सुदीप्‍त ने कहा – मंत्रियों को खुश करने में डूब गए!

शारदा फर्जीवाड़े मामले में भले ही पुलिस की जांच से सीबीआई में उल्लेखित बड़े लोगों पर तनिक आंच नहीं आयी है, सीबीआई जांच भी देरी से होने की वजह से उनके पूरी तरह बेदाग निकलने की संभावना है और राज्य सरकार गठित विशेष जांच टीम ने अभी तहकीकात शुरू नहीं की है,​​ लेकिन हाईकोर्ट में हलफनामे में अपेक्षाकृत नरम सुर में सीबीआई जांच का विरोध करने के बाद पुलिस हिरासत से निकलने के बाद आत्मविस्वास से भरपूर सुदीप्त सेन ने फिर बम फोड़ा है और कहा है कि मंत्रियों और बड़े नेताओं को खुश करने में वे और उनका कारोबार डूब गये।

पुलिस जिरह में में सुदीप्त से बैंकखातों और संपत्ति के बारे में आभास मिलने के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा है। जिस देवयानी मुखोपाध्याय पर भरोसा था कि पिज्‍जा खाकर सरकारी गवाह बनकर वह सबकुछ उगल देगी, वह भी अब पुलिस के कब्जे से बाहर है और निजी अस्पताल में आराम फरमा रही है। जाहिर है कि सुदीप्त को यकीन हो गया है कि उनका अब बाल बांका नहीं होने वाला। फिर उनका सुर बदलने लगा है।

बड़े राजनेताओं के संरक्षण के बिना रिजर्व बैंक, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और सेबी की आंखों में लगातार दशकों से धूल झोंकते हुए बंगाल में सैकड़ों कंपनियों का यह खाड़ी देशों तक फैला तिलस्मी कारोबार कैसे चल रहा है, पूंजी बाजार, अंडरवर्ल्ड, माफिया और तमाम राष्ट्रविरोधी तत्वों के बीच आम निवेशकों की जमापूंजी के बंदर बांट का आखिर रहस्य क्या है, इसके निश्चित जवाब सुदीप्त के पास है। उसे तुरंत असम पुलिस के हवाले कर दिया जाये या फिर सीबीआई के, तो चिटफंड में जिनका सत्यानाश हुआ, उन्हें अब भी कुछ रिटर्न मिल सकता है। पर ऐसा होने नहीं दिया जा रहा है। इसके लिए सुदीप्त, एमपीएस, रोजवैली के मालिकों और तमाम चिटफंड कर्णधारों ने देव देवियों की पूजा अर्चना भक्ति पूर्वक की है। जैसा कि सालों तक केकेएन समूह ने पत्रकारों और साहित्यकारों को पुरस्कृत कर साबित कर दिया। राजनीति, फिल्म और खेल, माफिया और अंडरवर्ल्ड इस पंजी परियोजना में कौन नहीं है।

सुदीप्त सेन लगातार अपने सहकर्मियों पर विश्वासघात और गबन का आरोप लगा रहे हैं। पर अभियुक्तों ने कुणाल घोष जैसे दो चार लोगों को पूछकर ही जांच की रस्‍म अदायगी पूरी कर ली। सुदीप्त के परिजनों में से किसीका सुराग लगा नहीं है। सुंदरी ब्रिगेड की एक ही सुंदरी पकड़ी गयीं। साठ हजार से ज्यादा शिकायतें अब तक पाने वाले श्यामल सेन आयोग पर ही भरोसा करना होगा। इसके अलावा कोई चारा नहीं है। वैसे सुदीप्त का दावा है कि अगले तीन महीनों में दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। तमाम चेहरे बेनकाब हो जायेंगे।

शारदा समूह के अध्यक्ष सुदीप्त सेन को अदालत परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन के बीच आज 10 दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। शारदा समूह ने कथित तौर पर पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के हजारों गरीब निवेशकों को चूना लगाया था। उत्तरी 24 परगना की अदालत ने इसके पहले शनिवार को सेन तथा चौहान को धोखाधड़ी और कर्मचारियों को वेतन भुगतान नहीं करने से संबंधित छह अलग-अलग मामलों में 22 मई, 23 मई और 31 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा था।

सेन को दमदम जेल से आज सुबह लाए जाने के बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) देबदीप मन्ना के समक्ष पेश किया गया और पुलिस ने 14 दिन के लिए उसकी हिरासत मांगी। पिछले दरवाजे से अदालत से बाहर निकलने के दौरान जब मीडियाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया तो सेन ने कहा, ‘अगले तीन महीने में सबकुछ साफ हो जाएगा।’ सेन ने कहा कि वह जांच अधिकारियों के साथ सहयोग करेंगे और इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि गरीब निवेशकों को अपना धन वापस मिल जाए।

सेन के साथ उनके सहायक अरविंद सिंह चौहान को भी एसीजेएम ने 10 दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। चौहान भी सारदा समूह चिटफंड घोटाले में आरोपी है। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थकों, चिटफंड कंपनी के एजेंटों और निवेशकों ने बरूईपुर अदालत परिसर के बाहर प्रदर्शन किया जब सेन को अदालत में पेश करने के लिए लाया गया था।

सेन और उनके सहायक को एक बार फिर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा जब पिछले दरवाजे से एक छोटी कार में बिठाकर उन्हें अदालत से ले जाया गया। जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने हाथापाई का रूप ले लिया तो पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इसमें एक व्यक्ति घायल हो गया। उनकी कंपनी के पतन के कारणों के बारे में पूछे जाने पर सेन ने कहा कि उनके कुछ विश्वस्त कर्मचारी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​ की रिपोर्ट.

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