सरकार के नियंत्रण से बाहर यूपी की नौकरशाही!

बार-बार सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव द्वारा अपनी ही सरकार को आईना दिखाने और नौकरशाही पर उंगली उठाने का प्रभाव अखिलेश सरकार के तौरतरीकों पर दिखने लगा है। अखिलेश सरकार के मंत्रियों के तौर तरीकों और कामकाज की समीक्षा होने लगी है तो नौकरशाही को पुचकारकर लाइन पर लाने की कोशिश कर रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अब ब्यूरोकेट्रस के साथ ‘भय बिना प्रीत न होय’ के फार्मूले पर चलेंगे जैसे की बसपा राज में होता था। इस बात का अहसास अब अखिलेश की बातों से होने भी लगा है। छह वर्षों के बाद लखनऊ में आयोजित ‘आईएएस वीक’ में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे अखिलेश ने आईएएस के मंच से ही उनकी क्लास ले ली।

उनकी बातों से साफ लग रहा था कि अब वह अपनी सरकार की विश्वसनीयता को बचाये रखने के लिए किसी को भी हद तक जा सकते हैं। आगे वह उत्तर प्रदेश की बेलगाम ब्यूरोक्रेसी और अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों को और छूट नहीं देंगे। अखिलेश ने नकारा अधिकारियों को हटाने की पहली कड़ी में अपने चहेते और भारी भरकम विभाग संभाले आईएएस अधिकारी औद्योगिक विकास आयुक्त (आईडीसी) और उर्जा विभाग के प्रमुख सचिव डा. अनिल कुमार गुप्ता और नोयड़ा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव सरन को सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से मुक्त करके यह जता दिया कि उनकी पसंद सिर्फ और सिर्फ काम करने वाले अधिकारी ही हैं, कोई भी अधिकारी बिना कामकाज किये अपने को सत्ता के करीब समझने का दम न भरे।

उक्त दो बड़े अधिकारियों की महत्वपूर्ण पदों पर से विदाई के साथ ही बडे प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। माया सरकार में अहम रहे अफसरों को अखिलेश राज में भी अहमियत दिए जाने की सपा कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद आईएएस अफसरों में खलबली है। सभी एक-दूसरे से सवाल कर रहे हैं कि आखिर कौन से नौकरशाह सपाइयों के निशाने पर है? क्या अखिलेश सरकार उन्हें दरकिनार करने जा रही है? आईएएस लॉबी को चिंता इसलिये भी है, क्योंकि राज्य को 111 प्रमोटी आईएएस मिल चुके हैं, जो अपने जौहर दिखाने को बेताब हैं। आईएएस लॉबी हल्कान है कि माया राज कहीं फिर से न दोहराया जाये। उस समय सभी मापदंडों को दरकिनार कर मायावती ने गैर आईएएस शंशाक शेखर को कैबिनेट सचिव बना कर नौकरशाहों पर लाद दिया गया था।

नौकरशाहों की चिंता इस लिये भी उचित लगती है, क्योंकि मुलायम और अखिलेश भी कई बार कह चुके हैं कि उन्हें नौकरशाहों की कमी के कारण बसपा राज के पुराने अफसरों से काम चलाना पड़ रहा है। इसी कारण प्रशासनिक कामकाज में  तेजी नहीं आ पा रही है। जो हालात हैं उससे तो यही लगता है कि मुख्यमंत्री लगभग यह मान कर चल रहे हैं कि माया राज के अफसरों की मानसिकता बदली नहीं जा सकती है। बात समाजवादियों की कि जाये तो सपा कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर नाराजगी है कि मायाराज के नौकरशाहों को सपा सरकार सजा देने के बजाये गले लगाये है। जिन नौकरशाहों पर बसपा के करीबी होने का आरोप लग रहा है उसमें कमराज रिजवी, हिमांशु कुमार, संजय अग्रवाल, आलोक रंजन समेत कई आईएएस अफसर हैं, जिनको पिछली सरकार के साथ-साथ  इस सरकार में भी खासी अहमियत मिली हुई है। वैसे माया के करीबी नौकरशाह आरपी सिंह, अनिल संत, रवींद्र सिंह, बलविंदर कुमार आदि सत्ता बदलते ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जा चुके हैं। पिछले साल दिवाली के मौके पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दरबार में बधाई देने जब मायाराज के खास अफसर पहुंचे तो कानाफूसी का दौर शुरू हो गया था। इन अफसरों में दुर्गाशंकर मिश्र, नेतराम  व नवनीत सहगल प्रमुख थे।

सपा कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद भयभीत नौकरशाह अपने-अपने आकाओं के यहां परिक्रमा कर रहे हैं। यही वजह थी बीते दिनों मुलायम के तेवरों को देखकर कई आईएएस अधिकारियों में सपा महासचिव राम गोपाल यादव से मिलने की होड़ देखी गई। बहरहाल, पीसीएस से आईएएस बने अधिकारी भी जानते हैं कि जल्द या देर-सबेर नौकरशाही में बड़ा बदलाव होना निश्चित है। इसका फायदा सीधे तौर पर पदोन्नति से आईएएस से बने अधिकारियों को ही होगा। इसी लिये वह मलाईदार पदों के लिए जोड़-तोड़ में लग गए है। उनकी नजरें महत्वपूर्ण जिलाधिकारी और कमिशनर के पदों पर है। वैसे, कानून व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण ही सरकार पर दबाव है कि पुलिस महकमें में भी बदलाव किया जाये।

इस समय मायावती के करीबी जो अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान हैं उसमें महेश गुप्ता- आबकारी आयुक्त, प्रमुख सचिव पंचायती राज माजिद अली, सीईओ ग्रेटर नोयडा रमा रमण, प्रमुख सचिव समाज कल्याण सदाकांत, सचिव मानवाधिकार आयोग जितेन्द्र कुमार शामिल हैं, जिनके ऊपर कई आरोप भी लगे हुए हैं। बात एक-एक कर की जाये तो माया राज में पोंटी चड्ढा को फायदा पहुंचाने वाली आबकारी नीति बनाने वाले आबकारी आयुक्त महेश गुप्ता सपा सरकार में भी अपने पद पर विराजमान हैं। इतना ही नहीं अखिलेश सरकार ने भी उन्हीं की बनाई नीति को जारी रखने का फैसला किया है। माजिद अली प्रमुख सचिव पंचायती राज हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट घेटाले के दौरान परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव थे। शुरुआती झटकों के बाद सपा सरकार में भी पैठ बना ली। कुछ समय के लिए सहकारिता विभाग भेजे गये। अभी भी वह प्रमुख सचिव पंचायती राज है। रमा रमण, सीईओ ग्रेटर नोएडा ने भी माया राज में खूब नाम कमाया था जब मोहिन्दर सिंह नोएडा व ग्रेटर नोएडा के अध्यक्ष थे तो रमा रमण ग्रेटर नोएडा के सीईओ थे। नई सरकार ने मोहिन्दर सिंह को हटाकर सामान्य प्रशासन भेज दिया, लेकिन रमा रमण इसी पद पर बरकरार हैं। आईएएस सदाकांत, प्रमुख सचिव समाज कल्याण को बलविंदर कुमार के पिछले साल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने पर मायावती ने सदाकांत को खाद्य एवं रसद विभाग दिया था। बाद में यह विभाग उनसे ले लिया और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग दे दिया। सपा सरकार में भी समाज कल्याण व बाल विकास एवं पुष्टाहार जैसे अहम विभाग उनके अंडर में हैं। आईएएस जितेन्द्र कुमार, सचिव मानवाधिकार आयोग पर बसपा काल में परिवहन विभाग में रहते हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का ठेका मनपसंद कंपनी को देने में भूमिका पर सवाल उठे थे। माया राज में ही सचिव माध्यमिक शिक्षा रहते हुए स्कूलों के भवन निर्माण में लैकफेड घोटाले की  आंच भी उन तक पहुंची थी। इसके बावजूद सपा सरकार ने इन्हें सचिव  चिकित्सा विभाग बनाया, लेकिन आलोचना के बाद सचिव मानवाधिकार आयोग की जिम्मेदारी दे दी।

बहरहाल, सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने जिस समय अधिकारियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किये थे वह टाइमिंग के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण रहा। उसी समय नौकरशाह छह वर्षों के बाद आईएएस वीक मनाने जा रहे थे और मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित किये गये थे। इस मौके को सीएम और आईएएस लॉबी दोनों अपने हितों के लिए भुनाना चाहते थे। आईएएस वीक में मुख्यमंत्री को अपनी भड़ास निकालने का पहले मौका मिला। उन्होंने बिना लागलपेट के अपनी बात रखी और कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं एवं नीतियों का लाभ जनता तक पहुंचाने के लिए अधिकारी पूरी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा से काम करें। गरीबों एवं किसानों को लाभ पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में उद्योग स्थापना की व्यापक सम्भावनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक बड़े उद्यमी यहां निवेश के इच्छुक हैं। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए हमें राज्य में निवेश के लिए माहौल बनाने हेतु तत्परता से काम करना होगा।

उन्होंने आईएएस लॉबी को आईना दिखाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश कैडर के आई.ए.एस. अधिकारी देश के ऊंचे पदों तक प्रोन्नति पाते रहे हैं। अधिकारी सरकार का अभिन्न अंग हैं। इसलिए सरकार की योजनाओं को लागू करने तथा जनता को लाभ पहुंचाने का सबसे बड़ा उत्तरदायित्व अधिकारियों का ही है। पूर्व में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण फैसले लेकर देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण काम किए हैं। इस परम्परा को कायम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनता, जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ अधिकारियों पर भी काफी भरोसा करती है। इसलिए अधिकारियों को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता से काम करना चाहिए। हम सभी जनता की सेवा के लिए ही हैं। विकास के लिए कानून व्यवस्था का ठीक रहना अत्यन्त आवश्यक है। इसलिए प्रदेश सरकार ने कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिये। मुख्यमंत्री ने नाकारा नौकरशाहों के खिलाफ कार्रवाई तो काम करने वालों को पूरा सम्मान देने की बात कही। आईएएस वीक के पहले दिन मुख्यमंत्री ने नौकरशाहों को नसीहत दी तो दूसरे दिन ब्यूरोक्रेट्स अपने भीतर के जयचंदों की तलाश करते दिखे। नौकरशाही ने अपने हिसाब से सरकार का विश्वास दिलाने की कोशिश भी कि उनकी वजह से सरकार की छवि छूमिल नहीं होगी। देखना यह है कि यह नसीहतें और वायदे कितने कारगर साबित होंगे।

लेखक अजय कुमार लखनऊ में पदस्थ हैं. वे यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई अखबारों और पत्रिकाओं में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. अजय कुमार वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं.

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