सोने का सपना मोदी के लिए बन गया जी का जंजाल!

सियासी दुनिया में कई बार ज्यादा फुर्तीलापन दिखाना काफी महंगा पड़ जाता है। कुछ ऐसा ही इन दिनों भाजपा के ‘पीएम इन वेटिंग’ नरेंद्र मोदी के साथ हो रहा है। उन्होंने उन्नाव के बहुचर्चित गांव डोडियाखेड़ा में टनों सोने के लिए चल रही महाखुदाई को लेकर पिछले दिनों तीखा कटाक्ष किया था। उनके निशाने पर मनमोहन सरकार थी। लेकिन, मोदी का निशाना गलत जगह लग गया। इससे संत शोभन सरकार भड़क गए हैं। उन्होंने मोदी की खबर ली, तो भाजपा के बड़बोले नेता ने बगैर देरी के ‘यू-टर्न’ लेना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं ‘डैमेज कंट्रोल’ के लिए पार्टी के रणनीतिकारों ने शोभन सरकार की मनुहार भी शुरू करा दी है। खबर तो यह भी है कि पार्टी ने कानपुर के एक अपने विधायक सतीश महाना को मोदी के दूत के रूप में शोभन सरकार के पास भेजा है। ताकि, संत महाराज भाजपा से और ज्यादा कुपित न हों। 

दरअसल, 18 अक्टूबर से डोडियाखेड़ा में पुराने किले के परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने खुदाई का काम शुरू किया है। इस खुदाई पर देशभर की निगाहें लग चुकी हैं। क्योंकि, इलाके के जाने-माने संत शोभन सरकार ने एक सपना देखा था। यही कि यहां के पूर्व शासक राजा राव रामबख्स सिंह के किले के नीचे एक हजार टन सोना दफन है। इसे निकाल लिया जाए, तो भारत सरकार की कमजोर आर्थिक स्थिति में काफी मदद मिल जाएगी। शोभन सरकार के एक शिष्य की तरफ से इस आशय की चिट्ठी भारत सरकार को लिखी गई थी। इस चिट्ठी के बाद केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री चरणदास महंत डोडियाखेड़ा पहुंचे थे। इन्होंने शोभन सरकार से मुलाकात की थी। मंत्री जी, जब सुनहरे सपने को लेकर कुछ आश्वस्त हुए, तो उन्होंने बात प्रधानमंत्री कार्यालय तक बढ़ाई थी।

केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत तो यहां तक दावा कर चुके हैं कि उन्होंने इतने अकूत सोने की बात पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी तक पहुंचाई थी। इस सब चर्चा के बाद एएसआई की एक टीम प्राथमिक सर्वेक्षण के लिए डोडियाखेड़ा पहुंची थी। जब इस पड़ताल में यह पाया गया कि चिन्हित स्थान के नीचे कोई न कोई भारी धातु दबे होने के संकेत हैं। इसी के बाद खुदाई के काम के लिए हरी झंडी दी गई। 18 अक्टूबर से यहां खुदाई का कार्य शुरू हो गया है। इस बीच मीडिया ने टनों सोने की बात को एक सनसनी के रूप में पेश की। इसका नतीजा यह निकला कि टीवी चैनलों की कवरेज दिन-रात होने लगी। सभी की उत्सुकता जगी कि संत का सपना सच होता है या नहीं? इतना ही नहीं इलाके के लोगों ने इतने बड़े सोने के भंडार से क्षेत्र के विकास के तमाम सपने बुनने शुरू कर दिए। इस बात को लेकर बहस छिड़ी कि यदि स्वर्ण भंडार के 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी भी इलाके को मिल गई, तो यहां की तस्वीर बदल जाएगी। इस सपने को और हवा देने का काम राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों ने भी कर दिया।

यह अलग बात है कि खुदाई का काम एएसआई के लोग बड़ी धीमी गति से करा रहे हैं। आज खुदाई का पांचवां दिन है। अभी तक इस खुदाई में पुरातत्व महत्व के कुछ टूटे-फूटे बर्तन और पुरानी ईटों के अवशेष मिले हैं। इन्हें भी एएसआई के अधिकारियों ने अपने लिए अमूल्य निधि करार किया है। हालांकि, लोगों की निगाहें तो सोने के भंडार पर लगी हैं। सोना निकलेगा या नहीं निकलेगा, इसको लेकर बहस तेज है। वैज्ञानिक सोच के लोग यही कह रहे हैं कि एक साधु के सपने के आधार पर खुदाई कराने का फैसला अपने आप में अजूबा है। इससे भारत सरकार का दुनियाभर में मजाक बनेगा। कई विपक्षी दलों ने सपने के आधार पर सोना तलाशने की कोशिश को बेकार की कवायद करार किया है। दरअसल, इसी रौ में भाजपा के ‘पीएम इन वेटिंग’ नरेंद्र मोदी भी बह गए थे। उन्होंने शुक्रवार को चेन्नई की एक सभा में इस मुद्दे को लेकर तीखा कटाक्ष कर डाला था। यही कहा था कि एक साधु के सपने के आधार पर सरकार जिस तरह से उन्नाव में खुदाई कराकर सोने की तलाश में जुटी है, इससे दुनियाभर में भारत का मजाक उड़ रहा है।

मोदी जब से भाजपा के चुनावी चेहरा बने हैं, तब से वे मनमोहन सरकार और कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधने का कोई मौका चूकना नहीं चाहते। ऐसे में, बगैर देरी के उन्होंने इस मामले में भी सरकार की चुटकी ले ली। सपने के आधार पर सोने की खुदाई का उपहास करके उन्होंने चेन्नई की बैठक में तालियां जरूर बटोर लीं, लेकिन शायद उन्हें यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि उनकी यह चुटकी काफी महंगी पड़ने वाली है। जब मोदी ने खुदाई को लेकर पलटवार की, तो सरकार की तरफ से यही सफाई दी गई कि केवल सपने के आधार पर उन्नाव में खुदाई नहीं हो रही। जबकि, एएसआई ने वैज्ञानिक पड़ताल के बाद खुदाई की जरूरत महसूस की है। इसीलिए, यह काम शुरू हुआ है। ऐसे में, मोदी का आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं है। एएसआई के निदेशक ने भी इस आशय का बयान जारी किया था।

मजेदार बात है कि सोने के सपने पर तीखा कटाक्ष करने वाले मोदी की अगले दिन ही कानपुर में एक बड़ी चुनावी रैली थी। यह रैली उन्नाव के काफी करीब हो रही थी। लेकिन, इसमें मोदी ने डोडियाखेड़ा में चल रही खुदाई का जिक्र तक नहीं किया। सूत्रों के अनुसार, भाजपा के स्थानीय नेताओं ने मोदी को पहले ही आगाह कर दिया था कि शोभन सरकार के प्रति उनकी आलोचना के स्वर सियासी रूप से पार्टी के लिए काफी नुकदानदेह हो सकते हैं। ऐसे में, वे इस मामले का जिक्र न करें। सावधानी बरतते हुए इस रैली में मोदी ने इस संदर्भ में चुप्पी भी साध ली थी। लेकिन, इससे भी काम नहीं चला। क्योंकि, संत शोभन सरकार ने अपने खास शिष्य के माध्यम से मोदी को एक खुली चिट्ठी लिख दी। जिसमें कि कई तीखे सवाल मोदी से पूछे गए हैं। शोभन सरकार की नाराजगी की खबर लगते ही मोदी ने ‘डैमेज कंट्रोल’ की कवायद तेज कर दी है। उन्होंने सोमवार को एक ट्विटर संदेश जारी किया। इसमें संत शोभन सरकार का जमकर गुणगान किया गया।

ट्विटर संदेश में मोदी ने लिखा,‘संत शोभन सरकार के प्रति अनेक वर्षों से लाखों लोगों की श्रद्धा जुड़ी हुई है। मैं उनकी तपस्या और त्याग को प्रणाम करता हूं।’ इस संदेश के जरिए मोदी ने शोभन सरकार की मनुहार शुरू की है। लेकिन, इसके पहले ही शोभन सरकार का गुस्सा चिट्ठी के रूप में फट पड़ा है। संत ने चिट्ठी के जरिए मोदी ही नहीं, कई सवालों पर बड़े सियासी अंदाज में भाजपा से भी तीखे सवाल किए हैं। यह पूछा गया है कि बोफोर्स तोप और बहुचर्चित रामसेतु के मुद्दे पर मोदी का क्या नजरिया है? यह बताएं। इसका भी जवाब दें कि जिस बोफोर्स तोप को बदनाम किया गया।ॉ, वही कारगिल युद्ध में सबसे काम की साबित हुई या नहीं? इसका भी जवाब चाहिए। यह भी सवाल उठाया गया कि मोदी और उनकी पार्टी इस दौर में अपनी चुनावी सियायत को लेकर जिस सोशल मीडिया को अपना बड़ा हथियार बना रही है, वह किसकी देन है? जिस दौर में सैम पित्रौदा के जरिए राजीव गांधी की सरकार कंप्यूटर अभियान बढ़ाने के लिए ‘सी डॉट’ प्रोजेक्ट शुरू कर रही थी, तो उस समय भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने भी हल्ला मचाया था कि कांग्रेस कंप्यूटीकरण करके देश में बेरोजगारी का संकट खड़ा कर देगी। लेकिन, क्या आप में इतनी हिम्मत हैं कि आप देश को यह बताएंगे कि राजीव गांधी सरकार के कंप्यूटर कार्यक्रम के प्रति आपकी पार्टी का नजरिया एकदम गलत था। इसी तरह से बोफोर्स तोप को बदनाम करके सेना का मनोबल गिराने का काम भी एक गलत राजनीति थी। इस बारे में आप क्या सफाई देना चाहेंगे?

शोभन सरकार के पत्र में सवालों की झड़ी लगा दी गई है। यह भी पूछा गया है कि आपकी पार्टी तो टिहरी बांध को एक अभिशाप करार करती रही है। लेकिन, केदारनाथ आपदा के समय यही टिहरी बांध रक्षक की भूमिका में आया। यदि यह बांध नहीं होता, तो विनाश लीला और बढ़ जाती। आप इस समय बढ़-चढ़कर स्विस बैंक में जमा कथित काले धन की बात जोर-शोर से करते हैं। लेकिन, इसका भी जवाब दीजिए कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार छह साल केंद्र में थी, तो आप लोग इस काले धन को वापस क्यों नहीं ला पाए? उल्लेखनीय है कि चेन्नई में मोदी ने यह सवाल उठाया था कि सरकार सपने के आधार पर सोना पाने की खोज जैसा अवैज्ञानिक काम तो कर रही है। लेकिन, यदि वह विदेशी बैंकों में जमा देश के काले धन को लाने का प्रयास करती, तो कहीं एक हजार टन सोने से ज्यादा की रकम आ जाती। इसी टिप्पणी पर शोभन सरकार की तरफ से जवाब तलब किया गया है।

चूंकि, शोभन सरकार का आध्यात्मिक प्रभाव कानपुर सहित आस-पास के कई जिलों में है। यहां तक कि छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में भी उनकी काफी मान्यता है। शायद, इसी से भाजपा नेतृत्व ने शोभन सरकार के सामने दंडवत की मुद्रा अपना ली है। मोदी के कटाक्ष के बारे में केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच ने मीडिया से यही कहा है कि एएसआई किसी सपने के आधार पर खुदाई नहीं करा रही। बल्कि, एएसआई की पुख्ता रिपोर्ट के बाद ही यह काम शुरू कराया गया है। शोभन सरकार के खास शिष्य ओम बाबा ने गुस्से में यहां तक कह डाला है कि मोदी और उनकी पार्टी सियासी सौदागर बन गए हैं। इन लोगों ने शोभन सरकार का अपमान किया है। ऐसे में, इनसे भी तीखे सवाल पूछे जाएंगे। उन्होंने मोदी और उनकी पार्टी को शोभन सरकार से शास्त्रार्थ करने भी चुनौती दे डाली है। इस विवाद को लेकर कई दलों ने नए-नए रंग भरने शुरू कर दिए हैं। ओम बाबा ने यह भी सवाल पूछा है कि मोदी की रैलियों में इतना खर्च कैसे हो रहा है? यह पैसा   काला है या सफेद? इसका भी देश को जवाब दीजिए।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सपने के आधार पर खुदाई के काम से देश में गलत संदेश जा रहा है। सपने के आधार पर खुदाई एक बकवास से ज्यादा कुछ नहीं है। उन्नाव से लोकसभा की कांग्रेसी सांसद अनु टंडन का कहना है कि भाजपा के लोग ही सबसे ज्यादा धार्मिक पाखंड की राजनीति करते हैं। यही लोग धार्मिक आस्थाओं को सियासी सौदा बनाते रहे हैं। ऐसे में, पाखंड की राजनीति न करें। जबकि, सच्चाई यह है कि डोडियाखेड़ा में खुदाई पुख्ता तथ्यों के आधार पर हो रही है। ऐसे में, मोदी सस्ती लोकप्रियता के लिए शोभन सरकार जैसे प्रतिष्ठित संत को मजाक का पात्र न बनाएं। क्योंकि, मोदी की टिप्पणी से स्थानीय लोगों की जनभावनाओं को भी ठेस पहुंची है। इस तरह की राजनीति सेहतमंद नहीं कही जा सकती। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच भी राजनीतिक रार बढ़ चली है।

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क virendrasengardelhi@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।


संबंधित अन्य आलेखों / विश्लेषणों के लिए यहां क्लिक करें:

पीपली लाइव-2

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *