: भू-माफिया टाइप पत्रकारों में हड़कंप : सहारा मीडिया से खबर है कि प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों से जमीन-जायदाद का ब्योरा मांगा है. इसको लेकर सहारा मीडिया में दो तरह की चर्चाएं हो रही हैं. बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने इसलिए जमीन का ब्योरा मांगा है ताकि पता किया जा सके कि सहारा मीडिया की आड़ में खेल करके तो नहीं जमीन-जायदाद बनाया जा रहा है या बनाया गया है. दूसरी तरफ ऐसी भी खबरें हैं कि सहारा प्रबंधन अपने पत्रकारों की जमीन ही हड़पने की फिराक में है. हालांकि इस खबर में उतना दम नहीं दिख रहा जितनी पहली खबर में है.
सहारा से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि सहारा मीडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी का लखनऊ में जमीन प्रकरण के चर्चा तथा विवाद में आने के बाद प्रबंधन ने ये फरमान जारी किया है. इस फरमान के बाद सहारा मीडिया से जुड़े पुराने लोग परेशान हैं. खबर है कि तमाम ऐसे लोग हैं जो मीडिया के नाम पर धौंस देकर जमीनों पर कब्जा किया हुआ है. हालांकि अभी इस मामले में विस्तार से जानकारी नहीं मिल पाई है, पर भड़ास की टीम जल्द ही इसका खुलासा करेगी. कोशिश होगी कि ऐसे लोगों को भी सामने लाया जाए जो मीडिया के नाम पर सही-गलत तरीके से जमीनों पर कब्जा करते हुए भू-माफिया होते जा रहे हैं.
सूत्रों का कहना है कि सहारा प्रबंधन को अपने कई लोगों की जमीन कब्जाने-हड़पने जैसी शिकायतें मिली थी. हर तरफ से निराश-हताश लोगों ने प्रबंधन को इन तथाकथित मीडिया मैनेजरों की हरकत-शिकायत भेजी थी, जिसके बाद प्रबंधन ने अपने सभी कर्मचारियों को, जो बड़े पदों पर हैं, अपनी-अपनी जमीन का ब्योरा उपलब्ध कराने का फरमान सुनाया है. सबसे परेशान वे लोग हैं, जो विभिन्न प्रकार का हथकंडा अपनाकर बहुत बड़े भूपति बन गए हैं और अपने परिजनों तथा रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीद रखा है. खबर है कि ब्योरा मिलने के बाद सहारा प्रबंधन आंतरिक जांच भी कराएगा ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.





