साहित्‍य एवं पत्रकारिता समाज के दर्पण : पुण्‍य प्रसून बाजपेयी

हरिद्वार। हरिद्वार की जानी-मानी संस्था प्रेस क्लब के आचार्य किशोरी दास वाजपेयी सभागार में हिन्दी पत्राकारिता दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में जाने माने लेखक एवं पत्राकार पुण्य प्रसुन वाजपेयी उपस्थित हुए। इस अवसर पर अपने संबोधन में वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसुन वाजपेयी ने कहा कि पत्रकारिता एवं साहित्य दोनों ही समाज के आईने हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ने एक दूसरे का साथ क्या छोड़ा दोनों का पैनापन ही खत्म हो गया।

श्री वाजपेयी ने इस दौरान मुक्तिबोध आदि के उदाहरण देकर पत्राकारिता की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होने पत्रकारों का आह्वान किया कि वे अपनी पूरी क्षमता से कार्य करें। हमारे देश का मकसद बाजार नहीं है। उन्होंने मीडिया के उद्योग की और अग्रसर होने पर यह बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हिंदी विद्वान एवं साहित्यकार डॉ. विष्णुदत्त राकेश ने कहा कि हिन्दी पत्राकारिता को दिशा देने वाले प्रथम पत्रा उदन्त मार्तण्ड के बारे में जानकारी दी तथा बताया कि किस प्रकार अंग्रेजी शासनकाल में पण्डित युगल किशोर शुक्ल ने इस अखबार का संपादन किया। वर्तमान पत्रकारिता पर प्रहार करते हुए डॉ. राकेश ने कहा कि एक समय था जब पत्रकार अपने उसूलों से समझौता नहीं करते थे। उन्होंने मालवीय जी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार अखबार के मालिक से केवल तय नियमों का अनुपालन न करने का कारण उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी।

डॉ. राकेश ने कहा कि आज की पत्राकारिता के समक्ष नैतिकता एवं आर्थिक शुचिता की महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में अपने को उक्त के आधर पर स्थापित करना जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे वरिष्ठ पत्राकार प्रोपफेसर कमल कांत बुधकर ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य दोनों ही को समाज की नब्ज टटोलनी होती है। वहीं वर्तमान समय में साहित्य एवं पत्राकारिता दोनों ही इस कार्य से दूर हैं ऐसे में स्तर में गिरावट लाजिमी है। इस अवसर पर पुण्य प्रसुन वाजपेयी एवं डॉ. विष्णु दत्त राकेश का सम्मान किया गया। डॉ. राकेश ने प्रेस क्लब के पदाधिकारियों से हरिद्वार की पत्रकारिता के इतिहास को पुस्तक के रूप में संकलित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर प्रिंट, इलेक्टानिक मीडिया से जुड़े पत्रकार उपस्थित रहे।

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