सुलतानपुर में चैनल के संवाददाता को दरोगा ने पीटा, आक्रोशित पत्रकारों ने कोतवाली घेरा

: कार्यवाही के नाम पर अधिकारियों ने पत्रकारों को पकड़ाया झुनझुना : सुलतानपुर। बुधवार को थाना कोतवाली नगर के गभडि़या चौकी क्षेत्र में दरोगा ने एक समाचार चैनल के संवाददाता को कवरेज के दौरान मारापीटा। उसका कैमरा, मोबाइल छीनते हुए उसकी मोटरसाईकिल को सीज कर चालान कर दिया। इस मामले की जानकारी मिलते ही कई पत्रकार संगठनों के पत्रकार कोतवाली के सामने धरने पर बैठ गये। अपने को फंसता देख पुलिस ने कार्यवाही का आश्वासन देते हुए मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिसको लेकर पत्रकारों में रोष है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार की सुबह से ही गभडि़या चौकी क्षेत्र में जाम लगा हुआ था। ओवरब्रिज से लेकर आसपास के क्षेत्रों में पैदल चलना दूभर था। वह भी तब जब चौकी के सिपाही ड्यूटी दे रहे। लेकिन मामला यह था की बकरीद का पर्व सर पर है। जानवरों से भरी गाडि़या चौकी क्षेत्र से ही पास हो रही थी। सिपाही धन की उगाही में लगे थे, जिसके चलते जाम लगना आम बात है। इसकी सूचना पर एक निजी चैनल के संवाददाता कमलेश मौर्य अपने कैमरे के साथ मौके पर पहुंच गये। उधर कैमरा देखते ही शाहगंज चौकी के इंचार्ज अरविन्द तिवारी जो फिलवक्त गभडि़या चौकी का प्रभार भी देख रहे हैं ने पत्रकार कमलेश को भीड़ के सामने पीटते हुए उनका कैमरा, मोबाइल छीन लिया।

दरोगा श्री तिवारी ने अपने को बचाने के लिये पत्रकार का भादवि की धारा 151 के तहत चालान कर दिया। पत्रकारों के संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने खबर मिलते ही कोतवाली का घेराव कर दिया। पत्रकारों की मांग थी कि आरोपी दरोगा के खिलाफ कार्यवाही की जाय। एसपी समेत उच्चाधिकारी जयसिंहपुर तहसील में तहसील दिवस में मौजूद थे। ऐसे में एएसपी एवं क्षेत्राधिकारी नगर को मौके पर भेजा गया। उन्होंने आरोपी दरोगा के खिलाफ कार्यवाही का आश्वासन देते हुए पत्रकारों को शांत कराया।

इस घटना को लेकर पत्रकारों का कहना था कि बसपा शासन काल में भीगी बिल्ली बने खाकी वर्दी धारी सपा के राज्य में शेर और चीता बनकर प्रहार कर रहे हैं, जिसका खामियाजा सपा को 2014 में भुगतने के लिये तैयार हो जाना चाहिये। उधर पत्रकार के साथ हुई घटना का एसएफआई ने खुलकर विरोध किया है। एसएफआई ने कहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों एवं पुलिस के अधिकारियों का तानाशाही रवैया खुलकर सामने आ चुका है।

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