सहारा का पेड न्यूज प्लेटफॉर्म है टाइम्स ऑफ इंडिया?

लोग कहते हैं कि टाइम्स ग्रुप में सहारा का पैसा लगा है। करीब 50 करोड़ रु। यकीन नहीं होता था। लेकिन ग्रुप के अखबार खासकर टाइम्स ऑफ इंडिया ने जिस तरह से सेबी-सहारा की रिपोर्टिंग की है उससे यह तो साफ है अरविंद और दिवाकर नाम के बड़े बाबुओं के जरिए सहारा खबरें छपवाता है। उससे साफ है कि कुछ बड़ा चक्कर तो जरूर है। हम रिपोर्ट के बायस होने की बात को तीन बिंदुओं (ABC) के जरिए रखेंगे। अंत में हम ठोस सबूत के साथ बताएंगे कि कैसे टाइम्स ग्रुप की पीआर एजेंसी हमारे इस महिम को चुप कराने की कोशिश की।

आपको हैरानी होगी कि कि बैनेट कोलमैन, मैनहैट्टन कम्यूनिकेशंस (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड में इक्विटी होल्डर है। जो एक बड़ी पीआर कंपनी है। उसकी ऑनलाइन मार्केटिंग और क्राइसिस देखने वाली मोहतरमा फेसबुक के साथ चैट करके सहारा के सच को बंद करने का दबाव बना रही हैं। यह ग्रुप अपने ताकत के बल पर फेसबुक से “सहारा के सच” के एकाउंट को बंद करा दिया। हम यह लड़ाई आपकी मदद से लड़ रहे हैं। ताकतवर लोगों के साथ लड़ाई है। मीडिया का ताकतवर तबका ही सूचना का दूस्मन बन बैठा है। इसलिए यह लड़ाई सुब्रत,सहारा से आगे की है।

A- 20 फरवरी को जब माननीय न्यायाधीशों ने सुब्रत को सुप्रीम कोर्ट में आने का आदेश दिया तो देखिए टाइम्स ऑफ इंडिया ने अगले दिनों इस खबर को छापने अखबारों पर सहारा कितना नाराज है यह खबर प्रकाशित की जिसकी हेडलाइन थी Sahara contests media reports on SC order । सहारा छींकता भी है तो उसे केवल टाइम्स ऑफ इंडिया को पता चलता है… टाइम्स ऑफ इंडिया ने सहलाने का कोई मौका नहीं छोड़ा है।

 B- 26 फरवरी की रिपोर्ट देखिए। 25 फरवरी की दोपहर तक पीटीआई ने सुब्रत को कोर्ट में मौजूदगी पर राहत नहीं मिलने की खबर दी थी जिसमें माननीय न्यायाधीशों के इस कथन पर जोर था- “It involved not only the integrity of the Supreme Court but also of judges and lawyers involved in the matter. It is said the order of the Supreme Court is not being complied with. We may retire but we will make sure that our orders are complied with.” लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट से यह स्टेटमेंट सिरे से गायब है। ऐसा लग रहा है कि जेठमलानी की बात न्यायाधीशों से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

अखबार लिखता है ….जेठमलानी के तर्क के उत्तर में माननीय न्यायाधीशों ने कहा कि वे किसी भी आदेश में बदलाव नहीं करने जा रहे हैं…यहां तक कि 20 फरवरी के आदेश में भी।

रिपोर्ट के चौथे पैराग्राम में इनडायरेक्टली बताया गया है कि आज सहारा को सुप्रीम कोर्ट में पेश होना है।… बाकी रिपोर्ट में 92 साल की माता जी बीमार का जिक्र है। हो सकता है माता जी बीमार हों लेकिन पिछले पांच दिनों से दिल्ली के होटल में डेरा डालकर माता जी के इलाज की तैयारी चल रही है।

रिपोर्टिंग का अंत भी कुछ ऐसे है जैसे सुब्रत राय को उनकी लीगल टीम ब्रीफ कर रही है…..WE WILL SEE YOUR APPROACH TOORROW AND CONSIDER.  बेहतरनी समरी। साफ नहीं लगता है कि सहारा के साथ मिलबैठकर रिपोर्ट बनाई गई है।

C- इतना ही नहीं बिजनेस पेज पर एक और रिपोर्ट है। सहारा के कर्मचारियों और दर्जन भर बिजनेस भागीदारों को भी आज के फैसले का इंतजार है। अंदरखाने यह बात समझाने की कोशिश है कि सहारा के साथ कुछ भी होता है तो 12 लाख कर्मचारी और कई बिजनेस पार्टनर तेल लेने चले जाएंगे।

तो तीन करोड़ निवेशकों, न्याय व्यवस्था, सेबी, सरकार यहां तक की पूरी व्यवस्था के मुकाबले बिजनेस पार्टनर ज्यादा जरूरी हैं?

अब बैनेटकोलमैन की पीआर प्रैक्टिस देखिए…..यह खबर भी चलाता है और मीडिया को मैनेज भी करता है। मैनहैट्टन कम्यूनिकेशंस में बेनेटकोलमैन के शेयर होल्डिंग का सच देखिए, उसी वेबसाइट पर…

Manhattan Communications (India) Pvt Ltd , a leading agency with equity holding by Bennett Coleman & Co, Pay Pod Inc and other promoters that offers Complete brand solutions and specialising in Promotions , Events and Exhibitions has acquired a majority stake in MediaMorphosis LLC, a 360 degree full service total communications agency based in New York. MediaMorphosis LLC services the ethnic South Asian markets in the USA, Canada and UK and has offices in New York, Toronto, London and Mumbai. The company had acquired a 10 % stake in MediaMorphosis LLC in March 2010 and has now acquired a further 78% stake in the company. Manhattan Communications plans to increase its equity holding in MediaMorphosis LLC to 100% within this year. MediaMorphosis LLC has been ranked as the 12th largest Asian American advertising agency in the United States by Ad Age magazine recently.

हम बिना सबूत कोई बात नहीं कहते। जब सहारा की सच्चाई के लिए फेसबुक पर लड़ाई शुरू की गई तो एक मोहतरमा फेसबुक चैट के जरिए संपर्क करने आई। कहा फेसबुक का यह पेज ‘सहारा का सच’ डीलिट कर दीजिए। पूछा गया क्यों? तो बताया यह ठीक नहीं है। हमने सोचा आखिर ये कौन हैं। प्रोफाइल पता किया तो बेनेटकोलमैन की पीआर कंपनी मैनहैट्टन कंम्यूनिकेशंस से जुड़ीं है। जहां वे सोशल मीडिया मार्केटिंग का काम देखती हैं। उन्होंने सहारा के सच फेसबुक पर एंट्री की। अपने को सहारा का इंप्लाई बताया। फिर धीरे-धीरे इस एकाउंट को खत्म करने की वकालत करने लगी।  ये सब चैट मैंने स्क्रीन शॉट के रूप में रख लिया है। उन्होंने हमारे मुहिम को झटका दिया है और फेसबुक एकाउंट बंद कराया है लेकिन यह काम किसी व्यक्ति का नहीं मैनहैट्टन कंप्यूनिकेंशन का है जो बेनेटकोलमैन की कंपनी है।

सत्या यादव

jeetwillwin@gmail.com

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