए रहते हैं, न तो अटेंडेंस की जरूरत और न ही काम करने की. सूत्रों का कहना है कि उप राष्ट्रपति की मीडिया पार्टी में ऐसे लोगों को भी राज्यसभा टीवी की तरफ से बुला लिया गया जो अभी राज्यसभा टीवी के पार्ट हैं ही नहीं. इनमें कांग्रेस के एक बड़े नेता की बेटी और सहारा से जुड़े एक एंकर का नाम प्रमुख है.

बताया जा रहा है कि राज्यसभा टीवी में कई लोग सोर्स, जुगाड़ और हनक के बल पर घुसने के जुगाड़ में है और इनकी सेटिंग पूरी तरह हो गई है. पर इसकी भनक लग जाने के कारण ढेर सारे लोगों ने आरटीआई वगैरह लगा दी है जिससे मामला ठंढे बस्ते में चला गया है.  

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर लोकसभा टीवी और राज्यसभा टीवी के हालात के बारे में आपको भी कुछ कहना है तो अपनी बात bhadas4media@gmail.com पर मेल कर सकते हैं. आपके नाम और पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा.

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