सीएमडी को महंगी पड़ रही है अवैध चिटफंड संचालक से दोस्ती

भारत सरकार का अतिमहत्वपूर्ण संस्थान, झारखंड के जादूगोड़ा का यूरेनियम माइंस, जो सीधे गृह मंत्रालय के देखरेख में चलता है, यह संस्थान अपने सीएमडी श्री दिवाकर आचार्या के क्रियाकलापों की वजह से अच्छा-खासा बदनाम हो रहा है. यूसिल (यूरेनियम कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) के चेयरमैन श्री दिवाकर आचार्या ने अपने चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी अवैध चिटफंड संचालक कमल सिंह के माल का उदघाटन ६/०५/२०१३ को फीता काटकर किया एवं उदघाटन के बाद उन्होंने कमल सिंह (अवैध चिटफंड संचालक) के परिवार के साथ जिस तरह से हाथ जोड़कर माल के अंदर प्रवेश किया वह यह दर्शा रहा था कि वे कमल से कितनी गहराई तक जुड़े हुए हैं.

दिवाकर आचार्या सबकुछ जानते थे कि कमल चिटफंड का कारोबार करता है और उसने अवैध तरीके से इतना बड़ा माल (लगभग पांच करोड़) बनाया है. माल उदघाटन के पीछे एक ही कारण था कि उनकी कंपनी में काम करने वाले हजारों मजदूरों एवं जनता का विश्वास इन चिटफंडियों पर बढ़ जाये और अधिक से अधिक निवेश करे.

सिर्फ दिवाकर आचार्या ही नहीं यूसिल के अन्य बड़े अधिकारियों ने भी कमल के इस कारोबार में कमल को भरपूर  सहयोग किया है. कमल द्वारा कराये गए एहसान खुरैशी नाइट में यूसिल के सभी बड़े अधिकारी मौजूद थे एवं एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी को इस प्रकार का सम्मान दे रहें थे मानो कोई केन्द्रीय मंत्री हो. इससे भी जनता का विश्वास कमल के कारोबार पर बढ़ता गया, और लोगों ने अरबों निवेश कर डाले.

कमल एवं उनके लोगों के जादूगोड़ा से भागने के कई महीनों पहले ही सामाजिक संस्था इंडियन डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट आर्गनाइजेशन के सचिव धीरेन भकत द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय, झारखंड कोल्हान आयुक्त सहित सभी वरीय अधिकारियों को आवेदन देकर कमल की कंपनी एवं सीएमडी के मिलीभगत की जांच की मांग की थी.

अब कमल के भाग जाने के बाद भी यूसिल द्वारा कमल के ऊपर कोई ठोस कारवाई नहीं की गयी है. नियम का हवाला देकर अधिकारी कमल को बचाने में लगे हैं. इसका एक बहुत बड़ा कारण यह है कि यूसिल के अधिकारियों ने अरबों का काला धन कमल के कंपनी में लगा रखा था और वे अच्छे से जानते हैं कि कमल पर अगर उन्होंने कोई कारवाई की तो सभी की पोल कमल खोल देगा. यहाँ यह बताना जरुरी है कि कमल एवं उसके गुर्गे जादूगोड़ावासियों का अरबों डुबोकर (पन्द्रह सौ करोड़) जादूगोड़ा से भाग चुके हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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