सुनंदा के शरीर पर चोट के निशान, अस्वाभाविक मौत, शशि थरूर तो गया…..

Mukund Hari : सुनंदा पुष्कर की मौत शशि थरूर के लिए न सिर्फ बड़ी परेशानी बन सकती है बल्कि कई ऐसे सवाल भी खड़े कर रही है जिनका जवाब देना भारी पड़ेगा शशि थरूर को। सबसे पहली परेशानी तो सुनंदा की मौत के वक्त शशि थरूर की वहां मौजूदगी के बारे में है। थरूर की तरफ से जारी बयान के मुताबिक सुनंदा की खराब हालत देख, थरूर ने होटल के डॉक्टर को बुलाया, जबकि पुलिस का कहना है कि डॉक्टर को पुलिस ने बुलाया। सच कई परतों में छुपा हुआ है। धीरे-धीरे परत दर परत सामने आएगा। फिलहाल तो यही काफी है कि पोस्टमॉर्टम में डॉक्टरों को सुनंदा के जिस्म पर चोट के कई निशान मिले हैं और प्रथमदृष्टया ये मौत अचानक और अप्राकृतिक रूप से हुई बताया जा रहा है, जो एक बड़ा इशारा है।

Niloo Ranjan : डाक्टर: सुनंदा के शरीर पर चोट के निशान, अस्वाभाविक मौत। शशि थरूर तो गया…..

Anjana Om Kashyap : Mystery over sunanda's death: autopsy says there were physical injuries,doctors call death'unnatural'…

Shabbir Khan सुनंदा पुष्‍कर की मौत पर लेखिका तस्लीमा नसरीन ने ट्वीट किया, 'दोषी चाहे कोई भी हो. मरना हमेशा औरत को ही पड़ता है-..

Dinesh Choudhary : कोई जिये या मरे, उनकी बला से! होटल के कमरे में खूबसूरत महिला की मौत, कहानी में विदेशी सुंदरी की दखल, केंद्रीय मंत्री की पत्नी। चैनल बहादुर किस तरह खेल रहे हैं इस खबर पर! मुफ्तखोर मीडिया के भाग से छींका टूट गया है। देखते रहिये, जाइयेगा नहीं, अभी मिलते हैं, एक ब्रेक के बाद…

Pallavi Upadhyay Mishra : ट्विटर पर शशि थरूर ने मुझसे बदतमीज़ी कि थी तब सुनंदा थरूर ने अपने पति के तरफ से मुझसे माफ़ी माँगी थी. दूसरी तरफ यह मेहर तरार शशि थरूर के तरफ से मुझसे लड़ने आयी थी। दोनों औरतों में जमीन आसमान का अंतर था।अब शायद शशि थरूर मेहर तरार के पास चले जायेंगे। वे सुनंदा थरूर जैसी पत्नी deserve नहीं करते थे। भगवान सुनंदा थरूर की आत्मा को शांति प्रदान करें।

Baabusha Kohli : थरूर एलीट क़िस्म का लफंटर है. उसका अश्वमेध यज्ञ अभी थमेगा नहीं. अभी और रिश्ते होंगे, और भी बलियाँ होंगी.

Dayanand Pandey : मौत किसी की भी हो दुखद होती है। कल दो स्त्रियों की मौत की खबर मिली। पर सच बताऊं कल मेरे लिए सुचित्रा सेन की मौत ज़्यादा तकलीफ़देह है। प्रेम की पीड़ा और तड़प वह भी भुगत कर गई हैं। उन के जीवन में भी उत्तम कुमार थे। उत्तम कुमार ही के चलते वह तैतीस बरस निर्वासन का जीवन जीती रही थीं। सार्वजनिक जीवन से कुट्टी कर रखी थी। लगभग किसी से मिलती जुलती भी नहीं थीं। लेकिन माफ़ कीजिए सुनंदा पुष्कर की तरह कायराना प्रेम कर के, कायर मौत उन्हों ने फिर भी नहीं चुनी। मीडिया यानी खबरिया चैनलों की बात और है, उस ने तो टी आर पी से मुहब्बत की है।

Daya Sagar : इस चर्चित प्रेम कहानी का यही अंत होना था। शशि थरूर और सुनंदा, दोनों में से किसी एक को इस तरह मरना ही था। होटल के एकान्त कमरे में सुनंदा के लिए फैसला लेना आसान हो गया। तीन शादिया तोड़नें और तीन साल साथ रहने के बावजूद दोनों ये समझ नहीं पाए कि अनंत इच्छाओं का कोई अंत नहीं। शुक्रवार की रात भीगे सर्द मौसम में दिल्ली पुलिस को पांच सितारा होटल के कमरे में 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड की लाश मिली। क्या अब नरेन्द्र मोदी गर्लफ्रेंड की लाश की कीमत बता सकते हैं?

DrKavita Vachaknavee : जो पुरुष पहली स्त्री के रहते दूसरी पर रीझ सकता है, वह दूसरी के रहते तीसरी पर भी रीझ सकता है व इसी तरह तीसरी के रहते चौथी पर भी। इस लम्पटता का कभी कोई अन्त नहीं। इसलिए पहली के अतिरिक्त दूसरी या तीसरी या चौथी का स्थान लेने का अपराध व भूल स्त्रियाँ कभी न करें…. !
सुनन्दा थरूर द्वारा मृत्यु का वरण करना बहुत कष्टप्रद व दु:खदायी समाचार है ! ! वेदनापूर्ण विदाई सुनन्दा !! वैसे यह एक मंत्री के आई एस आई एजेंट से सम्बन्धों को सार्वजनिक कर देने का परिणाम (दण्ड) है कि सुनन्दा को मौत की नींद सुला दिया गया ताकि देश से गद्दारी चलती रह सके और भंडा फोड़ न हो।

Priyanka Singh : मैं सुनंदा पुष्कर के मृत्यु पर ज्यादा कुछ नहीं कहूँगी…..बस इतना ही कि एक मुहब्बत ने एक मुहब्बत की हत्या कर दी या करवा दी….या यूँ कहें कि मुहब्बत करने वाले की मुहब्बत में जान चली गयी……किसी ने खूब लिखा है……मुहब्बत कर तो लें लेकिन मुहब्बत रास आये भी…..दिलों को बोझ लगते हैं कभी जुल्फों के साये भी….हजारों गम हैं इस दुनिया में अपने भी पराये भी..मुहब्बत का ही गम तनहा नहीं हम क्या करें…………..

Kishor Jha : सुनँदा पुष्कर, अनुराधा बाली, जिया ख़ान जैसी महिलाओँ का हश्र आखिर ऐसा क्योँ होता है ? क्योँ ये महिलाएँ आत्मनिर्भर नहीँ थी ? इसको क्या नाम दिया जाए "भावनात्मक धोखा" या अपने पति या प्रेमी का "आशिक मिजाजी" या कुछ और…..

Chandan Srivastava : सुनन्दा जिस तरह से अभिव्यक्ति मे भरोसा करती दिखती थीं, मुखर हो कर अपनी बात रखती थीं और अभिव्यक्ति के साधनों का खूब इस्तमाल करती थीं, इससे एक बात तो तय है कि यदि उन्होने सुसाईड किया तो कोई ना कोई नोट जरूर छोड़ा होगा. लेकिन ऐसा कोई नोट अभी तक सामने नहीं आया है. तो एक बात तो बहुत हद तक साफ है कि सुनन्दा की मौत कुछ भी हो सुसाईड नहीं हो सकती. पुलिस इस बिन्दु पर जरूर ध्यान दे रही होगी.

Dilnawaz Pasha : मैंने अपने पेशेवर पत्रकारिता करियर की पहली स्टोरी शशि थरूर पर ही की थी. सितंबर 2009 में थरूर के 'कैटल क्लास' कमेंट की आलोचना हो रही थी. थरूर अफ़्रीका में थे. ट्विटर पर नज़रे गढ़ाए मैं उनकी ट्वीट का इंतज़ार कर रहा था. थरूर की ट्वीट के तुरंत बाद मैंने उन्हें सवाल भेजे, उन्होंने जबाव दिया. मैंने फिर सवाल भेजे और वे जबाव देते रहे. उस वक़्त भारत में रात के करीब बारह बजे थे. थरूर ने अपने कैटल क्लास कमेंट के लिए माफ़ी भी माँगी. ये अफ़्रीका में मौजूद मंत्री का ट्विटर के ज़रिए किया गया सार्वजनिक साक्षात्कार था जो अगले दिन अख़बार के पहले पन्ने पर छपा था. और उस वक़्त मुझे नौकरी शुरू किए सिर्फ 18 दिन ही हुए थे. मेरे लिए यह कहना भी ग़लत नहीं होगा कि सोशल मीडिया (ट्विटर) की असली ताक़त का पाठ शशि थरूर ने ही हमें पढ़ाया!

Narendra Nath : तीन पहले जब शशि थरूर की ट्वीट कंट्रोवर्सी सामने आयी तो रात के करीब बजे सुनंदा पुष्कर को फ़ोन किया था एक ही रिंग में उसने उठाया था.एक मुलाकात पहले हुई थी,लेकिन फ़ोन पर पहली बार बात हो रही थी.सवाल निजी थे सो सवाल पूछने में हिचक रहा था.लेकिन खुद सुनंदा ने जवाब दे दिया के-उनका अकाउंट हैक नहीं है,जो कुछ लिखे है उसने लिखा है फिर कुछ और बात एक मिनट में कह कर फ़ोन काट दिया।अंदाजा लग गया कि वह पुरे "होश" में नहीं थी.आरोप गम्भीर सो उसे इग्नोर कर दिया कि जो कुछ उन्होंने कहा था। हालाँकि उनके आरोप पब्लिक डोमेन में आ ही गए.अगले दिन सुनंदा और शशि ने "बात निकलेगी तो दूर तलाक जाएगी" के डर को समझ एक जॉइंट स्टेटमेंट दे दिया कि "हम साथ साथ हैं". लेकिन एक्यूट डिप्रेशन (?) में जा चुकी सुनंदा ने सोच लिया " इस रात की सुबह नहीं"और जान दे दी अब इसका दूसरा पहलू देखें,सुनंदा जिँददिल इंसान थी. पेज 3 पार्टी की शान.खुद खुलेआम कहती की उसे मर्दों की दुनिया में उसने अपने लिए रास्ते खुद बनाये थे. महंगे जीवन,गाड़ी,और स्टाइल का शौक है.वह इससे इंकार नहीं करती थी.कैमरा अच्छे लगते थे सुनंदा को. लेकिन सुनंदा को एक बात का दुःख शुरू से था.एक इंटरव्यू में उसने कहा था- "In 1 minute,without bothering to find out any fact media just turned me into slut,into some kind of brainless eye candy" वह कश्मीरी पंडितों की लड़ाई भी लड़ रही थी. शशि थरूर को पॉलिटिकली गाइड भी करती थी. एक स्वतंत्र विचारक थी.लेकिन हमने उसके इस पहलु को कभी जगह नहीं दी.इलीट सोसाइटी में भी महिला को किस तरह बस एक "एक कैंडी प्रोडक्ट" के रूप में यूज़ किया जाता है इसकी एक मिसाल सुनंदा थी.वह सीके आगे कि पहचान पाने की जद्दोजहद में हार गयी.ये सुसाइड नहीं,सोशल मर्डर है सर जी

Mansi Manish : शशि थरूर के घर में पुताई चल रही थी तो होटल में जाकर ठहरे थे। वहां भी शशि थरूर ने दो कमरे बुक कराये। साझा ट्वीट करके पूरी दुनिया को ये दोनों वो बता रहे थे जो उनका अपना दिल नहीं मान रहा था। मेरी समझ से ये हाई प्रोफाइल लोग भीतर से डिप्रेशन के शिकार हैं। अपने भीतर जलजला छुपाकर ये मीडिया और सोशल मीडिया से झूठ बोलते हैं। बड़ी-बड़ी पार्टियों में आए ये हंसते चेहरे भीतर से घुट रहे होते हैं। खासकर इस जमात की औरतें भीतर से असुरक्षित महसूस करती हैं। सच्चाई वो नहीं है जो ये अपने ढंग से दिखाते हैं, खबरें वो हैं जो ये हंसी के भीतर छुपाते हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से उन लोगों की आलोचना करती हूं जो इस मामले में सोशल मीडिया को कोस रहे हैं। सोशल मीडिया में यह मुद्दा खुद सुनंदा सामने लाईं थीं न कि उनके फॉलोअर्स…

Arshana Azmat : सुनंदा, तुम्हे अभी कुछ दिन और जीना चाहिए था। शशी थरूर की चौथी शादी देखनी चाहिए थी। बल्कि उस शादी में जाना चाहिए था। गिफ्ट में हनीमून पॅकेज देना चाहिए था। फिर उस शादी के टूटने पे अफ़सोस ज़ाहिर करना चाहिए था। फिर पांचवी शादी पे बधाई का एसएमएस भेजना चाहिए था। फिर एक उम्र बाद एक अंतिम बार उनसे मिलने जाना चाहिये था। तब जब उनकी ज़िन्दगी से सारी औरतें जा चुकी हों। बल्कि औरतो के साथ रहने की इच्छा जा चुकी हो। बच्चे विदेश में हों , वो किसी अस्पताल या फार्म हॉउस में बिलकुल तनहा रहते हों। लाल, नीली, पीली कोई बत्ती बाकि न बची हो। उन्हें महीनो कोई फोन न करता हो। वो बीमार रहते हों मगर डॉक्टर बीमारी ढूंढ न पा रहे हों। उन अंतिम पलों में दिल में बिना कोई शिकायत लिए सच्चे मन से उनसे हमदर्दी ज़ाहिर करनी चाहिए थी। उसके बाद तुम्हे दुनिया से जाना था। तुम ये सब देखे बिना ही चली गयी। तुमने कृष्ण की कहानी नहीं पढ़ी थी। जिसके पास 1600 रानियां थी। सुनते हैं अंत समय किसी जंगल में वो अकेले मरे थे। परिवार, पत्नी, प्रेमिका, दोस्त कोई साथ नहीं था। वक्त हर चीज़ का इंसाफ करता है। उसने भगवान को नहीं छोड़ा, शशी तो फिर इंसान हैं।

Arvind Kumar Singh : शशि थरूर की पत्नी श्रीमती सुनंदा पुष्कर ने आत्महत्या की है या कोई और वजह है ये तो जांच के बाद ही साफ होगा….लेकिन मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आयी कि मणिशंकर अय्यर जैसे काबिल लोगों और कई जनाधार वाले नेताओं को किनारे रख कर बार-बार शशि थरूर को मंत्री क्यों बनाया जाता रहा…वो हैं क्या…और उससे कांग्रेस का कोई आधार बढ़ा है क्या…शायद नहीं कैटल क्लास से लेकर पांच रूपए में खाना खिलाने के बयान देने वाले नेताओं ने एक राष्ट्रीय पार्टी को तबाह कर दिया है…लेकिन अभी भी अकड़ तो देखो…जैसे देश इनके नाते ही चल रहा है….

Swami Balendu : आत्महत्या करने वालों की मानसिकता… मुझे तो बहुत अजीब लगता है जब कोई यह कहता है कि प्रेम के कारण आत्महत्या कर ली! जो आत्महत्या करता है वह खुद से ही प्रेम नहीं करता और जो खुद से प्रेम नहीं करता वो भला दूसरों से प्रेम कैसे करेगा! और खासतौर से आत्महत्या करने वाला तो स्वतःसिद्ध स्वार्थी है जो कि किसी से भी प्रेम नहीं करता खासतौर पर अपने प्रेम करने वालों से तो बिलकुल भी नहीं! यदि करता होता तो भला आत्महत्या करने से पहले यह क्यों नहीं सोचता कि मैं तो मरने के बाद मुक्त हो जाऊंगा परन्तु पीछे प्रेम करने वाले स्वजन संबंधी और मित्रों की क्या दशा होगी! अतः इस मानसिकता का व्यक्ति मुझे घोर स्वार्थी तथा अपने और दूसरों के प्रति प्रेम से रहित लगता है! पिछले दिनों एक महानुभाव की इस विषय में पोस्ट देखी जोकि आत्महत्या करने वाली मानसिकता का महिमामंडन कर रही थी! उस पोस्ट का आशय कुछ ऐसा था कि आत्महत्या करना बहुत हिम्मत का काम है, हर किसी में इतनी ताकत नहीं होती कि अपनी जान ले सके! परन्तु मेरे विचार से आत्महत्या करने वाले लोग हिम्मत वाले नहीं बल्कि हताशा से घिरे कायर होते हैं! जोकि परिस्थिति का सामना करने के बजाय मौत को गले लगाने जैसा कदम उठाते हैं! खुद को ख़त्म कर लेने जैसी तथाकथित क्षणिक वीरता वस्तुतः सबसे बड़ा पलायन और कायरता है! और मुझे लगता है कि इनका इस तरह महिमामंडन करने वाले लोग समाज में आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं! एक और बात यह कि कल्पना करें: कितनी हिंसक मानसिकता होती होगी उस व्यक्ति की, जो खुद अपनी जान लेने में नहीं हिचक रहा! मौका मिले तो ऐसा व्यक्ति किसी की भी जान ले सकता है! जब वह हताशा और भय से मजबूर हो जाता है और परिस्थिति वश कुछ कर भी नहीं पाता तो अपनी जान दे देता है! निश्चित ही यदि मौका मिलता तो उसकी हिंसक मानसिकता कितनों की भी जान ले सकती थी! इसीलिये हिंसक प्रवृत्ति के हत्यारों में यह अकसर देखा जाता है कि हत्याओं के उपरान्त वो आत्महत्या भी बड़ी आसानी से कर लेते हैं! मुझे आत्महत्या करने वालों से सहानुभूति इसलिए नहीं होती क्योंकि वह खुद तो सभी बंधनों से मुक्त हो जाते हैं परन्तु अपने प्रेम करने वालों को जीवन भर का कष्ट दे जाते हैं! नोट: उपरोक्त पोस्ट किसी भी व्यक्ति विशेष के बारे में नहीं बल्कि आत्महत्या की मानसिकता के विषय में है! निश्चित ही बहुत से लोग इन विचारों से असहमत होंगे और यदि आप भी इससे असहमत है तो भी कोई बात नहीं, आगे बढ़ जाएँ परन्तु मुझे इस विषय में बहस करने में कोई रूचि नहीं है!

Vidyut Prakash Maurya : सुनंदा जैसी महिलाएं आत्महत्या नहीं करती… एक आर्मी अफसर की बेटी। जिसका बचपन कश्मीर की वादियों में आतंकवाद के साए बीच गुजरा हुआ। बचपन से ही उसने जिंदगी की मुश्किल घड़ियां देखी थीं। ऐसे हालात जीवन से संघर्ष के लिए मजबूत बना देते हैं। पहली शादी नहीं चल सकी लंबी। तो दूसरे का हाथ थामा। दूसरा पति आर्थिक हानि के बाद मायूस रहने लगा। देश वापस लौट आया। पर सुनंदा नहीं लौटी। क्योंकि वह मजबूत इरादों की बनी थी। उसने अपने दम पर अपना व्यवसाय आगे बढ़ाया। ब्यूटी पार्लर,  स्पा बिजनेस में पैसा लगाना। हाई प्रोफाइल सोशल वर्ल्ड में अपनी मजबूत हनक। इन सबके साथ वह शशि थरूर के पास पहुंची। तीसरे पति की तीसरी पत्नी बनी। ऐसी महिलाएं जिंदगी में कमजोर नहीं होतीं। वे हालात का मजबूती से सामना करती हैं। अपनी मौत के एक हफ्ते पहले दुबई की पार्टी में उसने दिखा दिया था। पाकिस्तान के बड़े पत्रकार को हड़का दिया था। उसने खुद बताया कि भारत के अंग्रेजी मीडिया के एक बड़े पत्रकार के साथ उसने कैसा सलूक किया। अपने आखिरी दिनों में अपने तीसरे प्यार को लेकर वह रक्षात्मक जरूर हो गई थी। उनकी आखिरी दिनों की गतिविधियों से कुछ ऐसा ही लगता है। क्या ऐसी मजबूत महिला कोई आत्मघाती कदम उठा सकती है। वह तो विपरीत हालात में जीना कई बार सीख चुकी थी। वह अवसाद के दौर से मजबूती से लड़ना जानती थी। वह बार बार जिंदगी से लड़ कर बार बार जिंदगी गले लगाना जानती थी। वह जिंदगी से अपने लिए मौके छीनना भी जानती थी। किसी शायर ने लिखा है-
पस्त हौसले वाले तेरा क्या साथ देंगे…
इधर आ जिंदगी तुझे हम गुजारेंगे…

सुनंदा की जिंदगी जितनी लोगों के सामने है उसे देखकर लगता है कि उसके हौसले पस्त नहीं हुए थे। आखिर वह जिंदगी से हार क्यों मानती। तो आखिर क्या हो सकता है सुनंदा की मौत का सच।

Manika Mohini : अलस्सुबह तीन बजे आँख खुल गई. फेसबुक खोला तो सुनंदा पुष्कर थरूर की आकस्मिक मृत्यु के बारे में कई पोस्ट पढ़ने को मिलीं। जान कर एक धक्का सा लगा. एक हँसती-चहकती जीवंत शख्सियत कई अनसुलझे प्रश्न छोड़ कर यूँ अचानक कैसे चली गई? दो दिन पूर्व उनके पति मंत्री शशि थरूर और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार की नज़दीकियों की ख़बरें टीवी पर देखी थीं. शशि थरूर और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के बीच के ट्वीट संवाद और उन पर सुनंदा का ऐतराज़ भी सामने आए हैं. ज़ाहिर है कि इस मृत्यु को इसी घटना से जोड़ कर देखा जा रहा है. बताया जा रहा है कि वे बीमार भी थीं. असलियत पुलिस की तहकीकात के बाद ही सामने आएगी। सुनंदा की मृत्यु का जो भी कारण रहा हो, यह खबर स्तंभित करने वाली है. शशि थरूर से उनका विवाह सन 2010 में हुआ था. सात वर्ष से कम अवधि की शादी में लड़की की मृत्यु हो जाने पर तहकीकात बड़े पैमाने पर एस डी एम द्वारा की जाती है. शशि थरूर से भी पूछताछ की जाएगी। सुनंदा इतनी हँसमुख और युवा दिखती थीं कि कोई उनकी उम्र का अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कि वे लगभग 50 वर्ष की थीं. उनका जन्म 1964 में हुआ था. शशि थरूर से उनकी यह तीसरी शादी थी. उनकी पहली शादी उनकी 20 वर्ष की आयु में हुई थी, जिससे 21 वर्ष की आयु में उनका तलाक हो गया था. उसके बाद उनकी शादी दुबई के एक बिज़नेसमैन के साथ हुई, जिसका एक कार दुर्घटना में निधन हो गया. दूसरी शादी से उनका एक 17 साल का बेटा है. 46 वर्ष की उम्र में उन्होंने शशि जी से तीसरी शादी की. इन दोनों की रोमैंटिक जोड़ी को लोगों ने टीवी पर अवश्य देखा होगा। हो सकता है, उनकी मृत्यु स्वाभाविक हो. हो सकता है, सुनंदा ने आत्महत्या की हो. हो सकता है, इस सदमे में उनकी मौत हो गई हो. उनकी आत्मा के शान्ति के लिए दुआ कर सकते हैं.

उपरोक्त टिप्पणियां, जानकारियां, विश्लेषण फेसबुक से लिया गया है.

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