समकालीन सरोकार के चौथे अंक में जबरदस्त भंडाफोड़… साहित्य में नकल, पैरोडी और चोरी का धंधा

लेखक संगठनों की लीला और विश्वविद्यालयों में शोध लेखन की रामलीला पर देश भर के श्रेष्ठ रचनाकारों, लेखकों, साहित्यकारों के विचारोत्तेजक विचार लखनऊ से प्रकाशित समकालीन सरोकार के चौथे अंक में है. इंटरनेट के लुभावने और डरावने संसार पर भी एक नजर है. इस अंक में कामतानाथ, राजेश जोशी, हरीचरण प्रकाश, नरेश सक्सेना, प्रमोद जोशी, वीरेंद्र सेंगर, विमल कुमार, रमेश दीक्षित, प्रेम कुमार, वेद प्रकाश अमिताभ, शिवशंकर मिश्र, सुभाष गाताडे, पीयूष पांडेय, नील कमल, हरपाल सिंह अरुष, अमितेश, मुकुल श्रीवास्तव, विनोद तिवारी, राजेंद्र दानी, जय प्रकाश कर्दम, चंद्रकांत देवताले, रवींद्र वर्मा, पवन कुमार और प्रियंवद समेत अनेक श्रेष्ठ रचनाकारों की उपस्थिति है. ताजा अंक बाजार में आ चुका है.

लखनऊ से सुभाष राय और हरे प्रकाश उपाध्याय के संपादकत्व में प्रकाशित मासिक पत्रिका समकालीन सरोकार को हर प्रांत और जनपद में प्रतिनिधि चाहिए. ऐसे प्रतिनिधि जो विज्ञापन, वितरण और समाचार संकलन में सहयोग कर सकें. इसके लिए इच्छुक लोग नीचे दिए गए पते व फोन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं–

सुभाष राय

हरे प्रकाश उपाध्याय

समकालीन सरोकार

विनीत प्लाजा, फ्लैट नं -1

विनीत खंड-6, गोमतीनगर

लखनऊ (उ. प्र.)

मोबाइल-

09455081894

08756219902

प्रेस विज्ञप्ति

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