सुप्रीम कोर्ट में स्‍वीडन प्रत्‍यर्पण के खिलाफ मुकदमा हारे अंसाजे

लंदन : अमेरिकी दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दुनियाभर में तहलका मचाने वाली स्वीडिश वेबसाइट विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्वीडन प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दे दी। शीर्ष अदालत के प्रेसिडेंट निकोलस फिलिप्स ने कहा, असांजे के प्रत्यर्पण के विरुद्ध अपील खारिज की जाती है। जजों ने 5-2 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। असांजे को फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है। इसके मुताबिक 13 जून तक असांजे का प्रत्यर्पण नहीं होगा।

दूसरी ओर असांजे की वकील डिना रोज ने कहा, सुप्रीम कोर्ट में जिरह के दौरान बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस ही नहीं हो पाई। कोर्ट में जिस प्रकार से इस मामले की सुनवाई हुई उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं। खबर है कि डिना रोज इसी बात को आधार बनाकर फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी में हैं। यदि वह ऐसा करती हैं तो ब्रिटेन के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला मामला होगा। 40 वर्षीय असांजे पर स्वीडन में दो महिलाओं ने दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। स्वीडन के अधिकारी इस मामले में उन पर मुकदमा चलाना चाहते हैं। ऑस्ट्रेलिया में जन्मे असांजे ने इन आरोपों का खंडन किया है।

उनका कहना है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। असांजे को वर्ष 2010 में स्वीडन पुलिस के वारंट पर ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें सशर्त जमानत मिल गई थी। उनके वकीलों ने कोर्ट के समक्ष कहा कि असांजे के खिलाफ यूरोपीय देशों में गिरफ्तारी के लिए जारी किया गया वारंट वैध नहीं है। वैसे, असांजे के पास फ्रांस के स्ट्रॉसबर्ग स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय में अपील करने का विकल्प अभी भी शेष है। बुधवार को असांजे कोर्ट में मौजूद नहीं थे। उनकी वकील ने बताया कि वह जाम में फंस गए थे। ब्रिटेन में नजरबंद असांजे के प्रत्यर्पण पर देश की एक निचली अदालत ने फरवरी, 2011 में मुहर लगा दी थी। पिछले साल विकिलीक्स ने इराक युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध से जुड़े गोपनीय अमेरिकी दस्तावेज सार्वजनिक करके सनसनी मचा दी थी। असांजे को डर है कि स्वीडन जाने पर उन्हें अमेरिका को सौंप दिया जाएगा, जहां उन पर विकिलीक्स से जुड़े हुए दूसरे आरोप लगाए गए हैं, जिनके लिए उन्हें फांसी हो सकती है। (एजेंसी)

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