सुभाष घई को फिर जोरों से लगा अदालती झटका

 

 
मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक सुभाष घई को जमीनों की खरीद मामले में एक बार फिर अदालत से झटका लगा है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने झज्जर स्थित गांव बाधसा में घई की कंपनी मुक्ता आर्ट्स लिमिटेड और विसलिंग वुड्स इंटरनैशनल प्राइवेट लिमिटेड को 20 एकड़ शामलात जमीन बेचे जाने को कैंसल कर दिया है। यही नहीं अदालत ने ग्राम पंचायत को जमीन की कीमत भी ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। ग़ौरतलब है कि सुभाष घई ने महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी इसी तरह की जमीनें खरीदी थीं जिन्हे संबंधित राज्यों की अदालतें खारिज़ कर चुकी हैं।
हाईकोर्ट के ऐक्टिंग चीफ जस्टिस जसबीर सिंह और जस्टिस राकेश कुमार जैन की बेंच ने यह फैसला मंगलवार को सुनाया। उल्लेखनीय है कि घई को इस जमीन की कुल कीमत का भुगतान 20 किश्तों में करना था, इसमें से 7 किश्तें दी भी जा चुकी हैं। बेंच ने ग्राम पंचायत को जमीन का कब्जा वापस लेने का निर्देश तो दिया है, साथ ही यह सवाल भी उठाया है कि आखिर एक निज़ी संस्था को शामलात जमीन बेचने की मंजूरी हरियाणा सरकार ने कैसे दे दी? 
बाधसा के ही रहने वाले नफे सिंह ने इस मामले में एक जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका में कहा गया था कि हरियाणा सरकार ने नियमों को ताक पर रख कर पंचायत की शामलात जमीन सुभाष घई की प्राइवेट कंपनी को देने की अनुमति दे दी। याचिका के जरिये इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने की मांग की गई थी।
याचिका के मुताबिक बाधसा गांव के सरपंच ने 6 जनवरी 2010 को एक प्रस्ताव पारित कर गांव की 20 एकड़ शामलात जमीन प्राइवेट कंपनी को देने का फैसला लिया था। याचिकाकर्ता के वकील दीपक बालियान ने अदालत में कहा कि इससे पहले भी सुभाष घई की कंपनी को महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी इसी तरह जमीनें दी गई थी। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कंपनी को दी गई जमीनों की अलॉटमेंट्स खारिज़ कर दी थी। 

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