सहारा कर्मचारियों के भत्‍तों में भी जबर्दस्‍त कटौती, असमंजस का दौर

: कर्मचारियों से जबरिया वसूली से भी नहीं मिलेगी सुब्रत को राहत : पांच हजार से लेकर पांच लाख रूपये वसूला जा रहा है सहाराकर्मियों से :  लखनऊ : सहारा इंडिया के मुखिया को उनके मौजूदा कारागारी-जीवन से मुक्ति दिलाने के लिए दस हजार करोड़ रूपयों की रकम जुटाने की बहु-प्रचारित कवायदें भी अब सहारा इंडिया की अन्‍य योजनाओं की तरह ही हवा-हवाई हो चुकी हैं। हालांकि इस काम के नाम पर सहारा इंडिया के प्रबंधकों ने भारी-भरकम रकम जमकर जबरिया उगाहा है।

जानकारों का कहना है कि  हर सेवक यानी चपरासी-कार्यकर्ता से पांच हजार, सहायक यानी क्‍लर्क से दस हजार, प्रबंधक से पचीस हजार, वरिष्‍ठ प्रबंधक से पचास हजार और महाप्रबंधक और उससे ऊपर के अधिकारियों से एक से लेकर पांच लाख रूपयों की जबरिया उगाही की गयी है। उगाही करने वालों ने रकम देने वालों से दावा किया है कि यह रकम पिछले पौने दो महीनों से दिल्‍ली के तिहाड़ जेल में बन्‍द सुब्रत राय की जमानत के लिए जुटाया जा रहा है। लेकिन खबर है कि काफी कोशिशों के बावजूद जमानत की रकम जुटा पाने में नाकाम रहा है। बावजूद इसके, वसूली का अभियान चल रहा है। इतना ही नहीं, कम्‍पनी ने अपने कर्मचारियों के भत्‍तों में भी जबर्दस्‍त कटौती कर दी है।

आपको बता दें कि यह रकम सहारा इंडिया के कर्मचारियों की सहकारी समिति-कम्‍पनी में वसूली गयी है। यह समिति सहारा इंडिया के प्रबंधकों ने ही खड़ी की है। भोपाल में पंजीकृत इस सहकारी समिति-कम्‍पनी अब सहारा इंडिया के बड़े अधिकारियों के हाथों में है और यह वसूली अभियान सुब्रत राय की जमानत के लिए की जा रही है। सहारा के एक कर्मचारी ने अपना नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर आश्‍चर्य और क्षोभ व्‍यक्‍त किया कि इतनी बड़ी रकम वसूली के बदले में उनके अधिकारियों ने दो अधपन्‍ना पकड़ा दिया है। लेकिन इसके बदले में क्‍या-क्‍या मिलेगा, इस बारे में कोई चर्चा-ब्‍योरा तक इस अधपन्‍ने में दर्ज नहीं है। हालांकि मौखिक तौर पर इन कर्मचारियों से कहा गया है कि उन्‍हें यह रकम तीन बरस में दो-गुना होकर वापस की जाएगी।

हैरत की बात यह है कि शुरूआती दिनों में तो कर्मचारियों के वेतन से यह वसूली हुई, लेकिन जल्‍दी ही अब उसे नकद लिया जा रहा है। अब तक किसी भी कर्मचारी ने इस वसूली से इनकार नहीं किया है, वजह यह कि हर कर्मचारी बहुत अच्‍छी तरह से जानता-समझता है कि इस वसूली से इनकार करने वालों का अंजाम क्‍या होगा।

उधर खबर है कि सहारा इंडिया प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों के भत्‍तों में भारी-भरकम कटौती का अभियान छेड़‍ दिया है। आपको बता दें कि सहारा और उसके आनुषांगिक संगठनों के कर्मचारियों को वेतन तो बहुत कम होता है, जबकि भत्‍ते वेतन से ज्‍यादा। अब इन भत्‍तों की कटौती से कर्मचारियों में आर्थिक संकट पैदा हो गया है।

लखनऊ से कुमार सौवीर की रिपोर्ट. संपर्क 09415302520

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