समाधान की बजाय समस्‍याएं बढ़ाने का काम कर रहा है मीडिया : काटजू

जयपुर : भारतीय प्रेस परिषद का अध्यक्ष पद संभालने के बाद से मीडिया की कार्यशैली और खबरों की गुणवत्ता की खुली आलोचना कर रहे पूर्व न्यायाधीश मार्कडेय काटजू ने एक बार फिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर तल्ख टिप्पणी की। काटजू ने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया का करीब नब्बे प्रतिशत हिस्सा लोगों की सोच को विकसित कर ज्वलंत समस्याओं का समाधान करने की बजाय उन्हें और बढ़ाने का काम कर रहा है। उन्होंने मीडिया से लोगों का बौद्धिक स्तर ऊंचा उठाने का काम करने की अपील की।

यहां माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की ओर से आयोजित झाबरमल्ल स्मृति व्याख्यानमाला में संबोधन के दौरान काटजू ने जयपुर साहित्य उत्सव के व्यापक कवरेज पर भी सवालिया निशान लगाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह की मीडिया में साहित्य उत्सव को लेकर छपा है वह निराश करने वाला है। काटजू ने आह्वान किया कि मीडिया पिछडे़पन, जातिवाद, सांप्रदायिकता और अंधविश्वास जैसे मुद्दों पर प्रहार कर च्च्छे विचार को बढ़ावा दे ताकि देश के समक्ष चुनौतियों और समस्याओं का समाधान हो सके। उन्होंने मीडिया से समाज के हर वर्ग को एकसमान तवज्जो देने का आह्वान किया। काटजू ने आगाह किया कि मीडिया द्वारा किसी एक वर्ग को दोषी ठहरा देने से समाज में उस वर्ग के प्रति दुर्भाव की स्थिति पैदा हो जाती है जिससे बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाषा, समाज, संप्रदाय को बराबर का दर्जा देने पर ही देश चलेगा, यह वतन किसी एक का नहीं है। क्रिकेट कमेंट्री, फिल्म कलाकारों के निजी जीवन की रिपोर्टिंग को लेकर काटजू मीडिया पर फिर बरसे। उन्होंने कहा कि देश की क्या दुर्गति हो रही है, बेरोजगारी, गरीबी, प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। सभी लोग ज्वालामुखी पर बैठे है जो कब फटेगा पता नहीं। यह ज्यादा दिन चलने वाला नहीं, जनता इसे अधिक बर्दाश्त नहीं करने वाली। काटजू ने स्पष्ट किया कि वह मीडिया के दुश्मन नहीं हैं लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें गलत समझ लिया है।

इसी समारोह में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने कहा कि मीडिया को समाज के दर्पण का काम करना होगा और समाज को दिशा दिखानी होगी। मीडिया में पेडन्यूज चिंता का विषय है जिसका विस्तार चलता रहा तो समाचारों की मौलिकता कुंठित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के तीन स्तंभों का संवाद जनता से नहीं रह गया है जिसकी कमी को पूरा करने का काम मीडिया कर रहा है। च्च्चाई को कुचलने के प्रयास जिस ढंग से अभी हो रहे है ऐसे प्रयास इससे पहले कभी नहीं हुए जो चिंता का विषय है। (एजेंसी)

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *