सभा, गायन व नुक्कड़ नाटक से याद किए गए लेनिन

लखनऊ। समाजवादी रूसी क्रान्ति के नायक लेनिन के जन्म दिवस पर लेनिन पुस्तक केन्द्र ने अपने लालकुंआ कार्यालय पर सभा, गायन व नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। सभा को संबोधित करते हुए प्रगतिशील महिला एसोसिएशन – एपवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ताहिरा हसन ने कहा कि लेनिन की आज हमें ज्यादा जरूरत है क्योंकि आज जिस तरह की राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्थिति है, ऐसे में लेनिन के विचार राह दिखाते हैं।

आज सारे राजनीति दल अमेरीकापरस्त नीतियों पर चल रहे हैं। देश कॉरपोरेट पूंजी की गिरफ्त में है। इस पूंजी ने पूरी मानव जाति के लिए संकट खड़ा कर दिया है। जनता समस्याओं की ढेर पर बैठी है। यह कितनी बड़ी विडम्बना है कि आधी आबादी असुरक्षित है। पाच व छ साल की बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो रहे हैं। आम जन के पास संघर्ष के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। वामपंथ इस संघर्ष में जनता का सच्चा दोस्त है।

इस मौके पर भाकपा (माले) की राज्य कमेटी के सदस्य रमेश सिंह सेंगर ने माले के इसी माह रांची में सम्पन्न नौंवे अधिवेशन के प्रस्तावों की जानकारी देते हुए कहा कि शासक वर्ग के सभी दल सत्ता की होड़ में हैं। मोदी हो या नीतीश या राहुल इनके माध्यम से देश को कोई विकल्प नहीं मिल सकता। नीतिगत रूप से इनमें एकता है। रेल कर्मचारियों के नेता श्याम अंकुरम व आल इंडिया वकर्स कौंसिल के महामंत्री ओपी सिन्हा ने भी अपने विचार रखे। इनका कहना था कि जनता में आक्रोश है। आज स्वतः स्फूर्त तरीके से जन संघर्ष चल रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि पहले हम इनसे जुड़े। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि बीएन गौड़ ने की तथा संचालन किया जसम के संयोजक कौशल किशोर ने।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सांस्कृति कार्यक्रम था। आदियोग ने अपने गीतो से लोगों को रोमांचित कर दिया। उनके गीतों के बोल थे: ‘हम जियें या ना जियें/ जो लोग कल को आयेंगे, उन्हें क्या दे जायेंगे’ और ‘हम हंसना चाहते हैं, हम गाना चाहते हैं/खोया है जो भी हम पाना चाहते हैं’। वहीं गायक महेन्द्र ने अपने गीतों के माध्यम से यह संदेश दिया कि कोई भी संघर्ष तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसके अन्दर सृजन व निर्माण न हो। अपने गीतों के द्वारा उन्होंने सवाल किया ‘सवाल कर, सवाल कर, सवाल कर/ क्यूं है ऐसा क्यूं है वैसा, तर्क कर/ सवाल कर कि दौलातों के द्वीप क्यूं/ बेकसों की हर तरफ चीख क्यूं’। अमुक आर्टिस्ट ग्रुप ने नुक्कड नाटक ‘चक्रव्यूह’ पेश किया। नाटक इस बात को दिखाता है कि कैसे जनता आज चक्रव्यूह में फंस गई है। इस व्यूह में उसका दम घुट रहा है। उसकी अन्तिम मुक्ति इसे तोड़ देने में है। लेनिन के जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का समापन गंगा प्रसाद ने सभी को धन्यवाद देकर किया।

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