Nadim S. Akhter : भ्रष्टाचार से नहाई यूपीए की केंद्र सरकार की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही…कोलगेट में अभी कानून मंत्री अश्वनी कुमार का इस्तीफा भी नहीं हुआ है कि एक और रिश्वत कांड में रेल मंत्री पवन बंसल का नाम आ रहा है…सीबीआई ने छापेमारी और गिरफ्तारी की है… लेकिन एक बात समझ नहीं आई…केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली सीबीआई इतनी 'निष्पक्ष' कैसे हो गई कि रेल मंत्री के भतीजे पर हाथ डाल दिया…
सबको पता है कि इसके नतीजे क्या हो सकते हैं और रेल मंत्री-यूपीए सरकार इसके बाद कैसे दबाव में आएगी…विपक्ष को यूपीए पर हमले का एक और मौका मिलेगा… क्या कोलगेट में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सीबीआई चीफ वाकई में 'निडर' हो गए हैं औौर राजनीतिक आकाओं से आदेश नहीं ले रहे…या फिर परदे के पीछे एक और पर्दा है…ये दिखाने की कवायद कि देखो…सीबीआई कितनी निष्पक्ष है…मंत्री के भतीजे पर ही हाथ डाल दिया…कितना स्वस्थ है हमारा सिस्टम…
पर एक कांटा है…अगर सीबीआई वाकई में इंडिपेंडेट है तो ये बात मेरे गले नहीं उतरती कि बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के चुनाव से ठीक ऐन पहले पूर्ति ग्रुप पर छापे क्यों पड़े थे, जिसके बाद लगभग चुनाव जीतने जैसे विजयी मुद्रा धारण कर चुके नितिन गडकरी बीजेपी में ऐसे साइडलाइन किए गए कि आज उन्हें कोई याद भी नही करता…अपने ठाकुर साहब यानी राजनाथ सिंह बीजेपी अध्यक्ष बन गए…क्या इसका क्रेडिट सीबीआई को जाता है…शायद हां, शायद ना…!!!??
नदीम अख्तर के फेसबुक वॉल से.





