‘सोनार गांव’ : ये वो कहानी है, जिसे टेलीविजन दिखा नहीं सकता

: नवरात्रि तक आएगा नीलेंदु सेन का पहला उपन्यास सोनार गांव : लाइट कैमरा और ऐक्शन की दुनिया के जाने पहचाने हस्ताक्षर नीलेंदु सेन का पहला उपन्यास 'सोनार गांव' नवरात्रि में आ रहा है। उपन्यास का कवर पेज देखकर ये लग रहा है कि किताब का सब्जेक्ट काफी बोल्ड है। भूमिका में नीलेंदु सेन ने साफ कहा है कि ये वो कहानी है, जिसे टेलीविजन दिखा नहीं सकता।

कहानी का नायक डॉ. जॉय है, जो सेक्स वर्कर्स को एचआईवी से लड़ाई में मदद करने सोनार गांव आता है। उसके साथ वहां क्या क्या होता है, उपन्यास में पढ़कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। कथानक सच्ची घटना का है, जिसे उपन्यास में बड़े करीने से सजाया है नीलेंदु सेन ने। नीलेंदु सेन पिछले 25 वर्षों से फिल्म और टेलीविजन की दुनिया में सक्रिय हैं।

बरसों तक वे मूविंग पिक्चर में क्रिएटिव हेड और एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर की हैसियत से जुड़े रहे और कई यादगार शो बनाए। दूरदर्शन पर सुबह सबेरे शो की शुरुआत नीलेंदु सेन ने ही की थी। पांच साल से वो आजतक न्यूज चैनल के एक्जीक्यूटिव एडिटर और प्रोग्रामिंग हेड रहे। अपना पहला उपन्यास सोनार गांव उन्होंने अंग्रेजी में लिखा है। नीलेंदु सेन के उपन्यास सोनार गांव का प्रकाशन फ्यूजन बुक्स ने किया है। और इसकी कीमत रखी गई है 150 रुपये। किताब के कवर पर उन्होंने उपन्यास की बानगी भी दी है…

Dr. Joy could be a film star had he not been a doctor of community medicine. Brought up by a padre amongst tribals known for their unfettered sexuality and simple existence, Dr.Joy is raised to be free of any preconceptions of conventional morality so that nothing would hinder him from being of service to fellow human beings. Yet for him, his awesome looks are a constant reminder of his unknown parentage and the reason for his guilt ridden resolve to stay celibate.

He arrives in Sonar Gaaon, to help a trade union of sex workers fight the HIV virus and runs into a welcome that gives him a trailer of the topography that he would have to negotiate. He is molested and mauled by the very people he has come to help. Yet, as he finds help and shelter, he begins to understand the inverse morality that dictates the behaviour of Sonar Gaaon and its inhabitants.

In the dirt and squalour of that wholesale market for paid sex, where violence, apathy and hatred are obvious and manifest Dr.Joy begins his bizarre discovery of many stories of love, empathy and sacrifice. However, when his own furtive love story culminates in a sexual crescendo he is confronted with the moral baggage he has carried all his life. He is torn. The book is an interplay of dramatic situations — a story of fierce battles between good and evil. Except, in Sonar Gaaon it is often impossible to discern between the two. Bafflingly so.

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