सोनभद्र में सपा नेता के खदान में हुए हादसे में एक श्रमिक की जान गई, मीडिया-प्रशासन सब चुप

सरकार किसी की भी हो पूरे उत्‍तर प्रदेश में अवैध खनन बदस्‍तूर जारी रहता है. जिसकी सत्‍ता होती है खनन राज भी उसी का शुरू हो जाता है. सोनभद्र में खनन माफियाओं का चौतरफा राज है. यहां मीडिया भी इन खनन माफियाओं की रखैल हो गई तो तमाम मीडियाकर्मी खुद खनन माफिया बन चुके हैं. शुक्रवार को सोनभद्र के बिल्‍ली पहाड़ी पर एक बार फिर अवैध खनन में एक मजदूर की जान चली गई तथा कई घायल हो गए, लेकिन यह खबर सुर्खियां नहीं बन पाई क्‍यों कि मामला न केवल सत्‍ता पक्ष से जुड़ा हुआ था बल्कि तमाम पत्रकार भी इस अवैध काम में लाभ पाते रहते हैं.

बिल्‍ली पहाड़ी पर सपा के व्‍यापार प्रकोष्‍ठ के प्रदेश कोषाध्‍यक्ष रमेश वैश्‍य का खादान है. इस खादान में जितनी जगह इनको आवंटित है उससे कहीं ज्‍यादा खनन हो रहा है. परन्‍तु कोई रोकने टोकने वाला नहीं है क्‍योंकि कहीं पर सत्‍ता का दबाव है तो कहीं पर पैसों से मुंह बंद रखने की हिदायत. अगर इससे भी बात नहीं बनती है तो बाहुबल तो है ही. यानी साम, दाम, दंड और भेद सारे उपाय अपनाकर यहां रमेश वैश्‍य ही नहीं तमाम लोग निर्गत इलाके से ज्‍यादा में खनन कर रहे हैं यानी अवैध खनन कर रहे हैं.

कल सपा से जुड़े रमेश वैश्‍य के खादान में हादसे में ओबरा के टेढ़ीसेन गांव के आदिवासी मान सिंह की मौत हो गई. मंधार और बबलू नाम के दो श्रमिक घायल हो गए. पर इस हादसे की गूंज कहीं नहीं हुई, जबकि शुक्रवार को ही खनन से जुड़े विभाग के मंत्री ने सपा राज में अवैध खनन रुकने तथा मायावती राज में हुए अवैध खनन की जांच कराने की बात कही थी, पर सारी बातें पहले ही दिन टांय-टांय फिस्‍स हो गईं. इसके पहले जब 2012 में हुए एक बड़े हादसे में कई श्रमिकों की जान गई तो शासन प्रशासन दोनों ने अवैध खनन रोकने का ढिंढोरा पीटा था, परन्‍तु जमीनी स्‍तर पर कुछ भी नहीं हुआ.

एडीएम मणिलाल यादव को अवैध खनन रोकने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है, परन्‍तु अवैध खनन रुकने की बजाय लगातार बढ़ता ही जा रहा है. खनन क्षेत्र में पोकलैन से खनन कराने की मनाही है बावजूद इसके पोकलैन से खनन कराए जाते हैं. तमाम लोगों ने अवैध खनन की शिकायतें पुलिस, प्रशासन, सरकार, नेता सभी से कीं, परन्‍तु अरबों का यह खनन व्‍यवसाय सभी को संतुष्‍ट करके रखता है, जिससे इसके खिलाफ कहीं भी आवाज नहीं उठी. इस बारे में अखबारों में भी एक सामान्‍य सी घटना बताकर छाप दिया गया है. अवैध खनन को लेकर कोई भी अखबार अभियान तभी चलाता है जब उसकी वसूली प्रभावित होती है.

शुक्रवार को हुए हादसे में मान सिंह की जान चली गई. एक गरीब परिवार का सहारा छीन गया लेकिन अखबारों के नैतिक एवं समाजिक चरित्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. जागरण में खदान मालिक के सपा नेता होने के बादे में कोई जानकारी ही नहीं दी गई है. पुलिस ने भी कोई सक्रियता नहीं दिखाई. मामले में रमेश वैश्‍य सहित दो लोगों के खिलाफ मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज करके इतीश्री कर ली गई.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *