साजिश के तहत हो रहा है मीडिया पर हमला

“लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन” (लीपा) के अध्यक्ष सुभाष सिंह ने मीडिया की विश्वसनीयत पर हो रहे हमलों की घोर निन्दा करते हुए कहा है कि मीडिया की छवि को ध्वस्त करने का काम बड़े सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय मीडिया, क्षेत्रिय मीडिया, टीवी मीडिया एवं वेब मीडिया से इन सुनियोजित हमलों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।

उन्होंने कहा कि भारत में मीडिया को निशाना बनाने का एक नया चलन शुरू हुआ है। मीडिया पर सीधा प्रहार किया जा रहा है। पत्रकार का काम है जनता के लिये सवाल पूछना। सवालों से बचने के लिये पत्रकारिता को खरीदने और उसके मुंह पर लगाम लगाने के प्रयास नई बात नहीं है। लेकिन वर्तमान में यह नया प्रयोग हो रहा है। मीडिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाने का प्रयोग।

हाल ही में आसाराम की प्रवक्ता नीलम दुबे ने टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया को दलाल पत्रकार कह दिया और एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा के नेता कैलाश विजयवर्गीय ने संयम खोते हुए टाइम्स नाऊ के टीवी एंकर व एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी को पत्रकारिता की हैसियत समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि तुम्हारी हैसियत नहीं कि मेरे पांच वोट भी काट सको। ये मीडिया की छवि पर सीधा हमला है।

कुछ लोगों की रणनीति है कि जब मीडिया कोई मामला उठाये तो उसे गम्भीरता से लिया ही ना जाये। कॉर्पोरेट और पॉलीटिशियन वर्ग के कुछ लोग चाहते हैं कि जनता का विश्वास मीडिया से उठ जाये। क्योंकि मीडिया ही ऐसा माध्यम है जहां जनता की आवाज को बल मिलता है। मीडिया घोटालों को उजागर करने का काम शुरू से ही करता आ रहा है बीते कुछ समय से मीडिया ने भ्रष्टाचार के खिलाफ काफी मुखर प्रतिक्रिया दी है। 2जी, कोयला, कॉमनवेल्थ जैसे जल,थल और नभ में हुए बड़े घोटाले मीडिया की बदौलत ही उजागर हुये।

श्री सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर भी अभिव्यक्ति के नाम पर पत्रकारों को दलाल साबित करने की कोशिश की जा रही है। दीपक चौरसिया हों या अर्णब गोस्वामी हर पत्रकार की अलग-अलग शैली होती है जिसमें वो जनता के लिये सवाल पूछता है उसका मकसद अपने हित को साधना नहीं होता।

श्री सुभाष सिंह ने कहा कि कभी राजदीप सरदेसाई, कभी आशुतोष, कभी ओम थानवी के खिलाफ सीधे अभद्र शब्दों का प्रयोग किया जाता है कभी पत्रकारों पर जानलेवा हमले होते हैं। उत्तर प्रदेश में हाल ही में कल्पतरू अखबार के पत्रकार पर जानलेवा हमला हुआ। 17 जुलाई को मध्य प्रदेश के उमेरिया में माईनिंग माफिया के खिलाफ लगातार खबर छापने के लिये पत्रकार चन्द्रिका राय की उनके परिवार समेत हत्या कर दी गई। उन्होंने राष्ट्रीय मीडिया, क्षेत्रिय मीडिया, टीवी मीडिया से इन हमलों के खिलाफ एक मंच पर आने का आह्वान किया।

सुभाष सिंह ने कहा कि सरकार से मांग करते हुए कहा कि “लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन” चाहती है कि सरकार मीडिया कर्मियों की सुरक्षा के लिये कड़े कानून बनाये। अगर कोई भी मीडिया को उसका उत्तरदायित्व को निभाने से रोकता है या उसे कमजोर करने का प्रयास करता है तो उनके खिलाफ इस तरह कार्यवाई के प्रावधान होने चाहिये जैसे आईपीसी में सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न करने वालो के खिलाफ होता है।

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