सवाल ई बा कि का कवनो सरकारी संस्था पइसा लेके केहु के राज्यपाल के हाथों सम्मानित करवा सकेले?

पटना। भोजपुरी कलाकारन आ साहित्यकारन का संगे भोजपुरी अकादमी जवन सलूक कइलस, ऊ त सभ केहु जान गइल, लेकिन आज पता चलल ह कि रवि कांत दुबे अउर उनुकर भोजपुरी अकादमी बिहार के माननीय राज्यपाल के भी गुमराह कइलस, अउर निजी स्वार्थ खातिर उनका हाथ से कई गो अइसन लोगन के सम्मानित करवलस, जे ओह स्तर के सम्मान के हकदारे ना रहे। एगो आश्चर्य के बात इहो बा कि अकादमी भोजपुरी के नांव पर कई गो अइसन लोगन के भी सम्मानित करवा दिहल, जेकरा के कबो सार्वजनिक जीवन में भोजपुरी बोलत भी ना देखल गइल।

एगो सरकारी कार्यक्रम में सबसे आश्चर्यजनक बात ई भइल कि अकादमी सम्मानित होखे वाला लोगन के लिस्ट बनाये से पहिले अपना कार्यकारिणी के एगो बैठक तक बोलावल उचित ना समझलस, अउर एगो बाहरी व्यक्ति (बी. एन. तिवारी) के मनमाना ढंग से कार्यक्रम के संयोजक बना दिहलस। एकरा बाद ई दुनू जाना मिल के जेकरा के मन में आइल, सम्मान दिहल, अउर जेकरा के मन में आइल, ब्रांड-एम्बैसडर बना दिहल, जबकि बिहार सरकार के अनुसार अकादमी का अध्यक्ष का लगे केहु के ब्राण्ड एम्बैस्डर बनाये के अधिकारे नइखे।

चूंकि ई सम्मान एगो सरकारी संस्था द्वारा भोजपुरी के कुछ तथाकथित महान लोगन के दिहल गइल, ओह से हमनी का आज हर ओह व्यक्ति के बारे में बात करब, जेकरा के भोजपुरी अकादमी सम्मानित कइलस।

1. डा. वशिष्ठ नारायण सिंह – प्रसिद्ध गणितज्ञ।
2. श्री रामाज्ञा राम – भिखारी ठाकुर से जुडल बानी।
3. श्री अक्षयवर दीक्षित – साहित्यकार।
4. डा. गदाधर सिंह – साहित्यकार, शिक्षाविद।
5. डा. अरुणेश नीरन – साहित्यकार, विश्व भोजपुरी सम्मेलन से संबंधित।
6. डा. बी. एन. तिवारी – भोजपुरी कार्यक्रमन में सम्मान लेवे-देवे आ दिलाये में माहिर।
7. डा. सरिता बुद्धू – मॉरीशस के भोजपुरिया साहित्यकार।
8. डा. शुक्ला मोहंती – शिक्षाविद, भोजपुरी साहित्य या कला जगत में कवनो योगदान नइखे।
9. डा. नर्मदेश्वर पाण्डेय – हिंदी साहित्यकार, भोजपुरी साहित्य या कला जगत में कवनो योगदान नइखे।
10. श्री अजीत दुबे – मैथिली-भोजपुरी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष, भोजपुरी साहित्य या कला जगत में कवनो योगदान नइखे।
11. श्री भरत शर्मा ब्यास – प्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायक।
12. श्रीमती मालिनी अवस्थी – प्रसिद्ध अवधी लोक गायिका, भोजपुरी में भी गायेली।
13. श्री मनोज तिवारी – भोजपुरी अभिनेता अउर गायक।
14. डा. गिरिजानंद सिंह विशेसर – मॉरीशस स्थित महात्मा गाँधी संस्थान के भोजपुरी विभाग के अध्यक्ष।
15. श्री गोरख प्रसाद मस्ताना – भोजपुरी साहित्यकार।
16. श्री लोक सोहोदेव – ब्रिटेन में कार्यरत भोजपुरी साहित्यकार।
17. श्री उदेश्वर कुमार सिंह – बिहार से संबंधित एगो अंग्रेजी वेबसाइट के संचालक।
18. श्री कुमार नयन – हिन्दी साहित्यकार।
19. श्री दीपेंद्र कुमार – भोजपुरी साहित्यकार, नेपाल से।
20. श्रीमती होसिला देवी – गायिका, मॉरीशस से।
21. श्री कन्हैया सिंह – व्यावसायी, समाजसेवी, भोजपुरी खातिर कवनो योगदान नइखे।
22. श्री शिवजी सिंह – पुर्वांचल एकता मंच के संस्थापक, साहित्य या कला जगत में कवनो योगदान नइखे।
23. डा. इंद्रनाथ शरण ‌।
24. श्री कुलदीप श्रीवास्तव – एगो हिन्दी पत्रिका के संपादक, भोजपुरी साहित्य या कला जगत में कवनो योगदान नइखे।
25. श्री संजय सिन्हा – व्यावसायी, भोजपुरी साहित्य या कला जगत में कवनो योगदान नइखे।
26. श्री सुनील सिंह गोपाल – बखोरापुर काली मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख, भोजपुरी साहित्य या कला जगत में कवनो योगदान नइखे।
27. श्री संजय तिवारी – इंडियन सोशल क्लब के मस्कट (ओमान) शाखा से जुडल, साहित्य या कला जगत में कवनो योगदान नइखे।
28. डा. रवि कांत दुबे – भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष, भोजपुरी साहित्य या कला जगत में कवनो योगदान नइखे।

जइसन कि एह लिस्ट में साफ-साफ देखल जा सकेला कि कई गो अइसन लोगन के भी माननीय राज्यपाल के हाथों सम्मान दिलावल गइल, जे भोजपुरी साहित्य अउर कला जगत खातिर कुछ नइखे कइले। एह में कई लोगन के चयन के पिछे वजह इहे रहे कि ऊ लोग भी अपना संस्था के मंच पर रवि कांत दुबे के सम्मानित कइ चुकल बा। श्री कुलदीप श्रीवास्तव के चयन के पिछे के कारण ई बा कि ऊ एक बेर बिहार सरकार के आधिकारिक प्रेस-विज्ञप्ति के अध्यक्ष जी के नांव अउर फोटो के साथ, इनिकर लिखल बताके अपना पत्रिका में छाप चुकल बाडन। एहिजा ई बतावल जरुरी रही कि भोजपुरी अकादमी के काम भोजपुरी साहित्य अउर कला के बढावा दिहल ह, ना कि ओह नेता लोग के सम्मानित कइल, जे कबो ना कबो अध्यक्ष जी के भी सम्मानित कइले बा।

वइसे एहिजा सबसे मजेदार बात ई बा कि अकादमी सिर्फ 21 लोगन के सम्मानित करे के बात सकार रहल बिया, लेकिन एहिजा नामन के संख्या काफी बढ गइल बाटे। त फेर का बाकी लोगन के फर्जी सम्मान मिलल बा? एह में कई लोगन का लगे सम्मान बा, अउर श्री सुनील सिंह गोपाल त बकायदा ओकरा के वापस भी राज्यपाल के पता पर लवटा भी चुकल बाडन, लेकिन उनुकर नांव अकादमी के आधिकारिक सूची में नइखे। ओह से भी अजीब बात ई रहल कि अकादमी अपना मंच पर ओही कार्यक्रम के संयोजक बी. एन. तिवारी अउर खुद अपना अध्यक्ष के सम्मानित करवा लिहलस। का कबो रउआ कवनो आयोजन में आयोजक के खुद के सम्मानित करावत देखले बानी?

वइसे एह मामला में सबसे गंभीर मोड आज सबेरे आइल, जब प्रसिद्ध व्यावसायी अउर समाजसेवी श्री संजय सिन्हा फेसबुक पर आके रविकांत दुबे पर ई आरोप लगवलन कि उनका से सम्मान के बदले 2 लाख रुपया माँगल गइल रहे, अउर जब ऊ देवे से इंकार कइ दिहलन, तब दुबे जी उनका के सम्मान ना देवे पर अड गइलन, जबकि बी. एन. तिवारी उनका लगे सम्मान पहुँचा दिहलन। ओकरा बाद रविकांत दुबे फेसबुक के माध्यम से ओकरा के झुठा ठहरावे में लाग गइलन। ई बात काफी गंभीर बा, काहें कि श्री संजय सिन्हा के बयान से अइसन लागता कि आयोजक लोग बकायदा पइसा लेके सम्मान बेचत रहे, अउर सम्मानित होखे वाला लिस्ट में कुछ अउर अइसन लोगन के नाम, जे ओह लायक ना रहे, संजय जी के एह दावा के मजबूती देता। एकरा अलावा रविकांत दुबे खुद फेसबुक पर लिखले बाडे कि कुछ लोगन के नांव पर सम्मान बन गइल रहे, जिनका के बाद में ना दिहे के फैसला लिहल गइल। का माननीय राज्यपाल महोदय के ई बात रहे कि कुछ सम्मान बन गइल बा, अउर ओह पर निगोशिएशन के बाद (अगर कुछ डील बनल, तब) ई फैसला लिहल जाई? का राज्यपाल के नांव के दुरुपयोग नइखे कइले अकादमी? का राज्यपाल का लगे हर ओह व्यक्ति के लिस्ट पहुँचल रहे, जेकरा नांव पर सम्मान (ताम्रपत्र) बनवावल गइल रहे? का राज्यपाल के पुरा तरह से अंधकार में राख के, उनका नांव पर मनमानी नइखे कइले अकादमी?

अब सवाल ई बा कि का कवनो सरकारी संस्था पइसा लेके केहु के राज्यपाल के हाथों सम्मानित करवा सकेले? ओह से भी गंभीर बात ई बा कि रविकांत दुबे खुद ओही कार्यक्रम के संयोजक बी. एन. तिवारी पर फर्जी सम्मान बांटे के आरोप लगा रहल बाडे, त का बिहार में केहुओ अइसन फर्जी सम्मान बनवा के बँटवा सकेला, जवना पर भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष, बिहार के शिक्षा मंत्री अउर माननीय राज्यपाल के हस्ताक्षर होखो? अगर एह बात में तनिको सच्चाई बा, त बिहार सरकार अउर पुलिस के एह पर अविलंब कार्यवाही करे के चाहीं। कुल मिला के कहल जा सकेला कि भोजपुरी के सम्मान दियाये खातिर बनल एगो संस्था के अध्यक्ष के करतूत का चलते आज समूचा भोजपुरिया समाज में आक्रोश बा।

अनूप नारायण सिंह की रिपोर्ट.

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