सब इंस्पेक्टरों और इंस्पेक्टरों को राजपत्रित कर्मचारी क्यों नहीं घोषित किया गया

: यूपी पुलिस विभाग की समस्याओं पर याचिका : सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने उत्तर प्रदेश पुलिस और उसके अधीनस्थ पुलिस कर्मचारियों की समस्याओं के बारे में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर किया है. याचिका के अनुसार वर्तमान में पुलिस विभाग में थाने स्तर पर कार्य करने में कई सारी समस्याएं हैं. एक थाने का खर्च पचास हज़ार से एक लाख तक है लेकिन इसके बदले उन्हें कोई भी धनराशी सरकार द्वारा इन सभी वाजिब खर्चों के लिए नहीं दी जाती है. इसी प्रकार से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बावजूद सब इंस्पेक्टरों और इंस्पेक्टरों को राजपत्रित कर्मचारी घोषित नहीं किया गया है.

अत्यंत जिम्मेदार दायित्वों के बावजूद पुलिस के आरक्षी और मुख्य आरक्षी को “अर्ध कुशल श्रमिक” कहा गया है, थानों में तैनात आरक्षियों को मात्र पचास रुपये प्रतिमाह के दर से वाहन भत्ता प्रदान दिया जाता है, पुलिस के लिए आवासों की भारी कमी है, हवालात भोजन हेतु मात्र दस रुपये प्रति दिन और लाश के पोस्टमार्टम हेतु मात्र चार रुपये दिए जाते हैं. नूतन ने इन सभी मामलों में प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को कई बार प्रत्यावेदन भेजा पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, जिसके कारण उन्होंने यह याचिका करते हुए इनके सम्बन्ध में उचित निर्देश दिए जाने की प्रार्थना की है.

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