सरकारी कामकाज की ब्रांडिंग के जरिए अपना चेहरा चमका रहे समाजवादी

जो दिखता है, वो बिकता है। बाजार के इस फंडे को राजनेताओं ने अपने चरित्र में उतार लिया है। नेता भी अपनी और अपनी पार्टी ही नहीं सरकार की भी मार्केटिंग करने लगे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की तर्ज पर उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार ने भी अपने कार्यों का ढिंढोरा पीटना शुरू कर दिया है। प्रदेश से लेकर देश और देश से लेकर विदेश तक में समाजवादी पार्टी के मंत्री और नेता अपने कामों का प्रचार करने में लगे हैं।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कोई भी ऐसा मौका और मंच नहीं छोड़ते हैं जहां वह अपनी सरकार का बखान कर सकते हैं। बात आगरा समिट की हो जहां देश-विदेश के उद्योगपतियों का जमावड़ा देखने को मिला था या फिर हार्वर्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका में महाकुंभ के क्राउड मैनेजमेंट के बहाने अपनी सरकार की ब्रांडिंग का अखिलेश ने कभी अपनी सरकार की छवि को बेदाग दर्शाने का मौका नहीं खोया। ऐसा नजारा पिछली समाजवादी सरकारों के समय (जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री हुआ करते थे) कम ही देखने को मिलता था। तब इसकी वजह बताई जाती थी कि समाजवादी काम करने में विश्वास करते हैं ढिंढोरा पीटने में नहीं, लेकिन सत्ता पर युवा सीएम के बैठते ही सब कुछ बदल गया है। अब अखिलेश की टीम काम के साथ नाम भी चाहती है। हो सकता है कि इसके पीछे सपा की युवा सरकार की यह सोच काम कर रही हो कि जनता के विश्वास को इसी तरह से जीता जा सकता है, लेकिन विपक्ष भी कहां पीछे रहने वाला है।वह भी सपा सरकार की खामियां उजागर करने का कोई न कोई मौका तलाश ही लेता है। सरकार की तारीफ करने और बखिया उधेड़ने के इस खेल में कभी सत्ता पक्ष का तो कभी विपक्ष का पलड़ा भारी लगता है।

बहरहाल, अमेरिका में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अंतरराष्ट्रीय पटल पर उत्तर प्रदेश की छवि चमकाने में लगे थे तो उनकी सरकार और पार्टी के रहनुमा प्रदेश में सघन जनसम्पर्क अभियान चलाकर सपा सरकार की तस्वीर चमका रहे हैं। इस तरह के अभियान प्रदेश के हर जनपद में हो रहे हैं। सरकार की उपलब्धियों को जन-जन, गांव-गांव पहुंचाने के इस अभियान में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं-मंत्रियों एवं प्रभारियों सभी को शामिल किया गया है। गत दिनों मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अमेरिका के लिए प्रस्थान करने से पूर्व औरैया में स्वयं इस अभियान का शुभारम्भ किया था तो वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने सघन जनसम्पर्क अभियान के तहत कानपुर देहात में समारोह को सम्बोधित किया। उनके साथ पार्टी के अन्य कई नेता मौजूद थे। इस तरह के अभियानों को जरूरी बताते हुए सपाई कहते हैं कि पार्टी यही नहीं रूकेगी, इस अभियान के साथ-साथ पार्टी नेता बैठकों, नुक्कड़ सभाओं, साइकिल यात्रा और प्रचार सामग्री के वितरण का कार्य करके भी सरकार की छवि में चार चांद लगायेंगे।

बात मुख्यमंत्री द्वारा सरकार की छवि सुधारने की कि जाये तो मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव इस तरह के अभियानों से दो तरफा फायदा उठाने की फिराक में हैं। एक तरफ उन्होने औरैया में जनसम्पर्क अभियान की शुरुआत  करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की कई परियोजनाओं में दूसरे प्रदेश रूचि ले रहे हैं और इनकी प्रशंसा कर रहे है तो दूसरी तरफ कुछ दल बराबर झूठी आलोचनाएं कर रहे हैं। अखिलेश ने यहां तक कहा कि लोकसभा चुनाव 2014 के मद्देनजर समाजवादी पार्टी के खिलाफ साजिशें रची जा रही है। हमें इससे सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में खजाना पत्थरों पर खर्च नहीं किया जाएगा, बल्कि किसानों, नौजवानों, और बेकारों के हित में योजनाओं पर खर्च होगा। प्रदेश में बिजली व्यवस्था में शीघ्र सुधार होगा।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जहां अपनी सरकार की खूबियों का डंका पीट रहे हैं और विपक्ष पर हमलावर हैं वहीं वह अपनो को नसीहत देने का भी कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। औरया में संबोधन के दौरान अखिलेश की बेबाकी साफ दिखाई दी जहां उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन मिलकर काम करेंगे तो जन समस्याओं का निराकरण होने में देर नहीं लगेगी। समाजवादी पार्टी सरकार ने पहले ही दिन लोकतंत्र को बहाल किया और जनता तथा सरकार के बीच की दूरी खत्म की। इससे पूर्व तो बसपा मुख्यमंत्री से मिलना तो दूर उनके आवास की सड़क के पास से गुजरना भी सम्भव नहीं था।

जनता से जुड़ें मुद्दों पर कैसे राजनीति होती है। इस बात का अहसास भी समाजवादी सरकार और पार्टी के रवैये से समझा जा सकता है। एक तरफ तो समाजवादी पार्टी कांग्रेसी गठबंधन वाली मनमोहन सरकार को अपना समर्थन दे रही है तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव कहते हैं कि कांग्रेस के कारण मंहगाई बढ़ी है। उत्तर प्रदेश विकास के पथ पर अग्रसर है किन्तु केन्द्र से अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है। अपने साधनों से हमने अपने ज्यादातर चुनावी वायदे पूरे कर दिए हैं और शेष भी शीघ्र पूरे हो जाएगें। प्रदेश में कानून व्यवस्था पहले से बेहतर हैं। रोजगार के अवसरों के सृजन के लिए औद्योगिक वातावरण बन रहा है। प्लास्टिक सिटी बनने से स्थानीय नौजवानों को रेाजगार हासिल होगा।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही नहीं पूरी समाजवादी सरकार और पार्टी विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोले हैं। समाजवादी सरकार के कद्दावर नेताओं ने तो बसपा और उसकी सुप्रीमो मायावती के खिलाफ अभियान ही चला रखा है। बसपा राज की खामियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। इस बात का अहसास कानपुर के डीएवी लान में सघन जनसम्पर्क अभियान का प्रारम्भ करते हुए वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव की बातों से हुआ जहां भीड़ को देख कर उनका उत्साह चरम पर पहुंच गया और बोले बसपा कुशासन के खिलाफ पिछले पांच सालो में नौजवानों, मुस्लिमों और समाज के सभी वर्गों के लोगों के संघर्ष से प्रदेश में समाजवादी पार्टी की बहुमत की सरकार बनी है। इस सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ जन-जन तक पहॅुचाना है। पिछली सरकार के समय प्रदेश बदहाल और बदनाम हुआ था। समाजवादी पार्टी की सरकार गांव-गरीब और लोकतंत्र तथा समाजवाद को मजबूत करने का काम कर रही है। वहीं प्रदेश प्रवक्ता  राजेन्द्र चौधरी ने लखनऊ में जिला/महानगर कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी विकास के साथ व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई भी लड़ रही है। बसपा मुख्यमंत्री ने दलितों के नाम पर धोखा दिया। उन्हें लोकलाज नहीं थी। समाजवादी पार्टी की नीतियां जनता की भलाई के लिए है।

समाजवादी पार्टी का सघन जनसम्पर्क अभियान का आगाज पूरे प्रदेश में एक साथ हुआ और सभी जगह कुछ ऐसा नजारा पेश किया गया मानों उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार ने पहली बार प्रदेश के किसानों, नौजवानों, महिलाओं, मुस्लिमों के लिए योजनाएं बनाई हों। जगह-जगह सपा नेताओं ने जनता को बताया कि किसानों का 50 हजार का कर्ज माफ किया गया, नहर एवं ट्यूबवेल से मुफ्त सिंचाई के अलावा अस्पतालों में मुफ्त इलाज की भी सुविधा दी गई है। बेकारी भत्ता, कन्या विद्याधन देने के साथ कब्रिस्तानों चहारदीवारी का निर्माण कराया गया है। महिलाओं का उत्पीड़न न रोकने के लिए 1090 वूमेन पावर लाइन तथा स्वास्थ्य परिवहन सेवा 108 शुरू की गई है। मुस्लिम छात्राओं को 30 हजार रंपए अनुदान में तथा इंटर पास सभी छात्र-छात्राओं को लैपटाप देने का कार्य इस सरकार ने किया है। पदोन्नति में आरक्षण एवं परिणामी ज्येष्ठता को समाप्त करने के अलावा समाजवादी पार्टी सरकार ने ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्र के लोगों का सरकारी सेवाओं में भर्ती की आयु सीमा 35 वर्ष से बढ़ाकर 40 वर्ष कर दी है। पिछली सरकार के समय मुस्लिम युवकों को दहशतगर्द बताकर जेल में डाल दिया गया, समाजवादी पार्टी सरकार ने उनका परीक्षण कराकर रिहाई के कदम उठाए है। गरीबों को मोटर चालित रिक्शे बांटे गए है।                                  

बहरहाल, समाजवादी सरकार ने इस दौरान उन खामियों पर पर्दा डाले रखना ही बेहतर समझा जो अखिलेश सरकार की किरकिरी की वजह बनी हुई हैं। बिगड़ी कानून व्यवस्था पर कोई समाजवादी अपने विचार नहीं रखता है। सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी पर भी कोई कुछ नहीं बोलता है। हत्याओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है, मासूम बच्चियों तक को वहशी दरिंदे नहीं छोड़ रहे हैं। दस साल की बच्ची से दुराचार किया जाता है और वह न्याय मांगती है तो उसे ही सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है। खाकी वर्दी इंसाफ के नाम पर डंडे बरसाती है तो ‘सरकार’ भी पीड़ितों के साथ उसकी जात बिरादरी देख कर रहमोकरम बरसाते हैं। समाजवादी सरकार और उसके नेताओं की स्थिति यह है कि उन्हें अपने लोगों के अलावा सब चोर-बदमाश नजर आते हैं। यहां तक की आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर भी समाजवादी राजनीति करने से बाज नहीं आते हैं। एक तरफ जंगलराज का माहौल बन रहा है तो सपा नेताओं के कड़वे बोल भी लोगों का सीना छलनी कर रहे हैं।

जनता ही नहीं संभवताः न्यायपालिका को भी प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भरोसा नहीं रह गया है, वर्ना उच्चतम न्यायालय भाजपा के नेता कृष्णानंद राय हत्याकांड का मुकदमा यूपी के गाजीपुर से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश न देती। इस हत्याकांड में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी और उनके पूर्व सांसद भाई अफजाल अंसारी मुख्य अभियुक्त हैं जिनके रिश्ते सपा-बसपा से करीबी रहते हैं। न्यायमूर्ति एच एल गोखले और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने मृत भाजपा नेता की पत्नी की याचिका पर यह फैसला सुनाया। वैसे यह पहला मौका नहीं था जब उत्तर प्रदेश के किसी मामले को सुनवाई के लिये प्रदेश से बाहर भेजा गया था। कृष्णानंद राय हत्याकांड की जांच दूसरे राज्य में भेजने के अदालती आदेश से यह बात साफ हो गई है कि विपक्ष प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था का आरोप लगा रहा है तो उसकी बातों को हवा में नहीं लिया जा सकता है। सपा को अपनी छवि सुधारना है तो उसे अपनी छवि आईने की तरह साफ बनाना होगी। सरकार की ब्रांडिंग और विपक्ष के सिर नाकामी का ठीकरा फोड़ना दूरगामी राजनीति का संकेत नहीं है।

लेखक अजय कुमार लखनऊ में पदस्थ हैं. वे यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई अखबारों और पत्रिकाओं में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. अजय कुमार वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं.

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