सियासी जंग के लिए सड़क पर उतरी केजरीवाल सरकार!

आम आदमी पार्टी (आप) का नेतृत्व एक बार फिर सड़क की राजनीति करने पर उतारू हो गया है। फर्क यही आया है कि अब इस पार्टी का नेतृत्व ‘सरकार’ बन गया है। इस पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। उनके छह प्रमुख सिपहसालार मंत्री पदों पर विराजमान हैं। पुलिस से हुए विवाद के एक मामले में पूरी सरकार अब सड़क पर आंदोलन करने पर उतारू हुई है। दिल्ली पुलिस की मनाही के बावजूद मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उनके सभी मंत्री संसद भवन के पास धरने पर बैठ गए। इसके बाद तो नेतृत्व पर पूरी तौर से आंदोलन का रंग चढ़ गया।

केजरीवाल ने धरना स्थल पर ही केंद्रीय गृहमंत्री सुशील शिंदे को खूब खरी-खरी सुनाई। यहां तक कि उन्हें भ्रष्टाचार शिरोमणि तक करार किया। उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह के हवाले से शिंदे पर तमाम गंभीर आरोप लगा डाले। माना जा रहा है कि लोकसभा की चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर टीम केजरीवाल ने सड़क पर उतरने की कवायद की है।

पिछले दिनों दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती और महिला विकास मंत्री राखी बिरला की कहासुनी कुछ पुलिस अधिकारियों से हुई थी। ये लोग मालवीय नगर क्षेत्र के खिड़की एक्सटेंशन इलाके में आधी रात के बाद जनता के बुलावे पर गए थे। इन लोगों ने वहां पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे इस बस्ती के उन संदिग्ध घरों में छापा मारें, जहां कि कुछ अफ्रिकन परिवार रहते हैं। कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने कहा था कि इन घरों में वेश्यावृति एवं नशीले पदार्थों का गोरखधंधा चलता है। इस पर पुलिस अधिकारियों ने यही कहा था कि वे जरूरी जानकारी लेकर ही छापे की कार्रवाई करेंगे, न कि उनके आदेश पर। इस बात पर कानून मंत्री को गुस्सा आया था। वे चिल्लाए, तो पुलिस अधिकारी ने भी टीवी कैमरों के सामने मंत्री को खबरदार किया था। कह दिया था कि वे भी अपनी मर्यादा की लक्ष्मण रेखा न तोड़ें। इस कहासुनी के मामले को मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रतिष्ठा का सवाल बनाया है।

उन्होंने उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात करके अनुरोध किया था कि दिल्ली के जिन तीन पुलिस अधिकारियों ने मंत्री के साथ कहासुनी की है, उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया जाए। मुख्यमंत्री ने पुलिस आयुक्त से भी मुलाकात की थी। उपराज्यपाल ने इस मामले में एक न्याययिक जांच समिति गठित कर दी है। केंद्रीय गृहमंत्री सुशील शिंदे यही कह रहे हैं कि इस जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही संबंधित पुलिस वालों के खिलाफ जरूरी हुआ, तो कार्रवाई की जाएगी। जबकि, केजरीवाल को केंद्रीय गृहमंत्री के यह तर्क एकदम लचर लग रहे हैं। उन्होंने कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में जब वे शिकायत कर रहे हैं, तो कम से कम गृहमंत्रालय को तीन पुलिस अधिकारियों का ट्रांसफर तो कर ही देना चाहिए। लेकिन, गृहमंत्रालय इसके लिए तैयार नहीं हुआ, तो मुख्यमंत्री अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार को धरना देने के लिए सड़कों पर उतर आए। हालांकि, उनके अल्टीमेटम को देखते हुए पुलिस ने पहले ही नई दिल्ली इलाके में धारा-144 लागू कर दी, जिसके तहत एक साथ 5 लोग इकट्ठे नहीं हो सकते।

केजरीवाल ने केंद्रीय गृहमंत्रालय (नॉर्थ ब्लॉक) के सामने धरना देने की तैयारी की थी। पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद केजरीवाल अपने सभी मंत्रियों के साथ रेल मंत्रालय तक धमक आए। यहीं पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। उनसे यही कहा गया कि नॉर्थ ब्लॉक तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा। क्योंकि, इस इलाके में गणतंत्र दिवस परेड की तैयारियां की जा रही हैं। कुछ देर पुलिस अधिकारियों से बहस करने के बाद केजरीवाल ने संसद भवन के पास माइक लेकर भाषण देना शुरू कर दिया। इसके बाद अपनी पूरी टीम के साथ वे धरने पर डट गए। यहीं से उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री शिंदे की खबर ली। पूर्व गृह सचिव आर के सिंह के चर्चित आरोपों का हवाला देकर उन्होंने कहना शुरू किया कि इस देश में एक ऐसा केंद्रीय गृहमंत्री है, जो दिल्ली   के दारोगाओं के ट्रांसफर में पैसा लेता है। यह बात दिल्ली की आम जनता जानती है।

शिंदे के अलावा कांग्रेस के पूरे केंद्रीय नेतृत्व को केजरीवाल इन दिनों जमकर कोस रहे हैं। ताजा प्रकरण में केजरीवाल मीडिया से कह चुके हैं कि अब वे कांग्रेस नेतृत्व को अच्छी तरह से मजा चखा देंगे। पहले इन लोगों ने बगैर मांगे अपना समर्थन देकर उनकी सरकार बनवा दी थी। इनकी मंशा यही थी कि टीम केजरीवाल को दिल्ली सरकार के झंझट में फंसा दो, ताकि ये लोग लोकसभा के चुनाव में उनके लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती न बन पाएं। लेकिन, वे लोग तो आम जनता के हितों की राजनीति करने आए हैं। ऐसे में, इस बात की भी पोल खोल देंगे कि कैसे पुलिस के भ्रष्ट तंत्र को कांग्रेस के कुछ दिग्गज संरक्षण देते हैं? अनौपचारिक बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि जो सही बातें हैं, उन्हें वे सड़क से लेकर विधानसभा तक कहेंगे। यदि सच्ची बातें सुनकर कांग्रेस नेतृत्व को गुस्सा आता हो, तो उन्हें इसकी परवाह नहीं है।
दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने केजरीवाल के इन आंदोलनकारी तेवरों को दुर्भाग्यपूर्ण करार किया है। लवली कहते हैं कि उनकी पार्टी ने तो बगैर शर्त केजरीवाल सरकार को समर्थन दिया है। ताकि, दिल्ली की जनता पर दोबारा चुनाव का बोझ न पड़े। लेकिन, मुख्यमंत्री न्यूनतम राजनीतिक मर्यादाओं का भी पालन नहीं कर रहे हैं। उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि राष्ट्रीय राजधानी की पुलिस दिल्ली सरकार के अधीन नहीं है। ऐसे में, वे जबरदस्ती टकराव की मुद्रा अपना रहे हैं। लवली का आरोप है कि केजरीवाल किसी न किसी बहाने कांग्रेस से इतना टकराव लेना चाहते हैं, ताकि हम इस सरकार से समर्थन वापस लेने को तैयार हो जाएं। लेकिन, हम ऐसा करने नहीं जा रहे। क्योंकि, हम चाहते हैं कि दिल्ली की आम जनता केजरीवाल सरकार का असली चेहरा अच्छी तरह से पहचान ले। सच्चाई तो यह है कि ये लोग सरकार छोड़कर अपनी जिम्मेदारियों से भागना चाहते हैं। क्योंकि, चुनावी घोषणा पत्र में इन लोगों ने इतनी हवा हवाई घोषणाएं कर रखी हैं कि इन्हें अमल में नहीं लाया जा सकता। इसीलिए, ये कोई न कोई बहाना ढूंढ रहे हैं। हम इन्हें बहाने का मौका भी नहीं देने वाले।

शीला सरकार में मंत्री रहे हारुन युसुफ की धारणा भी ऐसी ही है। वे कह चुके हैं कि टीम केजरीवाल ही राजनीति करना नहीं जानती, वे लोग भी सार्वजनिक जीवन में दशकों से हैं। इसीलिए, इनके तमाम उकसावे के बावजूद कांग्रेस इस सरकार से समर्थन वापस नहीं लेगी। कांग्रेस की नीति यही है कि यह सरकार अभी चलनी चाहिए। दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती इस बात से नाराज हैं कि उनके साथ तमाम बदसलूकी करने के बावजूद केंद्रीय गृहमंत्री पुलिस अधिकारियों को संरक्षण दे रहे हैं। जबकि, सच्चाई यह है कि एक सच्चे जनप्रतिनिधि की भूमिका में ही उन्होंने पुलिस वालों को छापेमारी की सलाह दी थी। इसके बावजूद पुलिस वालों ने ठेंगा दिखाया। ऐसे में, यह अपमान उनका नहीं दिल्ली की आम जनता का हुआ है। हमारी नाराजगी इसी को लेकर है। हम चाहते हैं कि अब दिल्ली पुलिस का रवैया बदले। इसीलिए, मुख्यमंत्री के साथ हम लोग सड़कों पर धरना देने के लिए उतर आए हैं।

उल्लेखनीय है कि इस मामले को लेकर दो अफ्रिकन देशों ने भी अपने दूतावासों के जरिए नाराजगी जाहिर की है। युगांडा के एक प्रवासी परिवार ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के मंत्री ने उन पर अनर्गल आरोप लगाए हैं। जबकि, वे लोग किसी भी आपराधिक गतिविधियों में हिस्सेदार नहीं रहे हैं। उनकी गुहार को लेकर मालवीय नगर पुलिस ने एक मुकदमा भी दर्ज कर लिया है। दिल्ली पुलिस की कोशिश है कि इसकी लपेट में कानून मंत्री सोमनाथ भारती भी आ जाएं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करना शुरू किया है। उसने पूरे मामले की रिपोर्ट मंगा ली है। इस झमेले की आंच भी दिल्ली के कानून मंत्री तक पहुंच सकती है।

टीम केजरीवाल अन्ना आंदोलन के दौर में जंतर-मंतर से लेकर रामलीला मैदान तक कई बड़े आंदोलन कर चुकी है। इतनी भीड़ जुटती रही है कि दिल्ली पुलिस ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार भी हलकान होती रही है। टीम केजरीवाल को जनांदोलन का बड़ा उस्ताद माना जाता है। उन्होंने ताजा प्रकरण में भी केंद्र सरकार के खिलाफ जनता को आंदोलन के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। हालांकि, कल शुरुआती दौर में उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे धरना स्थल पर नहीं पहुंचे। लेकिन, जब टकराव की नौबत खड़ी हुई, तो उन्होंने सबको बुलाने की अपील कर डाली। ऐसे में, पुलिस वालों को तमाम रास्ते बंद करने पड़े और बेरीकेड्स लगाकर लोगों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इसके बावजूद संसद भवन के आस-पास ‘आप’ की आंदोलनकारी टोलियों का हुजूम जुड़ता रहा।

‘आप’ के नेतृत्व ने देर शाम ऐलान किया कि यह धरना पुलिस की तमाम बंदिशों के बावजूद जारी रहेगा। धरनास्थल के आस-पास सुरक्षा के नाम पर पुलिसवालों का भारी जमावड़ा रहा। बाद में, यहां रेपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) भी तैनात किया गया। शाम को केजरीवाल सरकार के परिवहन मंत्री सौरभ भारद्वाज का टकराव भी पुलिस वालों से हुआ। इस मामले को लेकर ‘आप’ समर्थक काफी गुस्से में देखे गए। इसके पहले इस पार्टी के विधायक अखिलेश त्रिपाठी से भी पुलिसवालों की   झड़प हुई। दावा किया गया कि विधायक को पुलिस वालों ने जमकर पीटा है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने इस तरह की खबरों से इनकार किया है। भाजपा प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी को लगता है कि केजरीवाल सरकार पुलिसवालों पर कार्रवाई की मांग के बहाने धरने के जरिए चुनावी राजनीतिक स्टंट भर कर रही है। शायद, उन्हें चंद दिनों में ही समझ में आ गया है कि सरकार चलाने और सड़क पर आंदोलन करने में कुछ फर्क होता है। केजरीवाल कहते हैं कि जो लोग इस लोकतांत्रिक धरने को राजनीतिक स्टंट करार कर रहे हैं, वे अब आम जनता के दर्द को समझते ही कहां हैं? क्योंकि, कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेता तो अब वातानुकूलित घरों में रहने के आदी हो गए हैं। इनके आरोपों से ‘आप’ के सच्चे संघर्ष की ऊर्जा कम नहीं होने वाली। जल्दी ही कांग्रेस नेतृत्व को पता चल जाएगा कि उन्हें यह गैर-इंसाफी कितनी महंगी पड़ने वाली है?

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क virendrasengardelhi@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।

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