आज के युग में पत्रकारों की कोई अहमियत नहीं रह गयी है. पत्रकारिता की ताकत को देख हर युवा लोग पत्रकारिता से जुड़ना चाहते हैं किन्तु कुछ न्यूज़ चैनल ऐसे भी हैं जो जीविका के नाम पर भीख भी नहीं दे रहे हैं. इसका जीता जागता उदाहरण सुदर्शन न्यूज़ चैनल है जो तनख्वाह के नाम पर रोते दिखाई दे रहा है. यहां वही लोग जुड़ सकते हैं जो अपना घर फूंकना जानते हों और पत्रकारिता को अपना शौक समझते हों, ना कि जीने का सहारा.
सुदर्शन में तो अधिकतर लोग मुफ्त में काम करते हैं और जिनको तनख्वाह मिलती है वे उस तनख्वाह से तो महीने भर चाय पकौड़ी पेट्रोल का खर्च तक नहीं वहन कर सकते. चाय वाला भी सुदर्शन का पत्रकार होने के नाते उधार नहीं देता. सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों से अच्छा वेतन तो मजदूर लोग पा लेते हैं. महोदय आपसे निवेदन है कि इसे भड़ास में जरूर शामिल करें और पत्रकारों का छोटे चैनलों द्वारा किए जा रहे शोषण पर अंकुश लगवाएं. मेरा परिचय गुप्त रखा जाए.
एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






