नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की संपत्तियों का विवरण मीडिया में लीक करने पर पूंजी बाजार नियामक सेबी की खिंचाई की है। सर्वोच्च अदालत ने नराजगी जताते हुए कहा है कि इस तरह की हरकत से न केवल कंपनियों की कारोबारी धारणा पर असर पड़ता है बल्कि न्यायिक मामले में भी हस्तक्षेप होता है। सहारा ने उन संपत्तियों का विवरण दिया था जिन्हें उसकी विवादास्पद निवेश योजनाओं में पैसा लगाने वालों के निवेश की सुरक्षा गारंटी के तौर पर लिया जा सकता था।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाडि़या, न्यायाधीश एके पटनायक और न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार की पीठ ने कहा कि हम इस बात से दुखी हैं कि सहारा के वकील की तरफ से सेबी के वकील को भेजा गया प्रस्ताव एक टीवी चैनल को लीक कर दिया गया। इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। पीठ ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि विचाराधीन मामलों की रिपोर्टिग के बारे में अदालत समुचित आदेश जारी करेगी। सहारा के वकील फली एस नरीमन ने लीक मामले को अदालत में उठाया था।
सहारा के दूसरे वकील के मोहन ने कहा कि प्रस्ताव में निवेशकों की 24,000 करोड़ रुपये की देनदारी के मुकाबले समूह की 35,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की सूची भेजी गई थी। सुप्रीम कोर्ट सहारा समूह की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) के आदेश को चुनौती दी गई है। सैट ने सहारा को निवेशकों के करीब 17,400 करोड़ रुपये ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने सहारा को निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए गारंटी के तौर पर संपत्तियों की विस्तृत जानकारी देने को कहा था। 2.3 करोड़ निवेशकों ने समूह की दो कंपनियों की निवेश योजनाओं में यह राशि लगा रखी है। (एजेंसी)






