साठ बरस के हुए धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव : राजनीति से पत्रकारिता तक के सफर पर एक नजर

गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, कानपुर, लखनऊ, होते हुए कोलकाता, सिलीगुड़ी, मुजफ्फरपुर और पटना के माध्‍यम से उत्‍तर प्रदेश, बिहार और बंगाल के हिंदी पत्रकारिता जगत में ईमानदार कलम का परचम फहराने वाले श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव मंगलवार को 60 वर्ष के हो गए। सामाजिक जीवन और पत्रकारिता में मस्‍ती, फक्‍कड़ी और ईमान के पयार्य श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव हमारे-आपके बीच रहकर आर्थिक स्‍थ‍िति में आज भी उसी मोड़ पर हैं जहां 1971 में थे।

हिंदी आंदोलन के हीरो स्‍व. देवव्रत मजूमदार, डा. आनंद कुमार, श्री मोहन प्रकाश और स्‍व. मारकण्‍डेय सिंह के साथ संघर्ष की दुनिया में  पैर रखने वाले श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव लोकबंधु  राजनारायण के पक्ष में 1974 मार्च में हुए केके बिरला विरोधी आंदोलन में लखनऊ में पूर्व मंत्री शतरूद्र प्रकाश के साथ गिरफ्तार हो गए। इस मामले में और लोग तो छूट गए, लेकिन लखनऊ यूनिवर्सिटी के जुझारू वामपंथी नेता सीबी सिंह का साथ होने की वजह से श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव को 6 महीने तक जेल में रहना पड़ा। उन्‍होंने गाजीपुर जेल से ही बीए की परीक्षा दी। इस दौरान लोकबंधु राजनारायण, छोटे लोहिया जनेश्‍वर मिश्र, कमाण्‍डर अर्जुन सिंह भदौरिया जैस दिग्‍गज गाजीपुर आए और धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव की पीठ थपथपाए। इस दौरान जनार्दन ज्‍वाला, डा. अनीसुर रहमान, अशोक राय, इस्राइल खां बारा और स्‍व. गोपाल तन्‍हा के मजबूत सहयोग ने उनके मन को डिगने नहीं दिया। वह सितम्‍बर के अंतिम सप्‍ताह में लखनऊ जेल से छूटे।

जेपी आंदोलन चरम पर था।  इसे लेकर दो अक्‍टूबर 1974 को स्‍व. रामाशंकर यादव, स्‍व. राजेंद्र कुशवाहा, स्‍व.केदार नाथ गुप्‍त, स्‍व. बंशीधर निराला, पारस नाथ गुप्‍ता, मथुरा प्रसाद और इस्राइल आदि के नेतृत्‍व में दिलदार नगर में भी बंद आयोजित था। जेपी आंदोलन के ही तहत निकले छात्रों के जुलूस का ग्राम रेवतीपुर में पुलिस से संघर्ष हो गया। इस संघर्ष के बाद पुलिस का अमला रेवतीपुर ग्राम पर टूट पड़ा। कोलकाता के प्रतिष्ठित हिंदी प्रकाशक हरिनारायण राय जैस लोग भी पुलिस उत्‍पीड़न के शिकार हुए। गांव में त्राहि-त्राहि की स्‍थ‍िति पैदा हो गई। इस गांव के निवासी इलाहाबाद बैंक के मैनेजर सुरेंद्र राय ने गाजीपुर में श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव को इस उत्‍पीड़न का विरोध करने को ललकारा जिसे स्‍वीकार कर वह तत्‍कालीन विधायक रामजीसिंह कुशवाहा के साथ रेवतीपुर जा रहे थे। गांव से पहले ही पीएसी के जवानों ने बस को घेर लिया और धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव को गिरफ्तार कर गहमर थाने में डाल दिया। इसकी भनक लगने पर गहमर के जुझारू समाजवादी नेता घनश्‍याम सिंह और स्‍व. विश्‍वनाथ सिंह गहमरी के पुत्र अजय सिंह गहमरी सक्रिय हो गए। गहमर में कोई बवाल न हो, इसे ध्‍यान मे रखते हुए पुलिस ने उन्‍हें तुरंत गाजीपुर जेल के लिए रवाना कर दिया। उनके ऊपर डीआईआर और 7 नेशनल क्रिमनल अमेंडमेंट ला जैसी धाराएं लाद दी गयी।

गाजीपुर के अधिवक्‍ताओं ने इस मामले मे गजब का स्‍नेह दिया। इन लोगों ने नि:शुल्‍क पैरबी तो की ही, वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता रामआधार राय खुद सफाई के गवाह के रूप मे खड़े हो गए कि पुलिस ने जिस बस से श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव को गिरफ्तार किया, उसमें वह खुद सवार थे। श्री राय ने कहा कि पुलिस और पीएसी ने रेवतीपुर से पहले ही धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव को गिरफ्तार कर लिया था। उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं। आंदोलनकारी साथियों की नि:शुल्‍क पैरवी करने वाले ध्रुवार्जन निवासी अधिवक्‍ता राजेंद्र राय इस मामले में भी वकील थे। 13 जून 1975 को इस मामले में फैसला आया जिसमें विद्वान जज ने धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव को बाइज्‍जत बरी कर दिया। इस दौरान उनकी रिहाई के लिए दिलदार नगर में सभा हुई जिसे नेता विरोधी दल चौधरी चरण सिंह ने संबोधित किया। इस सभा की अध्‍यक्षता में उसियां निवासी दाऊद खान ने की थी।

जेल से छूटने के बाद फिर प्रारम्‍भ हो गया जिंदाबाद- मुर्दाबाद। 25 जून को आपातकाल घोषित हो गया। तत्‍कालीन जिला जज के रीडर और लोहिया साहित्‍य सदन के संचालक उन्‍हे बचाकर अपने घर लाए। उनकी पत्‍नी डा. चंद्रकांता सिंह ने सौ रूपए देकर तत्‍काल दिलदारनगर छोड़ देने को कहा। वह यहां से वाराणी आए, समाजवादी नेता शहनवाज अहमद काद‍री के दालमंडी आवास में छिपकर रहने लगे और यहीं से आंदोलनकारी साथियों से संपर्क बनाए रखा।

इसकी भनक पुलिस को लगी तो वह मोहम्‍मदाबाद चले गए। वहां तैनात यूनियन बैंक के मैनेजर राम किशोर के घर पर रहे। तीसरे दिन वह घर से बाहर निकले तो एक एलआइयू के सिपाही ने उन्‍हें देख लिया। उसने मोहम्‍मदाबाद के थानाध्‍यक्ष दीनानाथ दुबे को इसकी सूचना दी। दुबे जी दिलदारनगर में रहे थे। वह धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव के ईमानदारी और जुझारू तेवर के कायल थे। उन्‍होंने गिरफ्तार करने की जगह दो सौ रूपए भेजवाए और कहलवाया कि मोहम्‍मदाबाद से बाहर निकल लें, उनके यहां रहने की जानकारी एलआइयू को लग गयी है। इस भागदौड़ में श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव को दिलदारनगर पुलिस ने आदर्श विद्यालय इंटर कालेज के मैदान में घेर लिया और वह फिर जेल भेज दिए गए और छूटे तब जब सामूहिक रिहाई हुई।

जनता पार्टी का राज आने के बाद धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव जिला जनता पार्टी के वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष थे। फिर भी संघर्ष थमा नहीं। उनके नेतृत्‍व में एक नया आंदोलन हो गया जिसका नाम था, काजीटोला फेरी घाट पर गुंडागर्दी समाप्‍त करो और फ्री करो। इस आंदोलन में विक्रमा सिंह, चंद्रभान सिंह, अखिलानंदराय, जनार्दन ज्‍वाला, सुरेंद्र पाण्‍डेय, सुबास सिंह यादव, सुरेंद्र यादव, ओमप्रकाश श्रीवास्‍तव, वेदप्रकाश श्रीवास्‍तव, सत्‍यप्रकाश श्रीवास्‍तव, ऐन्‍नूदीन अहमद, बाबुल हक और वीरेंद्र सिंह विशेष रूप से सक्रिय रहे। इस आंदोलन के पक्ष में जिला बार एसोसिएशन ने सर्वसम्‍मति से प्रस्‍ताव पारित किया।

वैसे इस आंदोलन को तत्‍कालीन मंत्री और सांसद का विरोध झेलना पड़ा। इसे लेकर धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव भी इस तबके को खटकने लगे थे और धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव को भी राजनीति में निहित स्‍वार्थ और नेतृत्‍व का धनपतियों की ओर झुकाव खलने लगा था। इस दौरान हिंडालकों के एक बड़े पदाधिकारी पूज्‍य अवधूत सिंह शावक राम का दर्शन करने दिलदानगर के गिरनार आश्रम आए। महान संत ने शावक राम ने श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव का उनसे परिचय जिला जनता पार्टी अध्‍यक्ष के रूप कराया। श्री अग्रवाल के जाने के बाद धीरेंद्र जी ने पूज्‍य बाबा से कहा कि मैं तो उपाध्‍यक्ष हूं, आपने परिचय अध्‍यक्ष के रूप में करा दिया, पता चलेगा तो बहुत अपमान होगा। पूज्‍य बाबा ने कहा कि क्‍यों अपमान होगा? कुछ दिन शांत रहो। तुम्‍हें अध्‍यक्ष होना है।

स‍च में कुछ दिनों बाद ही जिलाध्‍यक्ष शाह अबुल फैज ने इस्‍तीफा दे दिया और विधायक अवधेश नारायण सिंह (वर्तमान राज्‍यसभा सदस्‍य अरविंद सिंह के पिता), विश्‍वनाथ सिंह बाराचवर, पारसपति सिंह कासिमाबाद, प्रोफेसर सुरेंद्र प्रताप सिंह के मजबूत समर्थन के बल श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव जिला जनता पार्टी के अध्‍यक्ष हो गए, लेकिन काजीटोला फेरी घाट आंदोलन के दौरान जो उनके मन को झटका लगा था, उसकी कसक बराबर बनी रही। बाद में हुए चुनाव में इस क्रोध का हिसाब करते हुए धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव ने राजनीति को प्रणाम बोल दिया और पूज्‍य अवधूत बाबा सिंह शावक राम के आशीर्वाद वह पत्रकार हो गए।

पत्रकारिता के दौरान ही वह अकबर अहमद डम्‍पी के भाई  असगर अहमद के करीब हो गए और राष्‍ट्रीय संजय मंच के गठन के तैयार  हुए दस्‍तावेज में उनकी कलम की भी महत्‍वपूर्ण  भूमिका रही। इसी वजह से उन्‍हें अकबर अहमद डम्‍पी का असीम स्‍नेह लगातार प्राप्‍त रहा लेकिन वह राजनीति की जगह अखबार में ही जगह तलाशते रहे जो वाराणसी से प्रकाशित जनमुख के प्रधान संपादक श्री ब्रजेश राय ने उन्‍हें प्रदान की। यहीं से गांडीव, स्‍वतंत्र भारत, दैनिक जागरण, आज, हिन्‍दुस्‍तान होते हुए फिर दैनिक जागरण पटना गए, कोलकाता के ब्‍यूरो चीफ हुए और संपादकीय प्रभारी के रूप में सिलीगुड़ी संस्‍करण गए। वहां से मुजफ्फरपुर संस्‍करण में संपादकीय प्रभारी के रूप में आए।

यहां भी उनके ईमान का परचम सबके सिर चढ़कर बोलता  रहा। आईजी श्री गुप्‍तेश्‍वर पाण्‍डेय, आईजी श्री अरविंद पाण्‍डेय और पटना हाई कोर्ट के जज श्री हेमंत श्रीवास्‍तव उनके ईमानदारी की प्रशंसा सार्वजनिक तौर करते सुने जाते थे। इसी का प्रभाव था कि बिहार जैसे जाति प्रभावित राज्‍य में श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव बिहार धार्मिक न्‍यास बोर्ड के दो महत्‍वपूर्ण ट्रस्‍टों के सचिव रहे। वर्तमान में भी एक बड़े दैनिक की समीक्षा कार्य कर रहे श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव  लखनऊ से प्रकाशित सर्वप्रथम के कार्यकारी संपादक हैं।

अपने फक्कड़ी स्‍वभाव और दूसरों की मदद  करने की प्रवृत्‍ति की वजह से श्री धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव इस गौरवशाली कार्यकाल और सफर के स्‍वामी होने के बाद भी निरहू का पुरा, दिलदार नगर, गाजीपुर स्थित अपना पैत्रिक आवास नहीं बनवा पाए। देखने में खंडहर लगने वाला यह मकान धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव के ईमान का साक्षी है। 20 अगस्‍त 2013 को 60 साल के हो गए। उनकी शतायु होने की कामना के साथ हम दिलदारनगर के नागरिकों ने इस अवसर पर उनके ईमान और सहृदयता को प्रणाम करने के लिए सार्वजनिक अभिनंदन करने का निर्णय लिया है। अक्‍टूबर में होने वाले ईमान और सहृदयता को प्रणाम करने वाले सार्वजनिक अभिनंदन समारोह में भाग लेने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं।

वेद प्रकाश श्रीवास्‍तव

पत्रकार

gazipurreporter@gmail.com

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