सहारा के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रह चुके विनीत मित्तल लखनऊ में गिरफ्तार

लखनऊ से खबर आ रही है कि मोहनलालगंज इलाके से विनीत मित्तल को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है. विनीत मित्तल सहारा समूह में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हुआ करते थे लेकिन सुब्रत राय से उनकी ऐसी खटकी कि न सिर्फ उन्हें बर्खास्त कर दिया गया बल्कि उनके खिलाफ कई मुकदमें भी दर्ज करा दिए गए थे. उन्हीं मुकदमों के सिलसिले में पुलिस ने मित्तल को अरेस्ट किया है.

यूपी में सपा की सरकार है और सुब्रत राय की सपा सुप्रीमो से नजदीकी सभी जानते हैं, इसलिए माना जा रहा है कि पुलिस को स्पेशल टास्क दिया गया था कि विनीत मित्तल को हर हाल में अरेस्ट किया जाए. कुछ लोग स्वतंत्र मिश्रा को भी जिम्मेदार मान रहे हैं जो सुब्रत राय की नजरों में अपना नंबर बढ़ाने के लिए विनीत मित्तल को अरेस्ट कराने की कोशिश में लगे थे और अंततः सफल हुए.

ताजी सूचना ये है कि विनीत मित्तल को सहारा के प्रकरण या मुकदमें में नहीं बल्कि किसी एमएलसी के फार्म हाउस पर कब्जा करने व अन्य हरकतों को लेकर दर्ज एफआईआर के कारण गिरफ्तार किया गया है.

विनीत मित्तल को लेकर भड़ास पर पहले तीन खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें नीचे दिया जा रहा है..


सहारा इंडिया परिवार के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर विनीत मित्तल बर्खास्त

Saturday, 04 June 2011

सहारा समूह में उलटफेर का दौर जारी है. अनिल अब्राहम और स्वतंत्र मिश्रा के बाद विनीत मित्तल पर भी गाज गिरा दी गई है. विनीत मित्तल सहारा में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे. इन पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं. सहारा ने विनीत मित्तल को समूह से बाहर किए जाने की सूचना राष्ट्रीय सहारा अखबार में पहले पन्ने पर विज्ञापन प्रकाशित करके की है.

इस विज्ञापन में विनीत मित्तल के तस्वीर को भी चस्पा किया गया है. विज्ञापन में कहा गया है कि विनीत मित्तल ने संस्था के खिलाफ जो काम किए और जो वित्तीय हेराफेरी की है, इससे प्रमाण व सुबूत मिल चुके हैं और जांच में यह सब सही पाया गया है, इसी कारण उनको निकाला जा रहा है. विज्ञापन में यह भी लिखा गया है कि पहले भी विनीत पर आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं पर वे संदेह का लाभ लेकर बच जाते थे. पर इस बार उनके खिलाफ लगे आरोप सच पाए गए इसलिए उन्हें बर्खास्त किया जा रहा है. एमसीसी चीफ विनीत्त मित्तल को बाहर किए जाने के बाद चर्चा है कि सुब्रत राय ने एक नई कोर टीम बनाई है जिसके चीफ कोई सौरभ चक्रवर्ती बनाए गए हैं. ये कोर टीम पूरे सहारा ग्रुप के सभी विभागों यहां तक कि मीडिया को भी नियंत्रित करेगा और सीधे सुब्रत राय को रिपोर्ट करेगा.

पहले ये व्यवस्था विनीत्त मित्तल के नेतृत्व में एमसीसी करती थी. ये वही विनीत्त मित्तल हैं जिनके खिलाफ ईडी और सीबीआई एक इंस्टीट्यूट के मामले में पहले से जांच कर रही है. विनीत्त मित्तल अभी तक सबसे मजबूत माने जाते रहे हैं. सहारा के अंदर एमसीसी हमेशा से प्रभावशाली भूमिका में रही है. सारे विभाग अपनी रिपोर्ट एमसीसी के जरिए ही भेजता है और एक तरह से सुब्रत राय सहारा का पूरा कामकाज एमसीसी के जरिए ही देखते आए हैं. लेकिन ताजा घटनाक्रम ने सहारा की आंतरिक कलई खोल दी है.

सहारा में आंतरिक तानाबाना बदला जा रहा है. कल शाम को ही इस तरह का एक सर्कुलर नोएडा कैंपस में टांगा गया है. पिछले एक साल में ये पहला मौका है जब सहारा के मालिक सुब्रत राय को इस तरह का सर्कुलर टांगना पड़ा है. विनीत मित्तल के निकाले जाने के कई निहितार्थ बताए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि कुछ और बड़े लोगों का विकेट गिर सकता है या उनके पर-कद कतरे जा सकते हैं.


विनीत मित्तल की संपत्ति पर सहारा वालों ने जबरन कब्जा किया

Thursday, 09 June 2011 20:23 B4M भड़ास4मीडिया – हलचल

: न्याय के लिए कोर्ट गए विनीत मित्तल : अदालत ने सहारा वालों के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश दिए और जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा : सहारा के मीडिया मैनेजर मामले को दबाने में जुट गए : सहारा समूह से एक बड़ी खबर आ रही है. विनीत मित्तल को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से हटाए जाने के बाद ताजी सूचना है कि विनीत मित्तल को सहारा समूह के लोगों ने लखनऊ के सहारा शहर में बंधक बना लिया था और उनसे उनकी संपत्ति लिखवा ली थी.

इस बाबत विनीत मित्तल ने शिकायत कोर्ट में करते हुए न्याय की गुहार लगाई है. सूत्रों के मुताबिक कोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए लखनऊ के एसएसपी को तुरंत सहारा के वरिष्ठों के खिलाफ रिपोर्ट लिखे जाने के आदेश दिए और मामले की जांच कर तय समय में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए. सूत्रों के मुताबिक कोर्ट ने इस प्रकरण को आपराधिक करार दिया है. विनीत मित्तल की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि उनकी सारी संपत्ति सहारा के लोगों ने बंधक बनाकर जबरन लिखवा ली है. कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए हर हाल में दोषियों का पता लगाने का निर्देश दिया है.

उधर, कोर्ट के आदेश से घबराए सहारा के मीडिया मैनेजर हर अखबार और न्यूज चैनल के आफिस में फोन कर इस संकट की घड़ी में सहारा के साथ खड़े होने की अपील कर रहे हैं. चर्चा है कि सहारा समूह के वरिष्ठों ने विनीत मित्तल द्वारा संपत्ति इकट्ठा किए जाने को सहारा में रहते हुए और सहारा के सिस्टम का दुरुपयोग करने का नतीजा माना है और इसी कारण उनकी संपत्ति को जब्त करने का फैसला लिया. हालांकि ऐसा करना कानूनन गलत है पर सहारा में परंपरा है कि वहां जब किसी को हटाया जाता है तो उसे काफी बेइज्जत व परेशान कर दिया जाता है. विनीत मित्तल के अदालत जाने से यह माना जा रहा है कि सहारा के खिलाफ नया मोर्चा खुल गया है और अगर पुलिस ने निष्पक्ष तरीके से जांच कर रिपोर्ट दे दी तो सहारा के कई वरिष्ठों की गर्दन फंस सकती है.


विनीत मित्तल ने अगर चोरी की है तो उन्हें चोर नहीं तो क्या कहेंगे

Saturday, 11 June 2011 17:04 B4M भड़ास4मीडिया – हलचल

: भड़ास को भड़ास ही रहने दें, इसे गन्दी उल्टी न बनाएं : भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित खबर ''विनीत मित्तल की संपत्ति पर सहारा वालों ने जबरन कब्जा किया'' त्रुटियों और पूर्वाग्रहों से संक्रमित है। विद्वानों का कहना है कि झूठ ही सिर्फ झूठ नहीं होता, आधा सच भी झूठ ही होता है। और अगर आधा सच और आधा झूठ मिले तो झूठ की पराकाष्ठा पाप में होती है।

एक पत्रकार अगर अज्ञानता से ग्रसित है तो उसका लेख न केवल पत्रकारिता के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक दोष है। मैं स्वयं अपने मुख से यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैंने सहारा में कभी काम तो नहीं किया मगर उसका प्रशंसक अवश्य हूं। और अभी तक ऐसा कोई कारण मुझे नहीं नज़र आया जो मेरे इस दृष्टिकोण को बदले। सर्वप्रथम यह खबर कि अदालत ने सहारा के लिए तुरन्त मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं और जांच पर तुरन्त रिपोर्ट पेश करने को कहा है, सरासर झूठी हैं। और माननीय न्यायालय के आदेश को बिना पढ़े ही मनगढ़न्त तरीके से पेश किया गया है।

यहां मैं उच्च न्यायालय का आदेश जो कि वेबसाईट पर भी आसानी से उपलब्ध है उसका अनुवाद कर रहा हूं। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ की माननीय न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह एवं माननीय न्यायमूर्ति राजीव शर्मा जी की डबल बेंच ने विनीत मित्तल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के केस की सुनवाई करते हुए एस.एस.पी. लखनऊ को निर्देशित किया कि वे मामले को देखें और कानून के अनुरूप तर्कसंगत आदेश पारित करके वादी के रिप्रजेंटेशन को दो हफ्तों में निस्तारित करें। साथ ही यह आदेश भी दिया कि यदि जरूरी लगे तो अभियोग पंजीकृत करने हेतु सम्बन्धित थाने में प्रेषित करें।

अब सुनिये आपका आलेख क्या कहता है? विनीत मित्तल ने कोर्ट में शिकायत करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। ‘सूत्रों’ के मुताबिक कोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए लखनऊ के एसएसपी को तुरंत सहारा के वरिष्ठों के खिलाफ रिपोर्ट लिखे जाने के आदेश दिए और मामले की जांच कर तय समय में रिपोर्ट देने के निर्देश दिये। सूत्रों के मुताबिक कोर्ट ने इस प्रकरण को आपराधिक करार दिया। पाठक खुद देख सकते हैं कि न्यायालय के आदेश और लेखक के सूत्रों के कथन में क्या अन्तर है।

इनका यह ‘सूत्र’ किस चण्डूखाने का प्राणी है? मैं समझता हूं पाठकों के सामने दूध का दूध, और पानी का पानी अब तक हो चुका होगा जबकि भड़ास के ज्यादातर पाठक पत्रकार हैं, हम जानते हैं कि ‘सूत्र’ एवं ‘विश्वसनीय सूत्र’ किस मानसिकता की उपज हैं और किन स्थितियों में इस शब्द का दुरुपयोग किया जाता है। इस तरह के गैर जिम्मेदाराना लेख भड़ास की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाते रहते हैं। अपनी व्यक्तिगत खुंदक, निराशा और खीझ को पत्रकारिता का जामा न पहनाएं। किसी ने अगर चोरी की है तो वह चोर ही कहलायेगा। और अगर सहारा वालों ने विनीत मित्तल को चोटी पर बिठाया और उन सज्जन ने विश्वासघात किया तो यह निन्दनीय है। मेरी समझ से इससे पहले कि सहारा उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही करे, विनीत मित्तल ने अपने को सुरक्षित करने के लिए यह युक्ति ईजाद की है तो इसे उसी संगत में देखना चाहिए।

निवेदन है कि भड़ास जो शुरू में पत्रकारों को रचनाशील एवं प्रगतिशील बनाने का और आपस में जोड़ने का अवसर प्रदान करता था उसे हताश निठल्लेबाजी का जमघट न बनायें। भड़ास को भड़ास ही रहने दें इसे गन्दी उल्टी न बनाएं। इसमें विनीत मित्तल जो कटघरे में खड़े हैं उनका पक्ष नमक मसाले के साथ तो नज़र आता है मगर न न्यायालय का सच और न जिसके घर में चोरी हुई है उसका पक्ष।

(उपरोक्त टिप्पणी को भड़ास4मीडिया के पास debsbose@gmail.com मेल आईडी से भेजा गया है. टिप्पणी का प्रकाशन इसलिए किया गया है ताकि संबंधित मसले पर दूसरे पक्ष के विचार-तर्क-तथ्य को सबके सामने लाया जा सके.)

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