सेवा में, श्री यशवन्त सिंह जी, सम्पादक, भड़ास4मीडिया डॉट काम, महोदय, आजादी के इतने सालों बाद भी जाति-बिरादरी को समाप्त करने के दावे किये जाते हैं, लेकिन इन तमाम दावों के बावजूद सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश में स्टेनो संत प्रसाद तिवारी को तरह-तरह से दंद-फंद करके सहायक निदेशक के पद पर पदोन्नति प्रदान कर दी गई जबकि लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश से चयनित चार अफसर इस स्टेनो/चीफ रिपोर्टर से उच्च वेतनमान के हैं। लेकिन सूचना निदेशालय के एक अपर निदेशक अनिल पाठक के रिश्तेदार होने के चलते इस चीफ रिपोर्टर को पुरस्कृत किया गया है।
सहायक निदेशक के पद पर पदोन्नति पाने के लिए वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश सूचना राजपत्रित सेवा नियमावली बनाई गयी थी। लेकिन इस रिपोर्टर ने कभी भी 2002 से नवम्बर, 2012 तक अपनी वरिष्ठता के सम्बन्ध में सवाल नहीं उठाया लेकिन इस चीफ रिपोर्टर का एक रिश्तेदार जैसे ही सूचना निदेशालय में अपर निदेशक बन कर आया तो इसने अपनी वरिष्ठता का दावा ठोक दिया और नियम विरूद्ध शासन को गुमराह करके सहायक निदेशक के पद पर पदोन्नति भी प्रदान कर दी।
जिन चार अधिकारियों का हक मारा गया है वो 1996 से 1997 बैच के अधिकारी है और चीफ रिपोर्टर के पद से उच्च वेतनमान में कार्यरत है। लेकिन विभाग के अपर निदेशक के आगे निदेशक सूचना कुछ भी नहीं कर पाते क्योंकि वो प्रदेश में लैपटाप बांटने में व्यस्त हैं। अपर निदेशक अनिल पाठक का कमाल देखिये, विभागीय पदोन्नति समिति की आनन-फानन में शुक्रवार को बैठक कराकर शनिवार को अवकाश के दिन आदेश जारी कराकर कार्यभार भी ग्रहण करा दिया। प्रभावित अफसरों को रोज धमकाया जा रहा है कि अगर कुछ बोले तो दूर के जिलों में तबादला कर दिया जायेगा। कौन देगा ऐसे अफसरों को न्याय? कृपया इसे भडास पर प्रचारित करने की कृपा करें।
सादर
एस.वी. प्रसाद
पत्रकार
सचिव, बहुजन पत्रकार संघ
कानपुर नगर
दिनांक 10 अगस्त, 2013






