सहारा ग्रुप के संकट पर ये दैनिक जागरण का मरहम है या भविष्‍य की तैयारी?

खुद को दुनिया का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार बताने वाले दैनिक जागरण में सहारा सुब्रत राय की सुपौत्री रोशना के एक कार्यक्रम के एक सैकड़ा तस्वीर आज यानी 25 मार्च को जागरण अखबार में  पृष्ट 17 छपी हैं। उक्त पेज पर न तो यह प्रदर्शित किया गया है कि उक्त पेज खबर है या विज्ञापन है या फिर मीडिया घरानों की अंदर की सांठ गांठ, जिससे स्पष्ट होता है कि उक्त अखबार से पाठकों, विज्ञापनदाताओं को जागरण परिवार द्वारा मूर्ख बनाया जा रहा है।

उक्त पेज सहारा परिवार के सदस्यों की तस्वीरों के संग देश-विदेश के कई चर्चित हस्तियों की हैं। इस हाई प्रोफाइल पार्टी में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पीसीआई के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू, कांग्रेस और बीजेपी के दर्जनों नेता, व्यापारी, बालीवुड के अभिनेता, भारतीय हाकी, क्रिकेट टीम के सदस्य, एथलीट सहित कई क्षेत्र के खिलाड़ी। उत्तर प्रदेश सरकार के कई मंत्री और नेता आदि। पेज पर छपी एक कालम रिपोर्ट पेड न्यूज की बदबू देती प्रतीत होती है। अखबार के शब्दों पर गौर करे तो उक्त घटना क्रम बीते दो दिन पहले की है फिर अखबार को क्या पड़ी थी ऐसे तबज्जों देने की।

अब पूरी पिक्चर समझें तो असल मुद्दा पेड न्यूज का नहीं है बल्कि सेबी द्वारा की गई कड़ाई और सहारा ग्रुप की हजारों करोड़ की बकायेदारी इसके केन्द्र में है। कुछ दिन पूर्व एमडी को हिरासत में लेने की खबरें भी छपी जिससे ग्राहकों में खासी परेशानी थी। लोग जिनके गाढ़ी कमाई का धन सहारा में फंसा हुआ है वो जैसे तैसे निकासी करवाना चाह रहा है। ग्राहकों की माने तो सहारा किसी भी समय ठप ही सकती है। अंदर की बात क्या है यह सहारा ग्रुप सामने नहीं आने दे रहा है पब्लिक रिलेशन के कर्मचारी पूरी ताकत झोंक कर आम जनता को मनाने के प्रयास में लगे हैं, लेकिन इनकी बैंकों में ग्राहकों की बेचैनी कम नहीं हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर यह पूरा ढोंग रचा गया है।

जागरण में छपी तस्वीरों के खिंचावाया तो एक निजी कार्यक्रम में गया है, लेकिन उसका मतलब सीधे जनता को यह मैसेज देना है कि सहारा ग्रुप के संग देश ही नहीं विदेश की कई नामचीन हस्तियां संबंध रखती हैं। इस लिये धोखा खा रहे या खा चुके ग्राहक चुप रहें। वहीं व्यापारी व्यापारी का दर्द समझता है और गुलशन के गिद्ध व्यापार से ही मतलब रखते हैं चाहे सहारा ग्रुप हो या जागरण। अब देखना यह होगा कि देश के लाखों लोग जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहारा से जुडे़ हैं उन्हें नामचीन हस्तियों संग फोटो का लालीपॉप या धोखा कितना समझा पाएगा।

अब जनता को फैसला करना है कि कौन कितना हिमायती है। जागरण के पाठक भी इस तरह की पेड न्यूज का भारत सरकार के नुमाइदों को भी ऐसी पेड न्यूज पर ध्यान देने की आवश्यकता है। वहीं सहारा जैसे कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों को ऐसे ग्रुपों से सावधान रहना चाहिये। जो उनका पैसा समय पर  लौटाने पर आनाकानी करते हैं। मुझे लगता है सदा से ही सरकारे बड़े बड़े उद्योगपतियों के साथ रही है और सहारा के मालिक को कुछ होगा ऐसा कुछ लगता नहीं। सुब्रत राय सहारा को सपा का संरक्षण भी प्राप्त है। दिखावा ही सही उनके कई नामचीन लोगों से आकर्षक संबंध दिखते हैं। और वो कई तरह के सामाजिक कार्यों को भी सहयोग करते है। इस संबंध में सहारा और जागरण परिवार के किसी सदस्य ने कुछ बोला नहीं है। दो बड़े घराने खामोश हैं।

साथ ही एक बात और गौर करने वाली है कि दैनिक जागरण समूह भी आने वाले समय में फर्जीवाड़ा के बड़ी मुश्किल में फंसता दिख रहा है। मुजफ्फरपुर समेत कई जगहों पर इसके खिलाफ गलत आख्‍या देकर अखबार प्रकाशन करने का मामला चल रहा है। इसके अलावा हल्‍द्वानी में भी गलत आरएनआई के आधार पर विज्ञापन लेने की शिकायत की जा चुकी है। इसलिए संभव है कि जागरण परिवार भी आने वाले समय में मुश्किल में पड़ने वाला है, लिहाजा माना जा रहा है कि पेड न्‍यूज के साथ यह अपने तथा सहारा समूह के संबंध सुधारने की कवायद भी है, जिसका मीडिया में भी दखल है।

राहुल त्रिपाठी की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नम्‍बर 9305029350 के जरिए किया जा सकता है.

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