सिक्‍ता देव ने उदय प्रकाश के हाथों ग्रहण किया ‘स्‍व. वेद अग्रवाल पत्रकारिता एवं साहित्य सम्मान’

मेरठ : प्रखर पत्रकार रहे स्‍व. वेद अग्रवाल स्‍मृति पत्रकारिता/साहित्‍य सम्‍मान इस वर्ष एनडीटीवी से जुड़ीं पत्रकार सिक्‍ता देव को दिया गया। 27 जुलाई 2013 को मेरठ के चैंबर ऑफ कॉमर्स में यह पुरस्‍कार उन्‍हें प्रख्‍यात साहित्‍यकार उदय प्रकाश, गीतकार लक्ष्‍मी शंकर शुक्‍ला एवं अप्रतिम कथाशिल्‍पी चित्रा मुदगल ने उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच के 30वें स्‍थापना समारोह कार्यक्रम के अवसर पर प्रदान किया। इस मौके पर देश के अलग-अलग राज्‍यों से आईं सात ऐसी विदुषी महिलाओं को भी हिंद प्र भा सम्‍मान दिया गया जिन्‍होने विपरीत परिस्थितियों में मुकाम हासिल करते हुए महिलाओं का संबल बनी हैं।

भोपाल में पली-बढ़ी सिक्‍ता देव ने दिल्‍ली के एक जाने-माने कालेज में पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की तरफ रुख किया। उन दिनों टीवी पत्रकारिता अपने शैशवकाल में थी और लोगों को लगता नहीं था कि टीवी अखबारी खबरों के आगे टिक पाएगा। इसलिए नए लोग ही टीवी की तरफ अपना रुख कर रहे थे। सिक्‍ता ने भी ऐसा ही किया। उन्‍होने क्रिकेट मैच फिक्सिंग से लेकर नाइन इलेवन, कंधार कांड, संसद और अक्षरधाम पर आतंकी हमला, अबू सलेम की वापसी और समझौता एक्‍सप्रेस ब्‍लास्‍ट जैसे अहम मसलों की रिपोर्टिंग और एंकरिंग की। सिक्‍ता देव देश की उन गिनी-चुनी पत्रकारों में से एक हैं जिनका रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ ही कलम पर भी पूरा अधिकार है। विषय की वह मोहताज नहीं हैं। सिक्‍ता देव के लाइव पैनल डिस्‍कशन सबसे अलग होते हैं। मध्‍य प्रदेश के एक आईपीएस अफसर की बेटी और ओडिशा के एक राजघराने से ताल्‍लुक रखने वाली सिक्‍ता आम आदमी के दर्द को बखूवी बयां कर रहीं हैं।

अपने संबोधन में सिक्ता देव ने कहा कि अब तक महिला वर्ग को मौका मिलने की बात कही जाती थी। कहा जाता था कि अगर उन्हें मौका मिले तो वह कुछ कर सकती हैं, लेकिन आज महिलाएं मौका छीनना जान चुकी हैं और उपलब्धियां हांसिल कर रही हैं। आज महिलाएं मौके की मोहताज नही हैं।

समारोह में समाज के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली शांति किंडो, दीपिका सूद, अंजू अनामिका, रेखा शर्मा, नूतन धामा, रजिया सुल्तान, दर्शना शर्मा को भी सम्मानित किया गया।  झारखण्ड के आदिवासी इलाकों में महिला उत्थान की अलख जगाने वाली शांति किंडो अपने सम्मान पर बेहद उत्साहित दिखीं। उन्होंने भावुक अंदाज में अपने सम्मान को वास्तव में संघर्ष का सम्मान बताया। इस वर्ष अंतरराष्‍ट्रीय मलाला अवार्ड प्राप्‍त करने वाली 15 साल की रजिया सुल्‍तान ने कहा कि आज जरुरत बच्‍चों का बचपन बचाने और उनका रुख बाल श्रम से शिक्षा की ओर मोड़ने की अहम जरुरत है। अंजू अनामिका, नूतन धामा, दर्शना शर्मा, दीपिका सूद, रजिया सुलतान ने भी अपने संबोधन में महिला उत्थान के विभिन्न बिंदुओं और वर्तमान दशा पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता उदय प्रकाश ने उत्तर प्रदेशीय महिला मंच के कार्यों को सराहा। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों का महत्व तब और बढ़ेगा, जब हम अपने आप को अंदर से बदलेंगे। सम्मानित होते वक्त यह ध्यान रहे कि जिस अभियान के लिए सम्मानित किया जा रहा है, आगे भी वह चलता रहे। लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने टूटते लोगो को उम्मीद नई देते हुए, लोग हैं कुछ जिंदगी को जिंदगी देते हुए पंक्ति से अपनी बात कही। ममता किरण ने भ्रूण हत्या पर कटाक्ष किया तो चित्रा मुदगल ने महिला उत्थान के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस दौरान स्मारिका ‘वरदा’ का विमोचन भी किया गया।

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