सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज चैनलों के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर नोएडा और गुड़गांव पुलिस से जवाब मांगा

इंडिया न्यूज़, न्यूज़ 24, P7 व न्यूज़ नेशन जैसे चैनलों ने गुड़गाँव की एक 10 वर्षीय नन्ही बच्ची का चारित्रिक हनन किया था. इसकी फरियाद तीन दिन तक लगातार प्रार्थना और प्रदर्शन के बाद ब-मुश्किल गुडगाँव पुलिस ने जीरो FIR के रूप में दर्ज की. गुड़गांव पुलिस ने FIR को नोएडा पुलिस को ट्रांसफर कर दिया| लेकिन नोएडा पुलिस ने भी इनके दबाव में आकर टालमटोली और धक्के खिला FIR गुडगाँव पुलिस को वापस भेज दिया.

इन धक्कों से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने NGO और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से न्याय की मांग की. लेकिन उन्हीं कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने FIR कर उन्हें कानून के जाल में उलझा दिया. नोएडा और गुड़गाँव पुलिस के ऐसे व्यवहार से परेशान हुए शिकायतकर्ता को माननीय सुप्रीमकोर्ट कोर्ट ने आज बड़ी राहत देते हुए मीडिया के खिलाफ कार्रवाई ना करने के आरोप में दोनों राज्यों की पुलिस को नोटिस दे दिया है. साथ ही न्यूज चैनलों के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने को लेकर पुलिस से जवाब मांगा है.   

इंडिया न्यूज़, न्यूज़ 24, P7 व न्यूज़ नेशन ने गुड़गाँव में रहने वाले एक आम परिवार की संत श्री आशाराम बापू के साथ एक पुरानी वीडियो रेकॉर्डिंग को काट छाट कर खबरों में यह दिखाया कि बापूजी उस परिवार की 10 वर्षीय बच्ची के साथ अश्लील हरकतें कर रहे हैं तथा उसी वीडियो में बच्ची की चाची को वार्डन शिल्पी बताया, जो कि संत श्री आशाराम बापू जी मामले में सह-आरोपी थी, जिसका जुर्म साबित ना होने के कारण उसे जमानत पर रिहा किया जा चुका है. उपरोक्त मीडिया चैनलों ने इस फ़र्ज़ी वीडियो क्लिपिंग को, जो कि सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर गैरकानूनी रूप से एडिट की गयी थी, को संत श्री आशाराम बापू के खिलाफ मिले सबूत बताकर आग में घी की तरह दिखाया.

दूसरी ओर बच्ची के परिवार का कहना था कि इस गैरकानूनी रूप से एडिट कर प्रसारित की गयी वीडियो रेकॉर्डिंग की मूल व वास्तविक क्लिपिंग उस समय की है जब उन्होंने उनके पूजनीय गुरु संत श्री आशाराम बापू को अपने घर आने का आमन्त्रण दिया था तथा उनके सेवादार से गुरुदेव के चरणकमल अपने घर पड़ने के उन अमूल्य क्षणों को वीडियो में, एक यादगार के रूप में रिकॉर्ड करने का निवेदन किया था.

जब इस पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए झूठी खबर दिखाने वाले उपरोक्त मीडिया चैनलों के खिलाफ FIR  करानी चाही तो कानून की रक्षा का दावा करने वाली पुलिस ने FIR के नाम पर मज़ाक करते हुए पीड़ित परिवार को गुड़गाँव पुलिस स्टेशन से नॉएडा पुलिस स्टेशन तथा नॉएडा से गुडगाँव के केवल चक्कर ही कटवाए. चैनलों द्वारा प्रसारित tampered क्लिपिंग की जब जांच की गई तो सच्चाई खुद ब खुद सामने आ गई और माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 17/2/2014 को सुनवाई के दौरान  नॉएडा पुलिस और गुडगाँव पुलिस को फटकार लगाते हुए जाँच में हुए विलम्ब के लिए नॉएडा पुलिस और गुडगाँव पुलिस को नोटिस दे दिया है.   

श्रीमती वसुंधरा शर्मा,
अध्यक्षा
“सार्थक”
गैर सरकारी संस्थान (NGO)
नई दिल्ली
9899956535
contactus@sarthak.asia
 

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