सैफई का ये पहलवान और उनके समर्थक स्त्रियों के प्रति शुरू से ऐसे ही ‘बलात’ भाव से भरे हैं

Samar Anarya : बलात्कार लड़कों से हो जाने वाली गलती नहीं है बाकी उत्तराखंड आंदोलन के वक़्त रामपुर तिराहे पर आंदोलनकारी महिलाओं का बलात्कार करवाने से लेकर 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस में बहन मायावती पर हमला करवाने के गौरवशाली इतिहास वाले मुलायम सिंह यादव को लगेगा ही. ऐसे लड़कों और मुलायमों दोनों को कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए।

ठीक इसी तरह ब्लैकमेल से लेकर 5 मिनट के टीवी बाईट के लिए झूठे आरोप लगा कर किसी निर्दोष पुरुष को आत्महत्या पर मजबूर कर देना भी छोटी गलती नहीं बल्कि अपराध है और इसके जिम्मेदार मयंक सक्सेनाओं -इला जोशियों से लेकर कविता कृष्णनों और मधु किश्वरों को भी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। (अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारवादी अविनाश पांडेय समर के फेसबुक वॉल से)

Shivani Kulshrestha : आज मुलायम ने रेप पर बयान देकर ये साबित कर दिया है कि ये एक दल्ला है। "रेप पर फाँसी नही होनी चाहिये, लड़कों से गलती हो जाती है", बताओ कितनी गन्दी ज़हनियत वाला आदमी है जो इसने इतना गन्दा बयान दिया है। इस बयान से ये अन्दाजा लगाया जा सकता है कि ये कितना मानसिक रूप से बीमार व चरित्रहीन है। मुम्बई रेपकाण्ड पर अभियुक्तो को फाँसी हो गयी है उस पर ये मरा जा रहा है। इससे पूछो कि क्या उन रेपिस्टो की आरती उतारनी चाहिये थी। और इसे बलात्कार पर बड़ी अच्छी नॉलेज है कि कब लड़की झूठ बोलकर फंसाती है? या तो ये रेप किया है या फिर इसने करते देखा है तभी इसे बड़ी जानकारी है। ये तो कोर्ट से भी बड़ा है जो बिना साक्ष्यों का मूल्याकंन करके बता देता है कि लड़की झूठ बोल रही है। मुझे तो ये दूसरा आसाराम नजर आता है। इसको वो भी अच्छा लगता होगा। पूरा भारतवर्ष जानता है कि यूपी मेँ रेप की ठीक से एफ.आई.आर तक तो लिखी नहीं जाती है। गुन्डा राज्य है यहाँ पर। यूपी की जनता ने अपनी आँख पर जातिवाद की पट्टी बाँध रखी है। जब इस जनता की बेटियाँ घर मेँ घुस कर लूटी जायेगीँ तब ये जागेगीँ। ये मुलायम यूपी को गुमराह कर रहा है कि इसकी सरकार आने पर ये बलात्कार के प्रावधानों मेँ चेंजिँग करेगा। इससे ये पूछो कि संसद नाम की कोई चीज होती है या नहीं? संविधान मेँ संवैधानिक संशोधन को इन दल्लों की वजह से कठिन बनाया गया है। इसी कारण संविधान संघात्मक होते हुये भी एकात्मक सा लगता है। ये संशोधन बहुमत से होता है। ये रेप नही है संशोधन हैं। फिर व्याख्या करने के लिये सुप्रीम कोर्ट है। क्या इसने पूरा लॉ पढ़ा है? इससे पूछो कहां क्या क्या बदलेगा? क्या माननीय न्यायालय अन्धी होकर निर्णय देती है? अभियुक्त को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलता है इसलिये लॉ ने एडवरसरी सिस्टम ऑफ ट्राइल की अवधारणा को अपनाया है। क्या इसने पूरा साक्ष्य अधिनियम पढ़ा है कि कैसे कैसे कोर्ट साक्ष्यों का मूल्याकंन करती हैं? नेचुरल जस्टिस जानता है ये? क्या इसको ये पता है कि अगर "अभियोजन द्वारा दिये गये साक्ष्यों के बडंल मेँ संदेह रूपी एक सुई चुभो देना ही काफी होता है, अभियुक्त को दोषमुक्त कराने के लिये"। क्या ये जानता है कि प्रथम दृष्टया कोर्ट अभियुक्त को निर्दोष मानती है। क्या ये जानता है कि कदम कदम पर प्रत्येक प्रावधान अभियुक्त को सपोर्ट करते हैं ताकि मिस कैरिज ऑफ जस्टिस ना हो पाये। अगर इतने पर भी कोर्ट अभियुक्त को फाँसी देती है तो अपीलेट बॉडी है। बताओ आखिर किसी का झूठ कब तक छिप सकता है। अगर इस पर भी देश की जनता मूक बैठी है तो ऐसी जनता पर मै थूकती हूँ। ये आदमी पूरे यूपी को चकला घर बनाना चाहता है। मैं तो इसको वोट अपनी पूरी लाइफ मेँ नहीं दूगीँ और शिकायत करूंगी। (लखनऊ की युवा अधिवक्ता शिवानी कुलश्रेष्ठ के फेसबुक वॉल से.)

Aflatoon Afloo : लोहिया मानते थे कि स्त्री-पुरुष के बीच बलात्कार और वादाखिलाफी अक्षम्य है। मुलायम उसके विलोम में मानता है। (लेखक, एक्टिविस्ट और कामरेड अफलातून अफलू के फेसबुक वॉल से.)

Sanjeev Chandan : मुलायम सिंह के 'बलात्कारी प्रेम' से चौकने की इच्छा हो रही हो, तो लखनउ गेस्ट हाउस की घटना याद करिये… जब सैफई का यह पहलवान और उनके समर्थक बहन जी के खिलाफ गुंडागर्दी पर उतर आये थे….! स्त्रियों के प्रति ये शुरू से ऐसे ही 'बलात' के भाव में होते हैं … !! (लेखक संजीव चंदन के फेसबुक वॉल से.)

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